पाकिस्तान में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री में उछाल, युवा सबसे ज़्यादा निशाने पर: वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2026
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री हाल के वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है — वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2026 के हवाले से पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल लेनदेन ने ड्रग्स तक पहुँच को पहले से कहीं अधिक आसान बना दिया है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि देश के युवा न केवल नशीले पदार्थों के सेवन में लिप्त हो रहे हैं, बल्कि उन्हें आसान पैसे और शानदार जीवनशैली का लालच देकर ड्रग कूरियर बनने के लिए भी बहकाया जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ड्रग तस्करी का गठजोड़
वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2026 के अनुसार, ड्रग तस्कर नई किस्म की ड्रग्स को नए बाज़ारों में तेज़ी से फैलाने के लिए टेक्नोलॉजी और वैश्विक अस्थिरता का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। पाकिस्तानी अखबार 'द न्यूज इंटरनेशनल' के एक संपादकीय में इस प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए कहा गया, 'क्या यह महज इत्तेफाक है कि सबसे ज़्यादा ऑनलाइन रहने वाली पीढ़ी में ड्रग्स के दुरुपयोग के मामले तब बढ़ रहे हैं, जब ड्रग्स का कारोबार तेज़ी से ऑनलाइन हो रहा है? ऐसा लगता नहीं।' अखबार ने यह भी कहा कि यह समस्या सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं — अधिक विकसित देशों में भी एक दशक से ज़्यादा समय से नशीले पदार्थों की ऑनलाइन बिक्री एक गंभीर चुनौती रही है।
बाज़ार में नई और पहले से अधिक असरदार किस्म की ड्रग्स आ चुकी हैं। एंटी-नारकोटिक्स फोर्स (ANF) के अनुसार, सिंथेटिक ड्रग्स ज़्यादा शक्तिशाली होती हैं और इन्हें छिपाना भी आसान होता है, जिससे इनकी तस्करी और वितरण पर नज़र रख पाना कठिन हो जाता है।
कराची से सामने आया अहम मामला
पाकिस्तान में इस बढ़ते संकट का एक प्रमुख उदाहरण कराची का है, जहाँ ड्रग डीलर अनमोल उर्फ पिंकी पर शहर के कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, स्कूलों, पार्टियों और पॉश इलाकों में कोकीन बेचने का आरोप है। इस मामले ने यह उजागर किया कि ड्रग नेटवर्क शिक्षण संस्थानों को भी निशाना बना रहे हैं।
2024 में ANF ने कथित तौर पर 31 ड्रग तस्करों का पता लगाया और 235 विश्वविद्यालयों से 140 किलोग्राम नशीले पदार्थ ज़ब्त किए। हाल ही में सिंध के एक वरिष्ठ मंत्री ने घोषणा की कि बच्चों में नशे के बढ़ते प्रचलन से निपटने के लिए राज्य सरकार स्कूलों में त्वरित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग शुरू करेगी।
युवाओं पर संकट की गहराई: आँकड़े क्या कहते हैं
कराची विश्वविद्यालय में 2024 में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, विश्वविद्यालय और कॉलेज के 44 प्रतिशत छात्रों ने ड्रग्स के सेवन की बात स्वीकार की — इनमें 53 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाएँ शामिल थीं। पुनर्वास मामलों की 2025 की एक व्यवस्थित समीक्षा के अनुसार, युवाओं में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग में हेरोइन की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत और कैनबिस (गाँजा) की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है।
इसी समीक्षा में पाया गया कि 35 प्रतिशत लोगों ने किशोरावस्था में ही नशा शुरू किया, जबकि 46 प्रतिशत में अवसाद (डिप्रेशन) की समस्या पाई गई। 15 साल तक चले एक क्लिनिकल रिव्यू में यह भी सामने आया कि परीक्षण किए गए नमूनों में से 20 से 30 प्रतिशत से अधिक में कैनबिस की पुष्टि हुई।
आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य का गहराता संकट
रिपोर्टों के अनुसार, 30 साल से कम उम्र के पाकिस्तानियों में आत्महत्या मृत्यु का चौथा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। 15 से 18 साल के किशोर विशेष रूप से जोखिम में हैं। हालाँकि, आत्महत्या से जुड़े सामाजिक कलंक और कानूनी पेचीदगियों के कारण इसके विश्वसनीय आधिकारिक आँकड़े उपलब्ध नहीं हो पाते।
ANF ने चेतावनी दी है कि 18 से 31 साल की उम्र के लाखों युवा संभावित जोखिम का सामना कर रहे हैं। आर्थिक तंगी, अफगानिस्तान से आने वाले कैनबिस और हेरोइन की सुलभ उपलब्धता, और अनुपचारित मानसिक बीमारी मिलकर इस संकट को और गहरा बना रहे हैं।
समस्या की व्यापकता और आगे की राह
संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स एवं अपराध कार्यालय (UNODC) के आँकड़ों के हवाले से बताया गया है कि पाकिस्तान में अनुमानित 67 से 76 लाख लोग — यानी कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत — नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। इनमें से करीब 40 लाख लोगों को व्यवस्थित इलाज की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ड्रग्स मँगाना खाना ऑर्डर करने जितना आसान हो गया, तो देश एक गंभीर और दीर्घकालिक संकट में फँस सकता है। प्रभावी डिजिटल निगरानी तंत्र और मज़बूत पुनर्वास ढाँचे के बिना इस चुनौती से पार पाना मुश्किल होगा।