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अमेरिकी दबाव के बीच नेतन्याहू का भारत-दांव: रक्षा साझेदारी और रणनीतिक स्वायत्तता की तलाश

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अमेरिकी दबाव के बीच नेतन्याहू का भारत-दांव: रक्षा साझेदारी और रणनीतिक स्वायत्तता की तलाश

सारांश

अमेरिकी दबाव के बीच नेतन्याहू ने भारत को 'दूसरे दोस्त' के रूप में सार्वजनिक रूप से उद्धृत किया। रिपोर्ट के अनुसार, राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स भारतीय कंपनियों के साथ आयरन डोम की तामिर मिसाइलें भारत में बनाने पर बातचीत कर रही है — यह इजरायल की रणनीतिक स्वायत्तता की तलाश का ठोस संकेत है।

मुख्य बातें

नेतन्याहू ने हालिया इंटरव्यू में कहा कि वह 'अभी भारत के साथ नए रिश्ते बना रहे हैं।' रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति वेंस के उस दावे का जवाब था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र सच्चा सहयोगी है।
राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स कथित तौर पर भारतीय निजी कंपनियों के साथ आयरन डोम की तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन पर बातचीत कर रही है।
भारत की बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता और गुट-निरपेक्ष विदेश नीति इजरायल के लिए रणनीतिक रूप से आकर्षक बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत रक्षा सहयोग के बदले किसी देश की विदेश नीति पर शर्तें नहीं थोपता — जो इजरायल के लिए दुर्लभ लाभ है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, 'आपको नए सहयोगी बनाने होंगे और नए रिश्ते विकसित करने होंगे। मैं अभी भारत के साथ यही कर रहा हूं।' जेरूसलम टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान 12 जुलाई को ऐसे समय सामने आया जब इजरायल और अमेरिका के बीच कथित तौर पर तनाव गहराता जा रहा है और इजरायल रणनीतिक विकल्पों की तलाश में है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का यह उल्लेख महज कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि अमेरिकी निर्भरता से परे एक स्वतंत्र साझेदारी नेटवर्क बनाने की इजरायली कोशिश का संकेत है।

अमेरिकी दबाव और नेतन्याहू की प्रतिक्रिया

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका धैर्य समाप्त हो चुका है और इजरायल का अस्तित्व काफी हद तक अमेरिकी समर्थन पर टिका है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र सच्चा सहयोगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बयान का जवाब न देना इजरायल की वैश्विक स्वायत्त पहचान पर सवालिया निशान लगा देता।

इसी संदर्भ में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के 'भारत जैसे दूसरे दोस्त भी हैं।' रिपोर्ट में विश्लेषण किया गया है कि जब किसी नेता की रणनीतिक स्थिति को चुनौती दी जाती है, तो वह ठोस उदाहरणों से अपनी बात साबित करता है — और भारत का नाम उसी रणनीतिक तर्क का हिस्सा था।

रक्षा सहयोग: आयरन डोम मिसाइलों का भारत में उत्पादन

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स भारत की निजी कंपनियों के साथ मिलकर आयरन डोम में उपयोग होने वाली तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन की व्यवस्था भारत में स्थापित करने पर बातचीत कर रही है। यह केवल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नहीं, बल्कि उन्हीं मिसाइलों के वास्तविक निर्माण की योजना है जिनका इस्तेमाल इजरायल रोज़ाना होने वाले रॉकेट, ड्रोन और क्रूज़ मिसाइल हमलों से बचाव के लिए करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल फिलहाल हथियारों के उत्पादन क्षमता से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में भारत की बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता, सुदृढ़ मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क और विशाल कार्यबल इजरायल की एक बड़ी आपूर्ति ज़रूरत पूरी कर सकते हैं।

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता: इजरायल के लिए दुर्लभ लाभ

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत की एक विशिष्ट नीतिगत विशेषता यह है कि वह रक्षा सहयोग के बदले किसी देश की विदेश नीति या क्षेत्रीय रणनीति पर शर्तें नहीं थोपता। भारत ने कई दशकों से अमेरिका, रूस, खाड़ी देशों और ईरान — सभी के साथ एक साथ संबंध बनाए रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस तरह का संतुलित और गुट-निरपेक्ष साझेदार मिलना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

