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अफगान सीमा बंद होने से पाकिस्तान का दवा निर्यात 30% से ज़्यादा गिरा, ₹1,000 करोड़ का नुकसान

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अफगान सीमा बंद होने से पाकिस्तान का दवा निर्यात 30% से ज़्यादा गिरा, ₹1,000 करोड़ का नुकसान

सारांश

अफगानिस्तान से सीमा बंद होने के बाद पाकिस्तान का दवा उद्योग संकट में है। PBS के आँकड़े बताते हैं कि एक साल में निर्यात ₹13.84 करोड़ डॉलर सिकुड़ा और चालू वर्ष की पहली तिमाही में गिरावट जारी रही — यह उजागर करता है कि पाकिस्तान ने अपने सबसे बड़े दवा बाज़ार पर कितनी एकतरफा निर्भरता बनाए रखी थी।

मुख्य बातें

PBS के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात 30.26% गिरकर 31.90 करोड़ डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 45.74 करोड़ डॉलर था।
निर्यात मात्रा में भी 26.14% की गिरावट — 1,12,517 मीट्रिक टन से घटकर 83,104 मीट्रिक टन ।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में निर्यात 25.53% और गिरा, 7.33 करोड़ डॉलर पर आया।
वित्त वर्ष 2024-25 में अफगानिस्तान पाकिस्तान के दवा निर्यात का 34.1% था — 15.568 करोड़ डॉलर ।
PPMA के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने ठोस सरकारी कार्रवाई न होने पर नाराज़गी जताई।
सीमा कथित तौर पर अक्टूबर 2025 से बंद है; अफगानिस्तान वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर रहा है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के बंद रहने से पाकिस्तान के फार्मास्युटिकल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का दवा निर्यात 30.26 प्रतिशत घटकर 31.90 करोड़ डॉलर रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 45.74 करोड़ डॉलर था। उद्योग जगत ने इस पतन का प्रमुख कारण अक्टूबर 2025 से लागू सीमा बंदी को बताया है।

गिरावट के आँकड़े

PBS के आँकड़ों के अनुसार, निर्यात मूल्य में गिरावट के साथ-साथ मात्रा में भी भारी कमी आई। वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने 1,12,517 मीट्रिक टन फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात किया था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 83,104 मीट्रिक टन रह गया — यानी 29,413 मीट्रिक टन यानी 26.14 प्रतिशत की कमी।

गिरावट का यह सिलसिला चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी जारी रहा। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच पाकिस्तान का दवा निर्यात घटकर 7.33 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 9.84 करोड़ डॉलर था — 25.53 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट। गौरतलब है कि इन आँकड़ों में सर्जिकल उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात शामिल नहीं है।

अफगानिस्तान की बाज़ार में निर्णायक भूमिका

'बिजनेस रिपोर्टर' के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 15.568 करोड़ डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था — जो उस वर्ष के कुल 45.7456 करोड़ डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात का लगभग 34.1 प्रतिशत था। अफगानिस्तान दशकों से पाकिस्तान के दवा उद्योग का सबसे बड़ा एकल निर्यात बाज़ार रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल के दबाव में है। निर्यात आय का इतना बड़ा हिस्सा एक ही पड़ोसी देश पर निर्भर होना अब पाकिस्तान के नीति-निर्माताओं के लिए संरचनात्मक कमज़ोरी के रूप में सामने आया है।

उद्योग जगत और सरकार की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (PPMA) के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने पाकिस्तानी अखबार 'द न्यूज' से बातचीत में कहा कि 'अफगानिस्तान के साथ व्यापार निलंबित होने से पाकिस्तान के दवा उद्योग और राष्ट्रीय राजकोष को बड़ा नुकसान हुआ है।' उन्होंने यह भी कहा कि इसका सीधा असर अफगानिस्तान के मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब अपेक्षाकृत महंगी दवाओं की ओर रुख करना पड़ रहा है।

PPMA ने यह मुद्दा पाकिस्तान सरकार के समक्ष उठाया है। संघीय योजना मंत्री अहसान इकबाल ने संबंधित अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाने और दवा निर्यात बहाल करने के रास्ते तलाशने का आश्वासन दिया था। हालाँकि, तौकीर उल हक ने आगे की ठोस कार्रवाई न होने पर नाराज़गी जताई है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव की पृष्ठभूमि

