चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में पहली बार पहुंचेंगे विदेशी यात्री, पाकिस्तान के 2 अंतरिक्ष यात्री चुने गए

Click to start listening
चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में पहली बार पहुंचेंगे विदेशी यात्री, पाकिस्तान के 2 अंतरिक्ष यात्री चुने गए

सारांश

अप्रैल 2025 में चीनी अंतरिक्ष स्टेशन के लिए पहली बार विदेशी यात्रियों का चयन हुआ। पाकिस्तान के मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम डऊद को चुना गया। प्रशिक्षण के बाद एक यात्री चीनी स्टेशन में कदम रखने वाला पहला विदेशी बनेगा — यह चीनी अंतरिक्ष इतिहास में ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

Key Takeaways

  • अप्रैल 2025 में चीनी समानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना के पहले बैच के विदेशी यात्रियों का चयन पूरा हुआ।
  • पाकिस्तान के मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम डऊद को चुना गया, जो शीघ्र चीन में प्रशिक्षण लेंगे।
  • प्रशिक्षण के बाद इनमें से एक लोड विशेषज्ञ के रूप में चीनी अंतरिक्ष स्टेशन तियांगोंग में जाने वाला पहला विदेशी बनेगा।
  • फरवरी 2025 में इस्लामाबाद में हुए सहयोग समझौते के आधार पर यह चयन प्रक्रिया शुरू हुई थी।
  • यह घटनाक्रम चीन-पाकिस्तान के बीच अंतरिक्ष और रणनीतिक साझेदारी की एक नई परत को दर्शाता है।
  • चीन का तियांगोंग स्टेशन 2022 से चालू है और अब पहली बार किसी विदेशी यात्री को इसमें भेजने की तैयारी है।

ऐतिहासिक चयन: चीनी स्पेस स्टेशन में पहली बार जाएंगे विदेशी अंतरिक्ष यात्री

बीजिंग, 24 अप्रैल 2025चीनी समानव अंतरिक्ष उड़ान परियोजना के इतिहास में पहली बार किसी विदेशी देश के अंतरिक्ष यात्री चीनी अंतरिक्ष स्टेशन (CSS) में कदम रखने वाले हैं। अप्रैल 2025 में पहले बैच के विदेशी अंतरिक्ष यात्रियों के चयन की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसमें पाकिस्तान के दो उम्मीदवारों — मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम डऊद — का चयन किया गया है।

कौन हैं चुने गए दोनों अंतरिक्ष यात्री

चयनित दोनों उम्मीदवार शीघ्र ही प्रशिक्षु अंतरिक्ष यात्री के रूप में चीन पहुंचेंगे और वहां कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे। सभी प्रशिक्षण चरण सफलतापूर्वक पूरे करने और मूल्यांकन उत्तीर्ण करने के बाद इनमें से एक यात्री को लोड विशेषज्ञ की भूमिका में उड़ान मिशन में शामिल किया जाएगा।

यह यात्री चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवेश करने वाले पहले विदेशी अंतरिक्ष यात्री का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त करेगा। यह उपलब्धि न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि पूरे एशियाई अंतरिक्ष समुदाय के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है।

फरवरी 2025 में हुआ था ऐतिहासिक समझौता

फरवरी 2025 में चीन और पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत चीनी अंतरिक्ष स्टेशन मिशन में पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण की रूपरेखा तय की गई थी। उसी समझौते के आधार पर यह चयन प्रक्रिया आरंभ हुई और अब अप्रैल में सफलतापूर्वक पूरी हुई।

गौरतलब है कि चीन का अंतरिक्ष स्टेशन, जिसे तियांगोंग कहा जाता है, वर्ष 2022 में पूरी तरह चालू हो गया था। तब से यह केवल चीनी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए उपलब्ध था। यह पहली बार है जब किसी अन्य देश के नागरिक को इस स्टेशन पर भेजने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग में चीन की नई भूमिका

यह घटनाक्रम चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम की वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जहां एक ओर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पश्चिमी देशों का वर्चस्व रहा है, वहीं चीन अब अपने स्वतंत्र स्टेशन के माध्यम से विकासशील देशों को अंतरिक्ष अन्वेषण में भागीदार बना रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और दोनों देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक संबंधों की एक नई परत है। अंतरिक्ष क्षेत्र में यह साझेदारी दोनों देशों के बीच तकनीकी और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगी।

तुलनात्मक दृष्टि से देखें तो ISS कार्यक्रम में अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा जैसे विकसित देश शामिल हैं, जबकि चीन का तियांगोंग स्टेशन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को प्राथमिकता दे रहा है — यह एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संदेश है।

आगे क्या होगा

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उड़ान मिशन की तारीख की घोषणा चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) द्वारा की जाएगी। यह मिशन न केवल पाकिस्तान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाई देगा, बल्कि उन अन्य देशों के लिए भी रास्ता खोलेगा जो चीनी स्पेस स्टेशन में भागीदारी के इच्छुक हैं। आने वाले समय में चीन और अधिक देशों के साथ ऐसे सहयोग समझौते कर सकता है।

(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

Point of View

बल्कि एक सुनियोजित भू-राजनीतिक रणनीति है। जब पश्चिमी देश ISS के माध्यम से अपना अंतरिक्ष गठबंधन बनाए हुए हैं, तब चीन तियांगोंग के जरिए विकासशील देशों को अपने खेमे में खींच रहा है — और पाकिस्तान इसका पहला प्रतीकात्मक सहयोगी बना है। CPEC के बाद अब 'स्पेस सिल्क रोड' की शुरुआत हो रही है। भारत के लिए यह संकेत है कि अंतरिक्ष कूटनीति अब सीमाओं और रणनीतिक साझेदारियों को नए तरीके से परिभाषित कर रही है — और इस दौड़ में पीछे रहना महंगा पड़ सकता है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में जाने वाले पहले विदेशी यात्री कौन होंगे?
पाकिस्तान के मुहम्मद जीशान अली और खुर्रम डऊद में से एक चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में जाने वाले पहले विदेशी यात्री बनेंगे। प्रशिक्षण और मूल्यांकन के बाद अंतिम यात्री का चयन किया जाएगा।
चीन और पाकिस्तान के बीच अंतरिक्ष सहयोग समझौता कब हुआ?
फरवरी 2025 में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच यह समझौता संपन्न हुआ। इसके तहत पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया तय की गई थी।
चीनी अंतरिक्ष स्टेशन का नाम क्या है और यह कब से चालू है?
चीन के अंतरिक्ष स्टेशन का नाम तियांगोंग है, जो वर्ष 2022 में पूरी तरह चालू हुआ। अब तक केवल चीनी अंतरिक्ष यात्री ही इस स्टेशन पर जाते रहे हैं।
पाकिस्तानी यात्री चीन में किस भूमिका में मिशन में शामिल होंगे?
चुने गए यात्री लोड विशेषज्ञ की हैसियत से उड़ान मिशन में भाग लेंगे। यह एक विशेष तकनीकी भूमिका होती है जिसमें यात्री प्रयोगशाला कार्यों और मिशन ऑपरेशन में सहयोग करता है।
क्या अन्य देशों को भी चीनी अंतरिक्ष स्टेशन में भेजा जाएगा?
चीन ने संकेत दिए हैं कि वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ अंतरिक्ष उपलब्धियां साझा करने के लिए खुला है। पाकिस्तान के बाद अन्य देशों के साथ भी ऐसे सहयोग समझौते हो सकते हैं।
Nation Press