गौरतलब है कि इजरायल को ऐसे साझेदार की ज़रूरत है जिसके साथ सहयोग करने पर उसे नई राजनीतिक शर्तों या बाहरी दबावों का सामना न करना पड़े — और भारत इस कसौटी पर खरा उतरता है।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-इजरायल रक्षा संबंध पहले से ही विस्तार पा रहे हैं और भारत अपनी 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति के तहत विदेशी साझेदारों के साथ सह-उत्पादन को प्राथमिकता दे रहा है। तामिर मिसाइल उत्पादन पर बातचीत यदि सफल होती है, तो यह भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी को एक नए और अधिक परिचालन स्तर पर ले जाएगी। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच रक्षा वार्ता की दिशा और गति इस रणनीतिक समीकरण की असली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि मैत्रीपूर्ण अतिरेक — यह इजरायल की उस बढ़ती बेचैनी को दर्शाता है जो अमेरिका पर एकमात्र निर्भरता से उपजी है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी, विशेषकर तामिर मिसाइल सह-उत्पादन, गाज़ा संघर्ष के भू-राजनीतिक दबावों के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जाँच से बच सकती है। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' उसे एक आकर्षक साझेदार बनाती है, किंतु यही स्वायत्तता उसे किसी एक पक्ष के साथ गहरी परिचालन प्रतिबद्धता से भी रोकती है। तामिर मिसाइल वार्ता यदि आगे बढ़ती है, तो यह परीक्षण होगा कि भारत की 'मेक इन इंडिया' रक्षा नीति कूटनीतिक संतुलन और सैन्य सह-उत्पादन के बीच की रेखा कहाँ खींचती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेतन्याहू ने भारत को रणनीतिक साझेदार क्यों बताया?
रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति वेंस के उस दावे का जवाब था कि अमेरिका ही इजरायल का एकमात्र सच्चा सहयोगी है। नेतन्याहू ने यह साबित करने के लिए भारत का नाम लिया कि इजरायल अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर नहीं है और उसके अन्य भरोसेमंद साझेदार भी हैं।
आयरन डोम की तामिर मिसाइलें भारत में बनाने की क्या योजना है?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स भारत की निजी कंपनियों के साथ तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन की व्यवस्था भारत में शुरू करने पर बातचीत कर रही है। यह केवल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नहीं, बल्कि उन्हीं मिसाइलों का वास्तविक निर्माण है जिनका उपयोग इजरायल रोज़ाना रॉकेट और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए करता है।
इजरायल के लिए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत रक्षा सहयोग के बदले किसी देश की विदेश नीति पर शर्तें नहीं थोपता और दशकों से अमेरिका, रूस, खाड़ी देशों तथा ईरान — सभी के साथ एक साथ संबंध बनाए रखे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल को ऐसा साझेदार चाहिए जिसके साथ सहयोग पर नई राजनीतिक शर्तें या बाहरी दबाव न हों, और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ऐसा गुट-निरपेक्ष साझेदार मिलना दुर्लभ है।
इजरायल-अमेरिका संबंधों में क्या तनाव है?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि उनका धैर्य खत्म हो चुका है और इजरायल का अस्तित्व काफी हद तक अमेरिकी समर्थन पर टिका है। उपराष्ट्रपति वेंस ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका को इजरायल का एकमात्र सच्चा सहयोगी बताया, जिसके जवाब में नेतन्याहू ने भारत जैसे अन्य मित्र देशों का उल्लेख किया।
भारत-इजरायल रक्षा साझेदारी आगे किस दिशा में जा सकती है?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता और मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क इजरायल की हथियार आपूर्ति की कमी को पूरा कर सकते हैं। तामिर मिसाइल उत्पादन वार्ता यदि सफल होती है, तो यह दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को परिचालन स्तर पर एक नई ऊँचाई पर ले जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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