पीटीएम प्रमुख मंजूर पश्तीन का आरोप: पाकिस्तानी सेना पश्तूनों का खून बहा रही है, टोरंटो सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय अलगाव की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) के प्रमुख मंजूर पश्तीन ने 15 अक्टूबर 2026 को टोरंटो में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए पाकिस्तानी सेना पर पश्तून इलाकों में हत्याएँ, जबरन गुमशुदगी और संसाधनों की लूट जैसे गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विदेशों में बसे पश्तूनों से आह्वान किया कि वे इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग थलग करने की मुहिम में शामिल हों।
सम्मेलन में क्या कहा पश्तीन ने
पीटीएम कनाडा द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का नाम 'पाकिस्तान के अत्याचारों का पर्दाफाश' (अनमास्किंग पाकिस्तान्स एट्रोसिटीज) था, जिसमें सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। पश्तीन ने कहा, "यह देश पश्तूनों और अफगानों का खून पानी की तरह बहा रहा है। इसने हमारे संसाधनों को लूटा है और हमारी मातृभूमि को बर्बाद कर दिया है।"
पीटीएम नेताओं अली वजीर और हाजी समद की कैद का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सेना की कथित "निजी जेलों" में अभी भी कई पश्तून बंद हैं। उन्होंने पाकिस्तान के लोकतंत्र को 'दिखावा' करार दिया और कहा, "इसकी संसद को ही देख लीजिए: सेना जिसे चाहे अंदर लाती है और जिसे चाहे बाहर निकाल देती है। ऐसी व्यवस्था में उम्मीदें पालना समय की बर्बादी है।"
आतंकवाद के तर्क पर सवाल
पश्तीन ने यह भी पूछा कि यदि आतंकवाद वास्तविक समस्या है, तो वह केवल पख्तूनख्वा तक सीमित क्यों है, पंजाब में क्यों नहीं। उन्होंने पश्तूनों, बलोचों, सिंधियों और कश्मीरियों को "साझा दुश्मन" के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। आलोचकों का कहना है कि यह बयान पाकिस्तान के भीतर और बाहर दोनों जगह व्यापक असंतोष को दर्शाता है।
घोषणापत्र की प्रमुख माँगें
सम्मेलन में एक घोषणापत्र अपनाया गया, जिसमें निम्नलिखित माँगें शामिल थीं:
संयुक्त राष्ट्र (UN) की देखरेख में स्वतंत्र 'सत्य और समाधान आयोग' (ट्रुथ एंड रिकॉन्सिलिएशन कमीशन) का गठन; गुमशुदा लोगों की तलाश; अवैध हिरासत में बंद व्यक्तियों की रिहाई; पीटीएम पर लगाए गए प्रतिबंध की वापसी; तथा जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों का नियंत्रण। गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान सरकार ने तथाकथित 'आतंकवाद रोधी कानून' (एंटी टेररिज्म एक्ट) के तहत पीटीएम पर प्रतिबंध लगा दिया था।
अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं की प्रतिक्रिया
अफगानिस्तान में कनाडा के पूर्व राजदूत क्रिस अलेक्जेंडर ने सभा को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वह प्रॉक्सी और आतंकवाद के जरिए अफगानिस्तान पर वर्चस्व बनाए रखना चाहता है। उन्होंने कहा, "हिंसा खत्म करें। यही हर समस्या का समाधान है।"
अफगानिस्तान की संसद की पूर्व सदस्य और कनाडा में पूर्व राजदूत शिनकाई कारोखैल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान एक ओर आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो दूसरी ओर खुद को उसका शिकार बताता है। उन्होंने कहा कि अफगान पाकिस्तान के कथित अत्याचारों के दस्तावेजी सबूत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करेंगे।
पीटीएम की पृष्ठभूमि
पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट की स्थापना 2014 में हुई थी। यह संगठन पाकिस्तान में न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग्स) और जबरन गुमशुदगी के विरुद्ध अभियान चलाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। टोरंटो सम्मेलन इस दिशा में पश्तून प्रवासी समुदाय के बढ़ते वैश्विक संगठन का संकेत है।