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नाउरू ने बदला अपना नाम, अब 'रिपब्लिक ऑफ नाओरो' कहलाएगा यह द्वीपीय देश

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नाउरू ने बदला अपना नाम, अब 'रिपब्लिक ऑफ नाओरो' कहलाएगा यह द्वीपीय देश

सारांश

नाउरू ने खुद को 'रिपब्लिक ऑफ नाओरो' घोषित कर औपनिवेशिक काल की सुविधा-आधारित पहचान को अलविदा कह दिया। 12,000 की आबादी वाले इस सबसे छोटे गणराज्य का यह कदम महज वर्तनी का बदलाव नहीं — यह संप्रभुता, भाषाई गरिमा और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का प्रतीक है।

मुख्य बातें

नाउरू ने आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदलकर रिपब्लिक ऑफ नाओरो रख लिया है।
राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने इसे राष्ट्रीय भाषा की वर्तनी और उच्चारण से मेल खाने वाला कदम बताया।
देश का अंतरराष्ट्रीय कोड NRU से बदलकर NRO हुआ; नागरिक अब देई-नाओरो कहलाएंगे।
संयुक्त राष्ट्र सहित ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिकी-चीनी दूतावासों ने नया नाम अपनी वेबसाइटों पर दर्ज किया।
आबादी मात्र 12,000 ; तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश ।
नाओरो एस्वातिनी ( 2018 ) और तुर्किए ( 2022 ) के बाद औपनिवेशिक नाम बदलने वाला नवीनतम देश बना।

प्रशांत महासागर में स्थित द्वीपीय देश नाउरू ने आधिकारिक तौर पर अपना नाम बदलकर रिपब्लिक ऑफ नाओरो रख लिया है। राष्ट्रपति डेविड एडियांग ने इस निर्णय को राष्ट्रीय भाषा की वर्तनी और उच्चारण के साथ तालमेल बिठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। विश्व के सबसे छोटे स्वतंत्र गणराज्यों में से एक यह देश अब औपनिवेशिक काल में थोपे गए नाम को पीछे छोड़ अपनी मूल पहचान की ओर लौट रहा है।

नाम बदलने की वजह क्या है

सरकार के आधिकारिक बयान (29 जुलाई) के अनुसार, 'नाउरू' नाम कभी देशवासियों की पसंद नहीं था — यह विदेशियों की सुविधा के लिए अपनाया गया था क्योंकि वे मूल उच्चारण नहीं कर पाते थे। आमतौर पर विदेशों में इसे 'नाउ-एरो' बोला जाता था, जो मूल नाम से काफी भिन्न है। नाओरो नाम पहले से ही राष्ट्रीय कोट ऑफ आर्म्स पर अंकित है और संविधान में मान्यता प्राप्त है।

संसदीय प्रक्रिया और संवैधानिक बदलाव

जनवरी में यह प्रस्ताव संसद में रखा गया था। राष्ट्रपति एडियांग ने उस समय कहा था, 'यह प्रस्तावित बदलाव हमारे देश की विरासत, हमारी भाषा और हमारी पहचान का ज्यादा ईमानदारी से सम्मान करने की कोशिश करता है।' संवैधानिक संशोधन को दो राउंड की अनिवार्य संसदीय वोटिंग में मंजूरी मिल गई। मई में आखिरी वोट के बाद राष्ट्रपति ने जनमत संग्रह की घोषणा की थी, लेकिन जुलाई के अंत में सरकार ने स्पष्ट किया कि 'काफी चर्चा' के बाद सांसदों ने तय किया कि सार्वजनिक वोट की आवश्यकता नहीं है।

सरकारी बयान में कहा गया, 'नाओरो नाम कभी खत्म नहीं हुआ — यह पूरी तरह अपनाए जाने का इंतजार कर रहा था। यह नाम पहले से ही लोगों की पहचान है, राष्ट्रीय कोट ऑफ आर्म्स पर है, समुदाय में बोला जाता है और संविधान इसकी इजाजत देता है।'

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलाव

नाम बदलने के साथ देश का अंतरराष्ट्रीय कोड भी NRU से बदलकर NRO हो गया है। देशवासी अब नाउरुआन के बजाय देई-नाओरो कहलाएंगे। संयुक्त राष्ट्र (UN) की वेबसाइट पर नया नाम दर्ज हो चुका है — सरकार ने जून में यह अनुरोध किया था। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड के विदेश मंत्रालयों और इस क्षेत्र में अमेरिकी तथा चीनी दूतावासों ने भी अपनी वेबसाइटों पर नया नाम अपडेट कर दिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम भी बदलना होगा।

