उत्तर कोरिया की 'आत्मरक्षा' चेतावनी — ट्रंप के अभ्यास कटौती आदेश का प्योंगयांग पर नहीं पड़ा असर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' (UFS) की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर दोनों देशों ने इस अभ्यास की अवधि और दायरा सीमित करने का निर्णय पहले ही ले लिया था।
मुख्य घटनाक्रम
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के अनुसार, प्योंगयांग ने इस संयुक्त अभ्यास को 'शत्रु देशों द्वारा किया जा रहा आक्रामक सैन्य प्रदर्शन' करार दिया। उत्तर कोरिया ने यह भी कहा कि वह अपने विरुद्ध किसी भी सैन्य खतरे को पूरी तरह निष्प्रभावी करने के लिए कदम उठाएगा। गौरतलब है कि प्योंगयांग ने अपने इस बयान में ट्रंप के हालिया आदेश का सीधे तौर पर कोई उल्लेख नहीं किया।
यह अभ्यास सोमवार, 18 अगस्त को शुरू हुआ था और मूल रूप से 27 अगस्त तक चलना था। अब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने इसे शुक्रवार को ही समाप्त करने का फैसला किया है। इसके साथ ही, अभ्यास के अंतर्गत होने वाले कुछ मैदानी प्रशिक्षण सत्रों में भी कटौती की जाएगी।
ट्रंप का रुख और सोल की अनजानी स्थिति
राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार, 17 अगस्त को सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास 'बेहद खर्चीले' हैं और उत्तर कोरिया के प्रति 'गलत संदेश' देते हैं। उन्होंने अपने और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच 'अच्छे व्यक्तिगत संबंधों' का भी हवाला दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने बुधवार, 19 अगस्त को संसद में स्वीकार किया कि सोल को ट्रंप के इस निर्देश की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैन्य अधिकारी भी ट्रंप की सोशल मीडिया घोषणा से पहले इस निर्णय से अवगत नहीं थे — जो वाशिंगटन और सोल के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता है।
उत्तर कोरिया का पुराना रुख
उत्तर कोरिया दशकों से अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने विरुद्ध संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखता आया है। प्योंगयांग का आरोप है कि इन अभ्यासों का स्वरूप लगातार वास्तविक युद्ध परिदृश्य के अधिक करीब होता जा रहा है। यह Nवीं बार है जब उत्तर कोरिया ने ऐसे अभ्यासों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, भले ही अभ्यास का आकार पहले से छोटा किया गया हो।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका का पक्ष
अभ्यास में कटौती के बावजूद, दक्षिण कोरिया और अमेरिका दोनों ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी संयुक्त रक्षा क्षमता और सैन्य समन्वय में कोई कमी नहीं आएगी। दोनों सहयोगी देशों का कहना है कि अभ्यास की अवधि घटाना कूटनीतिक संकेत है, न कि रक्षा प्रतिबद्धता में ढील।
क्या होगा आगे
ट्रंप प्रशासन उत्तर कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद की राह खोलने की कोशिश में है, लेकिन प्योंगयांग की ताज़ा चेतावनी यह संकेत देती है कि किम जोंग उन की सरकार फिलहाल इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाने के मूड में नहीं है। आने वाले हफ्तों में तीनों देशों की कूटनीतिक और सैन्य स्थिति पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।