मंगल ग्रह पर 3.5 अरब साल पहले आई थी विनाशकारी बाढ़, ESA के मार्स एक्सप्रेस ने खोला राज

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मंगल ग्रह पर 3.5 अरब साल पहले आई थी विनाशकारी बाढ़, ESA के मार्स एक्सप्रेस ने खोला राज

सारांश

3.5 अरब साल पहले मंगल की धरती के नीचे छिपा पानी अचानक फूट पड़ा था — और उस एक घटना ने 1,300 किलोमीटर लंबा चैनल बना दिया। ESA के मार्स एक्सप्रेस की नई तस्वीरें उस प्राचीन तबाही की झलक दिखाती हैं और सवाल उठाती हैं: क्या मंगल कभी जीवन के योग्य था?

मुख्य बातें

ESA के मार्स एक्सप्रेस ने मंगल पर 3.5 अरब साल पहले आई भयानक बाढ़ के प्रमाण दर्शाने वाली नई तस्वीरें जारी की हैं।
भूमिगत जल के अचानक फूटने से 10 किमी चौड़ी और 500 मीटर गहरी घाटी बनी।
इस बाढ़ ने शलबताना वैलिस नामक 1,300 किमी लंबा चैनल बनाया — जो इटली की लंबाई के बराबर है।
यह क्षेत्र मंगल के दक्षिणी उच्च भूमि और उत्तरी निम्न भूमि के बीच स्थित है; निकट में क्राइसे प्लैनिटिया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल कभी गर्म और आर्द्र ग्रह था, जहाँ नदियाँ, झीलें और संभवतः महासागर भी थे।
मार्स एक्सप्रेस 2003 से मंगल की परिक्रमा कर रहा है; इसका MARSIS रडार सतह के नीचे पानी और बर्फ का पता लगाता है।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के मार्स एक्सप्रेस अंतरिक्ष यान ने मंगल ग्रह के एक प्राचीन और चौंकाने वाले रहस्य को उजागर किया है — वैज्ञानिकों के अनुसार, करीब 3.5 अरब साल पहले मंगल की भूमिगत परतों में छिपा विशाल जलभंडार अचानक सतह पर फूट पड़ा था, जिसने एक भयावह बाढ़ को जन्म दिया। इस घटना ने मंगल की सतह पर ऐसे निशान छोड़े जो आज भी स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं। ESA ने हाल ही में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों पर इस क्षेत्र की नई तस्वीरें साझा की हैं।

कैसे बनी 1,300 किलोमीटर लंबी घाटी

वैज्ञानिकों के अनुसार, उस प्राचीन बाढ़ की ताकत इतनी प्रचंड थी कि उसने 10 किलोमीटर चौड़ी और 500 मीटर गहरी एक विशाल घाटी का निर्माण कर दिया। इस बाढ़ के प्रवाह ने शलबताना वैलिस नामक एक विशाल चैनल बनाया, जो 1,300 किलोमीटर लंबा है — यह लंबाई इटली की भौगोलिक लंबाई के लगभग बराबर है। यह घटना मंगल के जल-इतिहास को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।

तस्वीरों में क्या दिखा

मार्स एक्सप्रेस द्वारा ली गई नई तस्वीरें मंगल की उस सतह को दर्शाती हैं, जिसे पानी, लावा और समय की तीन शक्तियों ने मिलकर गढ़ा है। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से इम्पैक्ट क्रेटर्स (उल्कापात से बने गड्ढे) दिखते हैं। इसके अलावा हवाओं द्वारा लाई गई ज्वालामुखी राख के धब्बे, लावा के ठंडा होने से बनी सिकुड़ी हुई लकीरें और टूटी-बिखरी चट्टानों वाले अस्त-व्यस्त इलाके भी नज़र आते हैं। यह क्षेत्र मंगल के दक्षिणी उच्च भूमि और उत्तरी निम्न भूमि के बीच स्थित है।

