10 अगस्त 2026
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मोदी-पाशिन्यान फोन वार्ता: भारत-आर्मेनिया साझेदारी को नई दिशा, ईरान निकासी पर जताया आभार

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मोदी-पाशिन्यान फोन वार्ता: भारत-आर्मेनिया साझेदारी को नई दिशा, ईरान निकासी पर जताया आभार

सारांश

PM मोदी और आर्मेनिया के PM पाशिन्यान की फोन वार्ता सिर्फ बधाई-संदेश नहीं थी — यह रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी में साझेदारी को नई दिशा देने का संकेत है। ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में आर्मेनिया का सहयोग इस रिश्ते की गहराई को दर्शाता है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी और आर्मेनिया के PM निकोल पाशिन्यान के बीच बुधवार को टेलीफोन वार्ता हुई।
मोदी ने पाशिन्यान को 7 जून के आर्मेनिया संसदीय चुनावों में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर बधाई दी।
ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग के लिए पाशिन्यान का आभार व्यक्त किया गया।
दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-संपर्क में साझेदारी मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रूस ने चुनाव से पहले आर्मेनियाई कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था; गैस दर 177.50 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक मीटर बनाम यूरोपीय बाज़ार की 600 डॉलर+ दर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-संपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। मोदी ने पाशिन्यान और उनकी पार्टी को 7 जून को हुए आर्मेनिया के संसदीय चुनावों में मिली जीत पर बधाई दी और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

क्या बोले प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस वार्ता का विवरण साझा करते हुए लिखा, 'बुधवार मुझे आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान का फोन आया, जिससे मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें और उनकी पार्टी को हाल ही में हुए आर्मेनिया के संसदीय चुनावों में मिली जीत पर बधाई दी। साथ ही, पश्चिम एशिया में हाल की परिस्थितियों के बाद ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए उनका धन्यवाद किया।' मोदी ने आगे कहा कि दोनों देशों ने 'व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी गर्मजोशी भरी और बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।'

आर्मेनिया चुनाव की पृष्ठभूमि

आर्मेनिया में 7 जून को हुए संसदीय चुनावों में पाशिन्यान की सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा। यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों ने पाशिन्यान को बधाई दी थी। यह ऐसे समय में आया जब रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में आर्मेनिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे थे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाशिन्यान को अप्रैल में आगाह किया था कि पश्चिमी देशों के साथ नज़दीकी संबंध आर्मेनिया को आर्थिक नुकसान पहुँचा सकते हैं।

रूस-आर्मेनिया आर्थिक तनाव

गौरतलब है कि रूस आर्मेनिया को 177.50 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक मीटर पर गैस आपूर्ति करता है, जबकि यूरोपीय बाज़ार में यह दर 600 डॉलर से अधिक है। चुनाव से पहले के दो हफ्तों में रूस ने आर्मेनियाई फूलों, मिनरल वॉटर, कॉन्यैक, ताज़ी सब्जियों और फलों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था — जिसे आलोचकों ने चुनावी दबाव की रणनीति बताया।

भारत-आर्मेनिया संबंधों का महत्व

यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब भारत अपनी 'बहु-संरेखण' विदेश नीति के तहत पश्चिम एशिया और काकेशस क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ा रहा है। आर्मेनिया के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग पर ज़ोर इस दिशा में एक सुविचारित कदम माना जा रहा है। मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत आर्मेनिया के साथ संबंधों को 'नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने' के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे की राह

दोनों देशों के बीच इस उच्चस्तरीय संवाद से आने वाले महीनों में व्यापार और रक्षा क्षेत्र में ठोस समझौतों की संभावना बढ़ी है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच भारत की आर्मेनिया के साथ बढ़ती नज़दीकी क्षेत्रीय कूटनीति के नए समीकरण बना सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारत इस अंतराल में अपनी जगह बना रहा है। रक्षा सहयोग पर ज़ोर यह संकेत देता है कि भारत आर्मेनिया को केवल एक कूटनीतिक संपर्क नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। हालाँकि, ईरान और रूस दोनों के साथ आर्मेनिया की जटिल निर्भरता को देखते हुए, इस साझेदारी की व्यावहारिक सीमाएँ स्पष्ट हैं। असली परीक्षा यह होगी कि व्यापार और रक्षा में 'प्रतिबद्धताएँ' ठोस समझौतों में कब तब्दील होती हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी और निकोल पाशिन्यान के बीच किस विषय पर बातचीत हुई?
दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और जन-संपर्क में भारत-आर्मेनिया साझेदारी को मज़बूत करने पर चर्चा की। मोदी ने पाशिन्यान को संसदीय चुनाव जीत की बधाई दी और ईरान से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग के लिए आभार जताया।
आर्मेनिया के संसदीय चुनाव कब हुए और किसने जीते?
आर्मेनिया में संसदीय चुनाव 7 जून को हुए, जिसमें PM निकोल पाशिन्यान की सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी ने जीत हासिल की। यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों ने इस जीत पर पाशिन्यान को बधाई दी थी।
ईरान से भारतीय नागरिकों की निकासी में आर्मेनिया की क्या भूमिका रही?
पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बाद ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में आर्मेनिया ने सहयोग किया। PM मोदी ने इसी सहयोग के लिए पाशिन्यान का विशेष आभार व्यक्त किया।
रूस और आर्मेनिया के बीच क्या तनाव है?
रूस आर्मेनिया को 177.50 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक मीटर पर गैस आपूर्ति करता है, जबकि यूरोपीय बाज़ार में यह दर 600 डॉलर से अधिक है। चुनाव से पहले रूस ने आर्मेनियाई कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगाया था, जिसे आर्मेनिया के पश्चिम-झुकाव के जवाब के रूप में देखा गया।
भारत-आर्मेनिया संबंध क्यों महत्वपूर्ण हैं?
भारत अपनी बहु-संरेखण विदेश नीति के तहत काकेशस क्षेत्र में कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ा रहा है। आर्मेनिया के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग भारत को इस भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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