पुतिन का बयान: PM मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए हानिकारक
सारांश
मुख्य बातें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 5 जून 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग के कॉन्स्टेंटाइन पैलेस में अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसी भी दिशा से दबाव बनाना 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक' है। यह बैठक सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के दौरान आयोजित हुई, जो 3 जून से 6 जून तक चली।
पुतिन का स्पष्ट संदेश
क्रेमलिन के अनुसार, एक पत्रकार के सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा, 'मुझे आपका सवाल थोड़ा अजीब लगा। आपने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की वजह से रूस और भारत के रिश्तों में दिक्कतें पैदा हो रही हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस इस बात से प्रसन्न है कि भारत सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है।
पुतिन ने भारत को 'एक महान देश' बताते हुए कहा कि उसकी 1.5 अरब की आबादी, बड़ी अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक पहचान उसे वैश्विक मंच पर स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार देती है।
अमेरिकी दबाव पर सीधी टिप्पणी
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, 'कुछ मामलों में अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता है — उदाहरण के लिए, रूस के साथ कुछ क्षेत्रों में सहयोग को लेकर। लेकिन अब सभी यह समझ चुके हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक है, चाहे यह दबाव कहीं से भी आए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना जारी है।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन ने भारत की एक महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा की थी। दो दिनों तक चली इस यात्रा में नई दिल्ली में शिखर स्तर की वार्ताएं, औपचारिक कार्यक्रम और कई द्विपक्षीय बैठकें हुई थीं। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी, ऊर्जा संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे।
उस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस साझेदारी की समीक्षा की, जिसे 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिले 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
SPIEF बैठक का महत्व
यह वार्षिक बैठक वैश्विक मीडिया संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों के साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, आर्थिक मुद्दों और रूस की विदेश नीति पर सीधे संवाद का अवसर देती है। पुतिन की यह टिप्पणी उस मंच पर आई जहाँ वैश्विक मीडिया की नज़रें टिकी होती हैं, जो इसे एक सुविचारित कूटनीतिक संदेश के रूप में रेखांकित करती है।
आगे की दिशा
भारत की 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति — जिसके तहत वह रूस, अमेरिका और अन्य शक्तियों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखता है — को पुतिन के इस बयान से कूटनीतिक समर्थन मिलता दिखता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान रूस की ओर से भारत को पश्चिमी दबाव के विरुद्ध एक संकेत है कि मॉस्को नई दिल्ली की स्वायत्त विदेश नीति का सम्मान करता है।