अमेरिकी गठबंधन सेना ने इराक मिशन समाप्त किया, एक दशक बाद पूर्ण वापसी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में जारी अशांति के बीच अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इराक में अपना सैन्य मिशन औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है। 30 सितंबर को उत्तरी कुर्दिस्तान क्षेत्र से गठबंधन की अंतिम टुकड़ियों की वापसी के साथ एक दशक से अधिक लंबा यह अभियान इतिहास बन गया। ईरान समेत क्षेत्र के कई हिस्से अभी भी अस्थिर हैं, ऐसे में यह वापसी भू राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
मिशन की पृष्ठभूमि
2014 में इस्लामिक स्टेट (IS) के उभार के बाद गठबंधन सेनाओं को इराक और सीरिया भेजा गया था। उस समय IS ने दोनों देशों के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था और क्षेत्र में भीषण हिंसा का दौर शुरू हो गया था। गठबंधन ने IS को 2017 में इराक में और 2019 में सीरिया में परास्त किया, परंतु संगठन के बचे खुचे तत्वों से निपटने के लिए सेनाएँ वहाँ तैनात रहीं।
गौरतलब है कि इस गठबंधन को जहाँ एक ओर चरमपंथी ताकतों के खिलाफ ढाल के रूप में देखा गया, वहीं आलोचकों का कहना है कि इसकी उपस्थिति ने क्षेत्रीय तनाव को भी बढ़ावा दिया।
वापसी की प्रक्रिया
बगदाद और वाशिंगटन ने 2024 में गठबंधन मिशन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई थी। इसके बाद गठबंधन सेनाएँ देशभर के अड्डों से क्रमशः हटती रहीं और अंततः उनकी मौजूदगी केवल स्वायत्त उत्तरी कुर्दिस्तान क्षेत्र तक सीमित रह गई। 30 सितंबर, बुधवार को वहाँ से भी अंतिम वापसी पूरी हुई।
इराक की प्रतिक्रिया और 'संप्रभुता दिवस'
इराकी प्रधानमंत्री अली अल जैदी ने घोषणा की कि गठबंधन के जाने के अगले दिन, यानी 1 अक्टूबर को 'संप्रभुता दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। सोमवार को इराक की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने संयुक्त बयान में कहा कि यह "एक राष्ट्रीय अवसर है जो संप्रभुता की ओर इराक के सफर के पूरा होने की पुष्टि करता है और राज्य व उसके संस्थानों की मौजूदगी को मजबूत करता है।"
इराकी सरकार का मानना है कि गठबंधन के हटने के बाद ताकतवर सशस्त्र गुटों के पास अपने हथियार बनाए रखने का बहाना समाप्त हो जाएगा।
सशस्त्र गुटों का रुख और आंतरिक चुनौती
इस साल सत्ता संभालने वाले प्रधानमंत्री जैदी की सरकार विभिन्न सशस्त्र गुटों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करती रही है। सरकार ने शुरू में हथियार छोड़ने की समय सीमा 30 सितंबर तय की थी, लेकिन हथियारों को 'विनियमित' करने पर बातचीत जारी रहने के कारण इसे वापस ले लिया गया।
कई ताकतवर गुटों ने हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया है। इसके बाद वरिष्ठ राजनेताओं ने हस्तक्षेप किया है और किसी समझौते की उम्मीद जताई जा रही है। गुटों ने अपनी शर्तों में विदेशी सैनिकों की वापसी के साथ साथ अमेरिकी राजनीतिक और आर्थिक दखलंदाजी को पूरी तरह समाप्त करने की माँग भी रखी है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में ईरान और उसके सहयोगी गुटों की सक्रियता बनी हुई है। गठबंधन की वापसी के बाद इराक में सुरक्षा का जिम्मा पूरी तरह इराकी सुरक्षा बलों पर आ जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सशस्त्र गुटों के साथ बातचीत का परिणाम और क्षेत्रीय शक्तियों का रुख इराक की स्थिरता की दिशा तय करेगा।