थारपारकर में ऑक्सीजन सिलेंडर विस्फोट: गर्भवती महिला समेत 9 की मौत, एम्बुलेंस में लगी आग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थारपारकर जिले में 29 अक्टूबर 2026 को एक दर्दनाक हादसे में ऑक्सीजन सिलेंडर विस्फोट से एक गर्भवती महिला समेत 9 लोगों की जान चली गई। यह विस्फोट नगरपारकर तालुका के दानो धंधल स्थित एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर खड़ी एम्बुलेंस में उस वक्त हुआ, जब कर्मचारी ऑक्सीजन सिलेंडर बदल रहे थे। बचाव अधिकारियों के अनुसार, घायलों में से एक व्यक्ति की कराची ले जाते समय रास्ते में ही मौत हो गई।
हादसे का घटनाक्रम
अंग्रेजी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्टों के अनुसार, नगरपारकर में 'पीपल्स प्राइमरी हेल्थकेयर इनिशिएटिव' (PPHI) द्वारा संचालित एम्बुलेंस में उस समय आग लग गई जब कर्मचारी उसका ऑक्सीजन सिलेंडर बदलने का काम कर रहे थे। नगरपारकर की असिस्टेंट कमिश्नर ने भी पुष्टि की कि विस्फोट के समय एम्बुलेंस स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही खड़ी थी।
अस्पताल प्रशासन और बचाव दल के अनुसार, जिस दौरान कर्मचारी सिलेंडर लगा रहे थे, उसी एम्बुलेंस के भीतर एक गर्भवती महिला मौजूद थी। विस्फोट के साथ ही एम्बुलेंस में आग भड़क उठी, जिसमें वह महिला और उसके साथ आए लोग भी झुलस गए।
मृतकों और घायलों का विवरण
पुलिस के अनुसार, मृतकों में PPHI का एक डिस्पेंसर, एम्बुलेंस ड्राइवर, एक चौकीदार और एक अन्य कर्मचारी शामिल हैं। बचाव अधिकारियों के मुताबिक, पीड़ितों में गर्भवती महिला और उसके साथ आए दो लोग भी थे।
घायलों में बेसिक हेल्थ सेंटर की दो दाइयाँ (मिडवाइफ) और एक महिला अटेंडेंट भी शामिल हैं। प्रारंभिक उपचार के बाद सभी घायलों को कराची रेफर कर दिया गया, जहाँ रास्ते में एक और व्यक्ति ने दम तोड़ दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
थारपारकर एसएसपी ने बताया कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायलों के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता और समय पर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने हादसे की जाँच के आदेश दिए हैं, हालाँकि अभी तक कोई विस्तृत जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
थारपारकर की स्वास्थ्य सेवाओं की पृष्ठभूमि
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब थारपारकर पहले से ही कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचे और सूखे की समस्याओं से जूझ रहा है। इस इलाके के निवासी इलाज के लिए बड़े पैमाने पर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर हैं, क्योंकि निजी चिकित्सा सेवाएँ यहाँ सीमित हैं।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2019 में इसी इलाके के मिथी स्थित सिविल अस्पताल ने एक शिशु का शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनके पास ईंधन के लिए पर्याप्त धन नहीं है। यह सातवीं वर्ष में भी उजागर हुई उसी खस्ताहाल व्यवस्था की कड़ी है जो थारपारकर के दूरदराज़ इलाकों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिंध के ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा उपकरणों के रख-रखाव और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी एक पुरानी समस्या बनी हुई है। यह हादसा उस व्यापक संकट की याद दिलाता है जिसमें बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल के अभाव में मरीज़ों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों की जान खतरे में रहती है।
फिलहाल घायलों का कराची के अस्पतालों में इलाज जारी है और प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह PPHI एम्बुलेंसों की सुरक्षा मानकों की समीक्षा का आदेश दे।