दोनों देशों के बीच तनाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। ब्रिटिश शासन के दौरान निर्धारित डूरंड रेखा दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्रीय मुद्दा रही है। अगस्त 2021 में तालिबान के दोबारा सत्ता में आने के बाद रिश्ते और तनावपूर्ण हो गए।

पाकिस्तान कथित तौर पर यह आरोप लगाता रहा है कि अफगान धरती का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट-खुरासान (ISIS-K) जैसे समूहों द्वारा सीमा पार हमलों के लिए किया जा रहा है। अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सीमा पार हिंसा के बाद अक्टूबर 2025 से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा बंद है।

आम जनता और व्यापार पर असर

सीमा बंदी के व्यापक दुष्परिणाम सामने आए हैं — वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, चिकित्सा उपचार के लिए सीमा पार यात्रा में बाधा, और स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर। कारोबारियों को वैकल्पिक क्षेत्रीय व्यापार मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं।

काबुल से आई रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान अब दवाओं की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक साझेदारों की ओर रुख कर रहा है — जिससे पाकिस्तान के दवा उद्योग के लिए दीर्घकालिक बाज़ार पुनर्प्राप्ति और कठिन हो सकती है। यदि सीमा शीघ्र नहीं खुली, तो पाकिस्तान को अफगान बाज़ार में अपनी स्थायी पकड़ खोने का जोखिम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ राजनीतिक संबंध सदा अस्थिर रहे हों, किसी भी उद्योग के लिए गंभीर जोखिम है। यह पहली बार नहीं है जब पाक-अफगान तनाव ने व्यापार को बाधित किया; फिर भी पाकिस्तान ने निर्यात-विविधीकरण की कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई। तौकीर उल हक की नाराज़गी इस बात का प्रमाण है कि सरकारी आश्वासन और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अभी भी पाट नहीं पाई गई है। अफगानिस्तान अब वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में है — अगर यह बाज़ार हाथ से निकल गया, तो सीमा खुलने के बाद भी इसे वापस पाना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के दवा निर्यात में इतनी भारी गिरावट क्यों आई?
उद्योग जगत के अनुसार, अफगानिस्तान के साथ सीमा बंद होना इसका प्रमुख कारण है। अफगानिस्तान पाकिस्तान के कुल फार्मास्युटिकल निर्यात का लगभग 34.1% खरीदता था, और अक्टूबर 2025 से सीमा बंद होने के बाद यह व्यापार लगभग ठप हो गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का दवा निर्यात कितना रहा?
PBS के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पाकिस्तान का फार्मास्युटिकल निर्यात 31.90 करोड़ डॉलर रहा, जो 2024-25 के 45.74 करोड़ डॉलर की तुलना में 30.26% कम है। मात्रा के लिहाज़ से यह 1,12,517 मीट्रिक टन से घटकर 83,104 मीट्रिक टन रह गया।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा कब से बंद है और क्यों?
रिपोर्टों के अनुसार, सीमा पार हिंसा की घटनाओं के बाद अक्टूबर 2025 से पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा बंद है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP और ISIS-K जैसे समूह अफगान धरती का इस्तेमाल सीमा पार हमलों के लिए कर रहे हैं, जिसे अफगानिस्तान नकारता है।
पाकिस्तान सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कर रही है?
संघीय योजना मंत्री अहसान इकबाल ने अफगानिस्तान को दवा निर्यात बहाल करने के रास्ते तलाशने का आश्वासन दिया था। हालाँकि, PPMA के पूर्व अध्यक्ष तौकीर उल हक ने आगे कोई ठोस कार्रवाई न होने पर सार्वजनिक रूप से नाराज़गी ज़ाहिर की है।
इस सीमा बंदी का अफगानिस्तान के मरीजों पर क्या असर पड़ा है?
तौकीर उल हक के अनुसार, अफगानिस्तान के मरीजों को अब अपेक्षाकृत महंगी दवाओं की ओर रुख करना पड़ रहा है। अफगानिस्तान अपनी दवा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक साझेदारों की तलाश में है, जिससे उसकी पाकिस्तान पर दीर्घकालिक निर्भरता कम हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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