मोदी-नेतन्याहू टेलीफोन वार्ता: इजरायल की पहल पर पश्चिम एशिया और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच 7 अगस्त 2026 को टेलीफोन पर बातचीत हुई, जिसमें पश्चिम एशिया के ताज़ा घटनाक्रम और भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि यह फोन कॉल इजरायल की ओर से किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया।
वार्ता का विवरण
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-इजरायल विशेष रणनीतिक साझेदारी में हो रही निरंतर प्रगति की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
जायसवाल के अनुसार, दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि वे आगे भी आपस में संपर्क बनाए रखेंगे। वार्ता गुरुवार को हुई थी, जबकि इसकी आधिकारिक जानकारी शुक्रवार की ब्रीफिंग में दी गई।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर फोकस
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर विशेष रूप से चर्चा की। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पूरे क्षेत्र में तनाव और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। गौरतलब है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है और संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता देता है।
भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
पिछले तीन दशकों में भारत और इजरायल ने एक गहरे रणनीतिक विश्वास पर आधारित संबंध विकसित किए हैं। रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी प्रयास, खुफिया सूचना साझाकरण और कृषि नवाचार इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बन चुके हैं।
हालाँकि, जहाँ राजनीतिक और सुरक्षा संबंध तेज़ी से परिपक्व हुए हैं, वहीं आर्थिक संबंध अभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुँचे हैं। भारत-इजरायल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर जारी वार्ता इस अंतर को पाटने का एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।
आगे की राह
दोनों नेताओं द्वारा निरंतर संपर्क बनाए रखने की पुष्टि यह संकेत देती है कि भारत-इजरायल संबंध आने वाले समय में और अधिक सक्रिय कूटनीतिक दौर में प्रवेश कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की संतुलित कूटनीतिक भूमिका और अधिक प्रासंगिक होती जा रही है।