8 अक्टूबर 2026
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पेजेश्कियन-पुतिन फोन वार्ता: ईरान-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमति

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पेजेश्कियन-पुतिन फोन वार्ता: ईरान-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमति

सारांश

ईरान-रूस की धुरी और मज़बूत हो रही है। पेजेश्कियन-पुतिन फोन वार्ता में रणनीतिक साझेदारी गहरी करने पर सहमति बनी और रूस ने ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की पेशकश की — यह ऐसे वक्त में जब एमओयू की समयसीमा बीत चुकी है और पश्चिम एशिया में कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 8 अक्टूबर 2026 को फोन वार्ता में ईरान-रूस रणनीतिक सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमति जताई।
पुतिन ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने और पश्चिम एशिया में तनाव घटाने में रूस की भूमिका की पेशकश की।
28 फरवरी को इज़रायल-अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल-ड्रोन हमले किए और होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा किया।
8 अप्रैल को युद्धविराम और 18 जून को ईरान-अमेरिका के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
एमओयू की 60 दिन की समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर नहीं पहुँच सके।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार, 8 अक्टूबर 2026 को फोन पर हुई वार्ता में दोनों देशों के बीच रणनीतिक द्विपक्षीय सहयोग को जारी रखने और इसे और सुदृढ़ करने पर जोर दिया। ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर जारी आधिकारिक बयान के अनुसार यह बातचीत ऐसे नाजुक भू-राजनीतिक दौर में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

वार्ता के मुख्य बिंदु

ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार पेजेश्कियन ने इस बातचीत में कहा कि ईरान और रूस को विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग न केवल जारी रखना चाहिए, बल्कि इसे और विस्तार देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दिशा में आगे बढ़ना दोनों देशों के साझा हितों के अनुकूल है।

वहीं पुतिन ने कहा कि क्षेत्र में चल रहे घटनाक्रम के बावजूद रूस और ईरान के बीच व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौते के तहत साझेदारी अनवरत जारी है। उन्होंने मॉस्को और तेहरान के बीच घनिष्ठ संबंध बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

पश्चिम एशिया में तनाव और कूटनीतिक पहल

पुतिन ने वार्ता में ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने तथा पश्चिम एशिया में तनाव घटाने के लिए कुछ देशों की कोशिशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रूस ऐसी कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से तेहरान सहित ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने इज़रायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों एवं संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए तथा होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपनी पकड़ और कड़ी कर दी।

सीजफायर और एमओयू की पृष्ठभूमि

संघर्ष में शामिल पक्षों के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ। इसके बाद 18 जून को ईरान और अमेरिका ने क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

इस एमओयू के तहत दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर बातचीत पूरी कर एक अंतिम समझौते पर पहुँचना था। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, परंतु लगातार बढ़ते तनाव के बीच दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं कर सके।

रणनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब एमओयू की समयसीमा बीत जाने के बाद भी ईरान-अमेरिका वार्ता अनिश्चित बनी हुई है। रूस की मध्यस्थ भूमिका की पेशकश इस बात का संकेत है कि मॉस्को पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहता है। विश्लेषकों के अनुसार ईरान-रूस की बढ़ती नजदीकी पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका के लिए एक कूटनीतिक चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पश्चिमी प्रतिबंध उसे आर्थिक रूप से दबाए हुए हैं। विरोधाभास यह है कि जो देश यूक्रेन में युद्ध लड़ रहा है, वही शांति-दूत बनने का दावा कर रहा है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह अनदेखा करती है कि ईरान-रूस की बढ़ती नजदीकी वास्तव में अमेरिकी कूटनीति की विफलता का प्रतिबिंब है — जितना दबाव बढ़ा, उतना ही यह गठजोड़ मज़बूत हुआ।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेजेश्कियन और पुतिन की फोन वार्ता किस बारे में थी?
8 अक्टूबर 2026 को हुई इस फोन वार्ता में ईरान और रूस ने रणनीतिक द्विपक्षीय सहयोग को जारी रखने और उसे और मज़बूत करने पर सहमति जताई। पुतिन ने पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए रूस की मध्यस्थ भूमिका की पेशकश भी की।
ईरान और अमेरिका के बीच एमओयू की स्थिति क्या है?
18 जून 2026 को ईरान और अमेरिका ने पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुँचने की शर्त थी। यह समयसीमा 17 अगस्त को समाप्त हो गई, लेकिन दोनों पक्ष पर्याप्त प्रगति नहीं कर सके।
ईरान और इज़रायल-अमेरिका के बीच संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई थी?
28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों से प्रतिक्रिया दी और होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण और सख्त कर दिया। 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ।
रूस पश्चिम एशिया में मध्यस्थता क्यों करना चाहता है?
पुतिन ने कहा कि रूस ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशों का समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर अपनी भूमिका निभाने को तैयार है। विश्लेषकों के अनुसार यह रूस की कोशिश है कि वह पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक समीकरण में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखे।
ईरान-रूस रणनीतिक सहयोग समझौता क्या है?
यह दोनों देशों के बीच एक व्यापक रणनीतिक सहयोग का ढाँचा है जिसके तहत राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में साझेदारी निर्धारित है। पुतिन ने इस वार्ता में स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय उथल-पुथल के बावजूद इस समझौते के तहत सहयोग अनवरत जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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