क्राइसे प्लैनिटिया और प्राचीन महासागर की संभावना

इस क्षेत्र के निकट क्राइसे प्लैनिटिया स्थित है, जिसे मंगल का सबसे निचला क्षेत्र माना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहाँ कभी एक प्राचीन महासागर भी रहा होगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, मंगल एक समय गर्म और आर्द्र ग्रह था, जहाँ नदियाँ, झीलें और संभवतः महासागर मौजूद थे। बाद में जलवायु परिवर्तन के कारण यह पानी या तो वाष्पित हो गया या भूमिगत हो गया।

मार्स एक्सप्रेस मिशन और MARSIS रडार

मार्स एक्सप्रेस 2003 से निरंतर मंगल की परिक्रमा कर रहा है और इस ग्रह के बारे में अमूल्य डेटा जुटा रहा है। इस मिशन में नासा (NASA) और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (ASI) भी सहयोगी हैं। मिशन का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण MARSIS रडार है, जो मंगल की सतह के नीचे पानी, बर्फ और अन्य भूवैज्ञानिक संरचनाओं का पता लगाने में सक्षम है। यह तकनीक मंगल के जलीय अतीत को समझने में निर्णायक भूमिका निभा रही है।

आगे की संभावनाएँ

यह खोज इस बहस को और गहरा करती है कि क्या मंगल पर कभी जीवन के अनुकूल परिस्थितियाँ रही होंगी। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि भूमिगत जल की उपस्थिति और प्राचीन बाढ़ की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि मंगल का अतीत पृथ्वी से कहीं अधिक मिलता-जुलता रहा होगा। भविष्य के मिशन इन्हीं सुरागों को और गहराई से खंगालने का लक्ष्य रखते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल ग्रह पर 3.5 अरब साल पहले क्या हुआ था?
वैज्ञानिकों के अनुसार, 3.5 अरब साल पहले मंगल की भूमिगत परतों में छिपा विशाल जलभंडार अचानक सतह पर फूट पड़ा था, जिससे एक भयावह बाढ़ आई। इस बाढ़ ने 10 किमी चौड़ी, 500 मीटर गहरी घाटी और 1,300 किमी लंबा शलबताना वैलिस चैनल बनाया।
शलबताना वैलिस क्या है?
शलबताना वैलिस मंगल ग्रह पर स्थित एक प्राचीन चैनल है जो 1,300 किलोमीटर लंबा है — यह लंबाई इटली की भौगोलिक लंबाई के लगभग बराबर है। माना जाता है कि यह 3.5 अरब साल पहले आई भीषण बाढ़ के कारण बना था।
ESA का मार्स एक्सप्रेस मिशन क्या है और यह कब से काम कर रहा है?
मार्स एक्सप्रेस यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का एक अंतरिक्ष यान है जो 2003 से मंगल की परिक्रमा कर रहा है। इसमें NASA और इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी (ASI) भी सहयोगी हैं, और इसका प्रमुख उपकरण MARSIS रडार मंगल की सतह के नीचे पानी व बर्फ का पता लगाता है।
क्या मंगल ग्रह पर कभी महासागर था?
वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल पर कभी नदियाँ, झीलें और संभवतः महासागर भी मौजूद थे। क्राइसे प्लैनिटिया — मंगल का सबसे निचला क्षेत्र — को एक प्राचीन महासागर का संभावित स्थल माना जाता है, हालाँकि यह अभी भी शोध का विषय है।
मंगल पर पानी कहाँ गया?
वैज्ञानिकों के अनुसार, मंगल पर जलवायु परिवर्तन के कारण सतह का पानी धीरे-धीरे वाष्पित हो गया या भूमिगत हो गया। MARSIS रडार के डेटा से संकेत मिलते हैं कि मंगल की सतह के नीचे आज भी बर्फ और संभवतः तरल पानी के भंडार हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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