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नेपाल में महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव, संसद में पेश हुआ विधेयक

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नेपाल में महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव, संसद में पेश हुआ विधेयक

सारांश

नेपाल ने 'सिविल सर्विस एक्ट 1992' में संशोधन कर महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव रखा है। यदि यह विधेयक पास होता है, तो नेपाल दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों की उस चुनिंदा सूची में शामिल हो जाएगा जहाँ यह अधिकार कानूनी है।

मुख्य बातें

नेपाल सरकार ने 'सिविल सर्विस एक्ट 1992' में संशोधन कर महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव रखा है।
विधेयक इसी सप्ताह फेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट, काठमांडू में दर्ज किया गया।
प्रस्ताव पास होने पर नेपाल दक्षिण कोरिया और जापान जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ जाएगा।
नेपाल इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार सरकारी सेवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 2008 के 8% से बढ़कर मार्च 2026 तक 30% हो गई।
विधेयक में अभी मासिक धर्म अवकाश की अवधि और शर्तें स्पष्ट नहीं की गई हैं।
भारत में मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रव्यापी मासिक धर्म अवकाश नीति लागू करने से इनकार किया था।

नेपाल सरकार ने 'सिविल सर्विस एक्ट 1992' में संशोधन कर महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव रखा है। यह विधेयक इसी सप्ताह फेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट, काठमांडू में दर्ज किया गया, जिसमें फेडरल सिविल सर्विस से जुड़े कानूनों में व्यापक संशोधन और उन्हें एकीकृत करने का प्रयास किया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पिछले दो दशकों में नेपाल की सरकारी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

विधेयक में क्या है प्रस्ताव

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, महिला कर्मचारियों को पहले से उपलब्ध कैजुअल लीव, होम लीव, सिक लीव, स्टडी लीव और एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव के साथ-साथ मासिक धर्म अवकाश, मैटरनिटी लीव, बच्चे के जन्म से जुड़ी छुट्टी और मैटरनिटी केयर लीव भी मिलेगी। हालाँकि, विधेयक में अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मासिक धर्म की छुट्टी किन शर्तों पर मिलेगी और प्रत्येक माह कितने दिनों की छुट्टी स्वीकृत होगी।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य: कहाँ है यह प्रावधान

यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो नेपाल उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जो महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म के दौरान अवकाश देते हैं। दक्षिण कोरिया और जापान सहित कुछ देशों में इस तरह का प्रावधान पहले से मौजूद है, जबकि अधिकांश देशों में अभी भी ऐसी अलग छुट्टी की व्यवस्था नहीं है।

गौरतलब है कि भारत में केंद्रीय सिविल सेवाओं के अवकाश नियमों में मासिक धर्म के लिए अलग से कोई प्रावधान नहीं है। मार्च 2026 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में मासिक धर्म अवकाश नीति लागू करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था, हालाँकि न्यायालय ने सरकार को परामर्श-प्रक्रिया के बाद इस विषय पर विचार करने की छूट दी थी। भारत के बिहार और ओडिशा राज्यों में सरकारी कर्मचारियों को सीमित तौर पर महीने में दो दिन का ऐसा अवकाश मिलता है।

नेपाल में महिला कर्मचारियों की बढ़ती भागीदारी

नेपाल सरकार के इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, केंद्र, प्रांत और स्थानीय स्तर की सरकारी संस्थाओं में डिपार्टमेंट ऑफ सिविल पर्सनल रिकॉर्ड्स (निजामती किताबखाना) में पंजीकृत महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी मार्च 2026 के मध्य तक बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई। 2008 में यह आँकड़ा मात्र 8 प्रतिशत था।

इस बदलाव की एक प्रमुख वजह 2007 में सिविल सर्विस एक्ट 1993 में किया गया संशोधन था, जिसके तहत कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों के लिए सरकारी नौकरियों में 45 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इनमें से 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए, जिससे सरकारी सेवाओं में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

आगे क्या होगा

विधेयक अभी संसद में विचाराधीन है और इसके पारित होने के बाद ही अंतिम नियम और शर्तें स्पष्ट हो पाएँगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मासिक धर्म अवकाश की सटीक संख्या और पात्रता मानदंड तय करना इस विधेयक की सफलता के लिए निर्णायक होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नेपाल का यह कदम दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी ऐसी नीतिगत बहस को प्रेरित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा विधेयक के विवरण में है — अभी तक अवकाश की अवधि और पात्रता शर्तें स्पष्ट नहीं हैं, जो इसे सांकेतिक कदम बनाम व्यावहारिक नीति के बीच के दायरे में रखती हैं। दक्षिण कोरिया और जापान के अनुभव बताते हैं कि जब तक अवकाश का लाभ उठाने में सामाजिक कलंक और नौकरशाही बाधाएँ बनी रहती हैं, कागज़ी अधिकार ज़मीन पर बहुत कम असर दिखाते हैं। भारत में सर्वोच्च न्यायालय के मार्च 2026 के फैसले की पृष्ठभूमि में यह कदम पड़ोसी देश के लिए नीतिगत दबाव भी बन सकता है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल का मासिक धर्म अवकाश विधेयक क्या है?
नेपाल सरकार ने 'सिविल सर्विस एक्ट 1992' में संशोधन के ज़रिये महिला सरकारी कर्मचारियों को मासिक धर्म अवकाश देने का प्रस्ताव रखा है। यह विधेयक अक्टूबर 2026 में फेडरल पार्लियामेंट सेक्रेटेरिएट में दर्ज किया गया है।
क्या नेपाल में यह अवकाश कितने दिनों का होगा?
विधेयक में अभी तक मासिक धर्म अवकाश की अवधि और पात्रता शर्तें स्पष्ट नहीं की गई हैं। यह ब्यौरा संसदीय प्रक्रिया के दौरान तय होने की उम्मीद है।
दुनिया के किन देशों में मासिक धर्म की छुट्टी का प्रावधान है?
दक्षिण कोरिया और जापान सहित कुछ देशों में महिला कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान पहले से मौजूद है। यदि नेपाल का विधेयक पास होता है, तो वह भी इस चुनिंदा सूची में शामिल हो जाएगा।
भारत में मासिक धर्म अवकाश की क्या स्थिति है?
भारत की केंद्रीय सिविल सेवाओं में मासिक धर्म के लिए अलग अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है। मार्च 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रव्यापी नीति लागू करने से इनकार किया, हालाँकि बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में सरकारी कर्मचारियों को महीने में दो दिन का ऐसा अवकाश मिलता है।
नेपाल की सरकारी सेवाओं में महिलाओं की स्थिति कैसी है?
नेपाल इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, सरकारी सेवाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी मार्च 2026 तक बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई, जो 2008 में मात्र 8 प्रतिशत थी। 2007 में सिविल सर्विस एक्ट में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के प्रावधान ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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