मोदी-पेज़ेशकियन फोन वार्ता पर NDA नेताओं की प्रतिक्रिया: युद्ध नहीं, कूटनीति से ही निकलेगा हर संकट का हल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन वार्ता ने भारतीय राजनीतिक गलियारों में व्यापक प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। 1 जुलाई को सामने आई इस बातचीत को भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने एकस्वर में इस पहल का समर्थन किया है।
BJP प्रवक्ताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यह बातचीत दोनों देशों के पुराने और मज़बूत रिश्तों को और आगे बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा से स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता रहा है और किसी भी गुट में शामिल हुए बिना सभी देशों के साथ संतुलित संबंध रखता है।" उनके अनुसार यह संवाद दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देगा।
BJP के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी इस वार्ता का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और सुरक्षा के सतत पक्षधर रहे हैं। नकवी ने रेखांकित किया कि मोदी का स्पष्ट मत है कि किसी भी संकट का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और आपसी समझ से ही संभव है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में संवाद और कूटनीति की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनियाभर में जारी संघर्षों को समाप्त करने के लिए निरंतर कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इससे सभी पक्षों को नुकसान होता है।" आलोक ने यह भी जोड़ा कि समुद्री मार्गों में किसी भी प्रकार की बाधा न केवल विकासशील, बल्कि विकसित देशों की अर्थव्यवस्था के लिए भी हानिकारक है।
भारत-ईरान संबंध और वैश्विक व्यापार
अजय आलोक ने आगे कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से प्रगाढ़ संबंध रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में वहाँ की जनता की चिंताओं को भी वाणी दी। उन्होंने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनके शब्दों में, "प्रधानमंत्री वैश्विक स्तर पर इस युद्ध को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रयासरत हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी भी समस्या का समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही निकाला जा सकता है।"
JDU का समर्थन और पश्चिम एशिया का संदर्भ
जनता दल (यूनाइटेड) के एमएलसी नीरज कुमार ने भी इस वार्ता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव पूरी दुनिया के लिए आर्थिक चुनौतियाँ पैदा कर रहा है और ऐसे में भारत की कूटनीतिक भागीदारी बेहद अहम हो जाती है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक और राहत देने वाली पहल बताया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और समुद्री व्यापार मार्ग दबाव में हैं।
भारत की विदेश नीति का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत ने हमेशा 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति अपनाई है — न किसी गुट के साथ, न किसी के विरुद्ध। ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह परियोजना और ऊर्जा सहयोग भारत के दीर्घकालिक हितों से जुड़े हैं। NDA नेताओं की एकजुट प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि सरकार इस कूटनीतिक संवाद को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर एक सुसंगत संदेश के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है।