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क्या नेपाल में आंदोलन के कारण 19 की मौत हो चुकी है? पीएम ओली के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?

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क्या नेपाल में आंदोलन के कारण 19 की मौत हो चुकी है? पीएम ओली के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?

सारांश

नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ 'जेन जी' द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है। इस आंदोलन में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि 250 से अधिक घायल हुए हैं। क्या पीएम ओली को इस्तीफा देना होगा? जानिए पूरी स्थिति के बारे में।

मुख्य बातें

नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ 'जेन जी' का आंदोलन उग्र हो गया है।
अब तक 19 लोगों की मौत और 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
काठमांडू में चार क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और सुरक्षा बलों ने जवाब में आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
सरकार का रजिस्ट्रेशन आदेश आंदोलन का मुख्य कारण है।

काठमांडू, 8 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ 'जेन जी' द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब एक बड़े जनविरोध में बदल चुका है। अब तक के हिंसक प्रदर्शनों में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, और 250 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से 8 की हालत गंभीर है। प्रदर्शनकारी पीएम केपी शर्मा ओली से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को युवा, बुजुर्ग और परिवार के सदस्य भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे।

सुरक्षा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात किया गया है और काठमांडू के चार प्रमुख क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया गया है। कर्फ्यू वाले क्षेत्रों में शीतल निवास (राष्ट्रपति कार्यालय), महाराजगंज, ग्रीन हाउस (उपराष्ट्रपति कार्यालय), लैंचौर, नारायणहिती दरबार संग्रहालय और सिंह दरबार क्षेत्र शामिल हैं।

इन क्षेत्रों में रात 10 बजे तक किसी भी व्यक्ति के बाहर निकलने, प्रदर्शन, सभा या जुलूस पर पूरी तरह से रोक है। प्रशासन का कहना है कि कर्फ्यू का उद्देश्य स्थिति को नियंत्रित करना और सुरक्षा बनाए रखना है।

अस्पतालों के सूत्रों के अनुसार, काठमांडू के विभिन्न अस्पतालों में 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 8 की मौत नेशनल ट्रॉमा सेंटर में, 3 की एवरेस्ट अस्पताल में, 3 की सिविल अस्पताल में, 2 की काठमांडू मेडिकल कॉलेज में और 1 की त्रिभुवन टीचिंग अस्पताल में हुई है।

इसके अलावा, इटहरी (सुनसरी जिला) में गोली लगने से घायल दो प्रदर्शनकारियों की भी मौत हो गई है, जिससे कुल मृतकों की संख्या 19 हो चुकी है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 25 अगस्त को नेपाल कैबिनेट ने निर्णय लिया कि सभी सोशल मीडिया ऑपरेटरों को 7 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद, 4 सितंबर को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), व्हाट्सऐप और रेडिट जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया।

इस प्रतिबंध के खिलाफ युवाओं द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब उग्र रूप धारण कर चुका है। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और पुलिस पर पथराव किया, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। सुरक्षा बलों ने जवाब में आंसू गैस, पानी की बौछारें, रबर की गोलियां और गोलियां चलाईं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि मौजूदा हालात न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि यह जनसंवेदनाओं को भी प्रभावित कर रहे हैं। हमें हमेशा अपने पाठकों के प्रति ईमानदार रहना चाहिए और वास्तविकता को उनके सामने रखना चाहिए।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल में आंदोलन का कारण क्या है?
नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन का मुख्य कारण है सरकार का फैसला कि सभी सोशल मीडिया ऑपरेटरों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
कितने लोगों की मौत हुई है?
अब तक इस आंदोलन में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है।
क्या कर्फ्यू लगाया गया है?
हाँ, काठमांडू के चार प्रमुख क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने क्या किया?
प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और पुलिस पर पथराव किया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं।
क्या सरकार ने कोई कदम उठाया है?
सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को तैनात किया है और प्रशासन ने कर्फ्यू का आदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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