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क्या पीएम मोदी चीन के तियानजिन पहुंचे हैं एससीओ समिट में शामिल होने के लिए?

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क्या पीएम मोदी चीन के तियानजिन पहुंचे हैं एससीओ समिट में शामिल होने के लिए?

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तियानजिन में पहुंचकर एससीओ समिट में भाग लेने की तैयारी की है। यह समिट वैश्विक नेताओं के साथ महत्वपूर्ण चर्चा का अवसर प्रदान करेगा। मोदी की चीन यात्रा से क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

मुख्य बातें

पीएम मोदी का तियानजिन आगमन एससीओ समिट के लिए महत्वपूर्ण है।
भारत एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है।
मोदी की द्विपक्षीय बैठकें क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देंगी।
एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी।
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने का प्रयास जारी है।

तियानजिन, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चीन के तियानजिन में कदम रखा, जहाँ वे रविवार से प्रारंभ हो रहे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट में भाग लेने वाले हैं।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने जापान का दौरा समाप्त किया और फिर बिनहाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया।

चीन पहुँचने के बाद, पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, "मैं तियानजिन में पहुँच चुका हूँ और एससीओ समिट के दौरान विभिन्न देशों के नेताओं के साथ गहन चर्चा का इंतज़ार कर रहा हूँ।"

समिट के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें आयोजित करेंगे, जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से रविवार और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सोमवार को मिलने की संभावना है।

हाल ही में, मोदी की दोनों नेताओं के साथ पिछली मुलाकात 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान हुई थी, जिसमें भारत और चीन के बीच सीमा पर पेट्रोलिंग को लेकर एक समझौता हुआ था, जिसने चार साल से चल रहे सीमा विवाद का समाधान किया।

भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है और 2022-23 के दौरान इसके अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल चुका है।

पीएम मोदी ने कहा, "भारत एससीओ का एक सक्रिय और रचनात्मक सदस्य है। हमारी अध्यक्षता के दौरान, हमने नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में नए विचार प्रस्तुत किए हैं। भारत एससीओ के सदस्य देशों के साथ साझा चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।"

उन्होंने यह भी कहा, "मुझे विश्वास है कि मेरी जापान और चीन यात्राएँ हमारे राष्ट्रीय हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देंगी।"

यह उल्लेखनीय है कि एससीओ एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में हुई थी। इसके सदस्य देशों में चीन, रूस, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।

एससीओ के दो पर्यवेक्षक अफगानिस्तान और मंगोलिया हैं, जबकि इसके 14 संवाद साझेदार देशों में तुर्की, कुवैत, अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया और नेपाल शामिल हैं। श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार और संयुक्त अरब अमीरात भी एससीओ के संवाद साझेदार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देने का भी एक मंच है। प्रधानमंत्री मोदी की बैठकें वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी का चीन दौरा कब शुरू हुआ?
प्रधानमंत्री मोदी का चीन दौरा 30 अगस्त को शुरू हुआ।
एससीओ समिट का आयोजन कहाँ हो रहा है?
एससीओ समिट का आयोजन तियानजिन, चीन में हो रहा है।
पीएम मोदी किसके साथ बैठक करेंगे?
पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक करेंगे।
भारत कब से एससीओ का सदस्य है?
भारत 2017 से एससीओ का सदस्य है।
एससीओ का उद्देश्य क्या है?
एससीओ का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और साझा चुनौतियों का समाधान करना है।
राष्ट्र प्रेस
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