खैबर पख्तूनख्वा में पोलियो का नौवां मामला, अफगानिस्तान से जुड़ा वायरस; टीकाकरण टीमों पर हमले जारी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर जिले में पोलियो का नौवां मामला सामने आया है — प्रभावित बच्चा बारा तहसील का सात महीने का लड़का है। यह मामला खैबर जिले से तीसरा और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से सातवाँ दर्ज किया गया है। नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (NEOEC) के अनुसार, खैबर के तीनों मामलों में मिले पोलियो वायरस का आनुवंशिक संबंध अफगानिस्तान से पाया गया है, जो सीमापार वायरस प्रसार की गंभीर चेतावनी है।
वायरस का आनुवंशिक स्रोत और सीमापार प्रसार
NEOEC ने पुष्टि की है कि खैबर जिले के तीनों पोलियो मामलों में पाया गया वाइल्ड पोलियो वायरस जेनेटिक रूप से अफगानिस्तान से जुड़ा है। अफगानिस्तान में 2026 में अब तक 50 मामले दर्ज हो चुके हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के केवल दो देश हैं जहाँ वाइल्ड पोलियो वायरस अभी भी सक्रिय है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच खुली सीमा और टीकाकरण में कमज़ोरियाँ वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं।
टीकाकरण अभियान पर हमले: एक के बाद एक घटनाएँ
बुधवार, 5 नवंबर 2026 को खैबर पख्तूनख्वा के जम्रूद में चल रहे टीकाकरण अभियान के दौरान अज्ञात हमलावरों ने पोलियो अभियान टीम के सुपरवाइजर जलील खान का अपहरण कर लिया। जिला पुलिस अधिकारी (DPO) वकार अहमद के अनुसार, हथियारबंद हमलावर उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और नाकेबंदी कर दी गई।
मंगलवार को मोहमंद जिले की पिंडियाली तहसील में हाशिम कोर पुलिस चेकपोस्ट के पास अज्ञात हमलावरों ने पोलियो टीम के साथ तैनात पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी की, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और एक घायल हो गया। मुख्यालय के पुलिस उपाधीक्षक लियाकत अली ने इस हमले की पुष्टि की।
सोमवार को टैंक जिले में अज्ञात बंदूकधारियों ने चार पोलियो कर्मियों का अपहरण कर लिया। वहीं, लोअर साउथ वजीरिस्तान के आजम वारसक इलाके में अपहृत दो पोलियो कर्मियों को बाद में रिहा कर दिया गया। कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े बंदूकधारी इन घटनाओं के पीछे बताए जा रहे हैं।
खैबर पख्तूनख्वा: पोलियो उन्मूलन की राह में सबसे बड़ी बाधा
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में पोलियो टीकाकरण कर्मियों को अक्सर हमलों का निशाना बनाया जाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि राज्य की ओर से पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध न होने के कारण स्वास्थ्यकर्मी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, जिससे अभियान की प्रभावशीलता पर सीधा असर पड़ता है। यह Nवीं ऐसी घटना है जहाँ पाकिस्तान में टीकाकरण अभियान सशस्त्र विरोध का शिकार हुआ है।
वैश्विक स्वास्थ्य पर असर और आगे की राह
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNICEF पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम को सहयोग देते रहे हैं, लेकिन सुरक्षा चुनौतियाँ अभियान को बाधित करती हैं। आनुवंशिक साक्ष्य यह बताते हैं कि जब तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों में एक साथ टीकाकरण कवरेज नहीं बढ़ती, वायरस का सीमापार प्रसार जारी रहेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पोलियो मुक्त भविष्य की पूर्वशर्त बन चुकी है।