नाओरो का इतिहास और वर्तमान चुनौतियाँ

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 12,000 की आबादी वाला यह देश तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है। 1968 में स्वतंत्र गणराज्य बनने से पहले इस प्रवाल द्वीप पर पहले जर्मनी का कब्जा था, फिर ऑस्ट्रेलिया ने इसे प्रशासित किया। उल्लेखनीय है कि इस देश की अपनी कोई राजधानी नहीं है।

1970 के दशक में फॉस्फेट खनन से यह द्वीप समृद्ध हो गया था, लेकिन उद्योग बंद होने के बाद 1990 के दशक में यह आर्थिक संकट में आ गया। अब यह जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र स्तर से सर्वाधिक खतरे में पड़े देशों में शुमार है, जिसकी वजह से सरकार को एक सशुल्क नागरिकता कार्यक्रम के जरिए विदेशी निवेश की तलाश करनी पड़ रही है।

औपनिवेशिक नामों से मुक्ति की वैश्विक प्रवृत्ति

नाओरो इस कदम से औपनिवेशिक अतीत से दूरी बनाने वाला नवीनतम देश बन गया है। इससे पहले अफ्रीकी देश एस्वातिनी ने 2018 में अपना पुराना नाम स्वाजीलैंड बदला था। तुर्की ने 2022 में संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया था कि उसे तुर्किए के नाम से संबोधित किया जाए। राष्ट्रपति एडियांग ने कहा कि यह बदलाव 'नए राष्ट्रीय गौरव की शुरुआत' का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उपनिवेशवाद से पीड़ित देश अपनी भाषाई और सांस्कृतिक संप्रभुता पुनः स्थापित कर रहे हैं। लेकिन जो बात अनुत्तरित है वह यह है कि जनमत संग्रह की घोषणा के बाद उसे वापस लेने का निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बारे में क्या संदेश देता है — भले ही संसद ने मंजूरी दी हो। जलवायु संकट और आर्थिक निर्भरता के बीच यह 'राष्ट्रीय गौरव' की घोषणा उस देश की विडंबना को उजागर करती है जो अपनी पहचान तो वापस ले रहा है, पर अस्तित्व के लिए विदेशी निवेश पर निर्भर है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाउरू ने अपना नाम बदलकर क्या रखा है?
नाउरू ने अपना नाम बदलकर 'रिपब्लिक ऑफ नाओरो' रख लिया है। यह नाम देश की मूल राष्ट्रीय भाषा की वर्तनी और उच्चारण के अनुरूप है, जो औपनिवेशिक काल में विदेशियों की सुविधा के लिए बदल दिया गया था।
नाओरो नाम बदलने का फैसला कैसे हुआ?
जनवरी में यह प्रस्ताव संसद में रखा गया और संवैधानिक संशोधन को दो राउंड की अनिवार्य संसदीय वोटिंग में मंजूरी मिली। मई में आखिरी वोट के बाद राष्ट्रपति एडियांग ने जनमत संग्रह की घोषणा की थी, लेकिन जुलाई में सरकार ने कहा कि काफी चर्चा के बाद सांसदों ने तय किया कि सार्वजनिक वोट जरूरी नहीं।
नाम बदलने से नाओरो के नागरिकों और देश के कोड पर क्या असर पड़ेगा?
देश का अंतरराष्ट्रीय कोड NRU से बदलकर NRO हो गया है और नागरिक अब 'नाउरुआन' के बजाय 'देई-नाओरो' कहलाएंगे। राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम भी बदलना होगा।
नाओरो देश के बारे में क्या खास बातें हैं?
नाओरो प्रशांत महासागर में स्थित एक प्रवाल द्वीप है जिसकी आबादी मात्र 12,000 है — यह तुवालु और वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का तीसरा सबसे छोटा देश है। इसकी अपनी कोई राजधानी नहीं है और यह जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र स्तर से सर्वाधिक खतरे में पड़े देशों में शामिल है।
क्या अन्य देशों ने भी इस तरह अपना नाम बदला है?
हाँ, नाओरो इस प्रवृत्ति में नवीनतम देश है। अफ्रीकी देश एस्वातिनी ने 2018 में अपना नाम स्वाजीलैंड से बदला था, और तुर्की ने 2022 में संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया था कि उसे 'तुर्किए' के नाम से संबोधित किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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