7 अगस्त 2026
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मोदी-नेतन्याहू टेलीफोन वार्ता: इजरायल की पहल पर पश्चिम एशिया और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा

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मोदी-नेतन्याहू टेलीफोन वार्ता: इजरायल की पहल पर पश्चिम एशिया और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा

सारांश

इजरायल की पहल पर हुई इस टेलीफोन वार्ता में मोदी और नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया के बदलते हालात और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने पर सहमति जताई — ऐसे समय में जब पूरा क्षेत्र तनाव के दौर से गुज़र रहा है।

मुख्य बातें

इजरायल के PM बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 7 अगस्त 2026 को PM नरेंद्र मोदी को फोन किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार की साप्ताहिक ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि की।
वार्ता में पश्चिम एशिया के ताज़ा घटनाक्रम और भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने रक्षा, कृषि, आतंकवाद-रोधी सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-इजरायल FTA पर जारी वार्ता को आर्थिक संबंधों के विस्तार का अहम मौका माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच 7 अगस्त 2026 को टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें पश्चिम एशिया के ताज़ा घटनाक्रम और भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि यह फोन कॉल इजरायल की ओर से किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया।

वार्ता का विवरण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हो रही निरंतर प्रगति की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

जायसवाल के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वे आगे भी आपस में संपर्क बनाए रखेंगे। वार्ता गुरुवार को हुई थी, जबकि इसकी आधिकारिक जानकारी शुक्रवार की ब्रीफिंग में दी गई।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर फोकस

दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर विशेष रूप से चर्चा की। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है और संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता देता है।

भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

पिछले तीन दशकों में भारत और इजरायल ने एक गहरे रणनीतिक विश्वास पर आधारित संबंध विकसित किए हैं। रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी प्रयास, खुफिया सूचना साझाकरण और कृषि नवाचार इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं।

हालाँकि, जहाँ राजनीतिक और सुरक्षा संबंध तेज़ी से परिपक्व हुए हैं, वहीं आर्थिक संबंध अभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँचे हैं। भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर जारी वार्ता इस अंतर को पाटने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

आगे की राह

दोनों नेताओं द्वारा निरंतर संपर्क बनाए रखने की पुष्टि यह संकेत देती है कि भारत-इजरायल संबंध आने वाले समय में और अधिक सक्रिय कूटनीतिक दौर में प्रवेश कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की संतुलित कूटनीतिक भूमिका और अधिक प्रासंगिक होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संभवतः पश्चिम एशिया में बढ़ते दबाव के बीच भारत की तटस्थ लेकिन प्रभावशाली स्थिति का लाभ उठाने के लिए। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति उसे इस संघर्षग्रस्त क्षेत्र में एक दुर्लभ संवाद-सेतु बनाती है, लेकिन यह भूमिका तब तक सीमित रहेगी जब तक FTA जैसे ठोस आर्थिक ढाँचे सिद्धांत से व्यवहार में नहीं आते। तीन दशकों की रणनीतिक निकटता के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार की धीमी रफ्तार यह सवाल उठाती है कि क्या यह साझेदारी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर पा रही है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी और नेतन्याहू के बीच टेलीफोन वार्ता किसकी पहल पर हुई?
यह फोन कॉल इजरायल की ओर से किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार की साप्ताहिक ब्रीफिंग में इसकी पुष्टि की।
मोदी-नेतन्याहू वार्ता में किन विषयों पर चर्चा हुई?
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मज़बूत करने के उपायों पर बातचीत की। साथ ही दोनों ने आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी में क्या-क्या शामिल है?
पिछले तीन दशकों में विकसित इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी प्रयास, खुफिया सूचना साझाकरण और कृषि नवाचार हैं। आर्थिक मोर्चे पर भारत-इजरायल FTA पर वार्ता जारी है।
पश्चिम एशिया को लेकर भारत का रुख क्या है?
भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है और संवाद व कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति उसे इस क्षेत्र में एक संतुलित कूटनीतिक भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है।
भारत-इजरायल FTA की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता जारी है। इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को उनकी वास्तविक क्षमता तक पहुँचाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों की तुलना में व्यापारिक संबंध अभी भी पीछे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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