PM मोदी ने अर्मेनिया के निकोल पाशिन्यान को संसदीय चुनाव जीत पर दी बधाई, सिविक कॉन्ट्रैक्ट को मिले 49.81% वोट
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 जून 2026 को अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान को उनकी पार्टी सिविक कॉन्ट्रैक्ट की संसदीय चुनाव में ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। 7 जून को हुए इन चुनावों में पाशिन्यान की पार्टी को 49.81 फीसदी वोट मिले, जो भारत-अर्मेनिया द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज़ से भी अहम माना जा रहा है।
मोदी का बधाई संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'संसदीय चुनाव में सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की शानदार जीत पर निकोल पाशिन्यान को बधाई। नया जनादेश अर्मेनिया के लोगों के आपके नेतृत्व और विजन पर पक्के भरोसे और विश्वास को दिखाता है। मैं भारत और अर्मेनिया के बीच दोस्ती और सहयोग के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का इंतजार कर रहा हूं।' यह संदेश भारत की उस कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है जिसमें लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेताओं के प्रति सहयोग की प्रतिबद्धता जताई जाती है।
चुनाव परिणाम: मुख्य आँकड़े
अर्मेनिया के चुनाव आयोग के अनुसार, शुरुआती नतीजों में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी 49.81 फीसदी वोटों के साथ सबसे आगे रही। रूसी-अर्मेनियाई अरबपति सैमवेल करापेत्यान के स्ट्रॉन्ग अर्मेनिया अलायंस को 23.29 फीसदी वोट मिले। पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट कोचरियन का अर्मेनिया अलायंस लगभग 9.94 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि प्रॉस्पेरस अर्मेनिया पार्टी ने 4 फीसदी वोटों के साथ चुनावी सीमा पार की। कुल मतदान 59.97 फीसदी दर्ज किया गया।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह जीत ऐसे समय में आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अर्मेनिया की विदेश नीति की दिशा पर गहरी नज़र रखी जा रही थी। गौरतलब है कि पिछले महीने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कथित तौर पर उन आर्थिक नुकसानों का ज़िक्र किया था जो अर्मेनिया को पश्चिमी देशों के साथ करीबी संबंध बनाने पर उठाने पड़ सकते हैं। पुतिन ने अप्रैल में पाशिन्यान को बताया था कि रूस अर्मेनिया को 177.50 डॉलर प्रति 1,000 क्यूबिक मीटर पर गैस देता है, जबकि यूरोपीय बाज़ार में यही कीमत 600 डॉलर से अधिक है।
चुनाव से ठीक पहले के दो हफ्तों में रूस ने अर्मेनियाई फूलों, मिनरल वॉटर, कॉन्यैक, ताज़ी सब्ज़ियों और फलों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे कई विश्लेषक दबाव की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
पाशिन्यान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
सोमवार सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाशिन्यान ने इस जीत को 'ऐतिहासिक जीत' करार दिया। यूरोपीय संघ और पश्चिमी देशों ने भी उन्हें बधाई दी। भारत का यह कदम उस व्यापक कूटनीतिक ढाँचे में फिट बैठता है जिसमें नई दिल्ली पूर्वी यूरोप और काकेशस क्षेत्र में अपने संबंधों को संतुलित रूप से आगे बढ़ा रही है।
आगे की राह
नए जनादेश के साथ पाशिन्यान सरकार के सामने रूस और पश्चिम के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बनी रहेगी। भारत-अर्मेनिया संबंधों में रक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में आगे की प्रगति पर नज़र रहेगी।