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पुतिन का बयान: PM मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए हानिकारक

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पुतिन का बयान: PM मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए हानिकारक

सारांश

पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग से स्पष्ट संदेश दिया — PM मोदी पर दबाव, चाहे कहीं से भी आए, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए हानिकारक है। यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को रूस का खुला समर्थन है और पश्चिमी दबाव की रणनीति पर सीधी चुनौती।

मुख्य बातें

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 5 जून 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में कहा कि PM मोदी पर दबाव 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदायक' है।
पुतिन ने भारत को 1.5 अरब आबादी वाला 'महान देश' बताते हुए उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थन किया।
उन्होंने स्वीकार किया कि अमेरिका रूस के साथ कुछ क्षेत्रों में सहयोग को लेकर भारत पर दबाव बनाता है।
यह बयान सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ वार्षिक बैठक में आया।
दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की 25 वर्षीय रणनीतिक साझेदारी और मज़बूत हुई है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 5 जून 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग के कॉन्स्टेंटाइन पैलेस में अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किसी भी दिशा से दबाव बनाना 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक' है। यह बैठक सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के दौरान आयोजित हुई, जो 3 जून से 6 जून तक चली।

पुतिन का स्पष्ट संदेश

क्रेमलिन के अनुसार, एक पत्रकार के सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा, 'मुझे आपका सवाल थोड़ा अजीब लगा। आपने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की वजह से रूस और भारत के रिश्तों में दिक्कतें पैदा हो रही हैं। मुझे नहीं लगता कि ऐसा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस इस बात से प्रसन्न है कि भारत सभी देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है।

पुतिन ने भारत को 'एक महान देश' बताते हुए कहा कि उसकी 1.5 अरब की आबादी, बड़ी अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक पहचान उसे वैश्विक मंच पर स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार देती है।

अमेरिकी दबाव पर सीधी टिप्पणी

रूसी राष्ट्रपति ने कहा, 'कुछ मामलों में अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की कोशिश करता है — उदाहरण के लिए, रूस के साथ कुछ क्षेत्रों में सहयोग को लेकर। लेकिन अब सभी यह समझ चुके हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक है, चाहे यह दबाव कहीं से भी आए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-रूस ऊर्जा व्यापार को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना जारी है।

भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन ने भारत की एक महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा की थी। दो दिनों तक चली इस यात्रा में नई दिल्ली में शिखर स्तर की वार्ताएं, औपचारिक कार्यक्रम और कई द्विपक्षीय बैठकें हुई थीं। इन चर्चाओं में रक्षा सहयोग, आर्थिक साझेदारी, ऊर्जा संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे।

उस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस साझेदारी की समीक्षा की, जिसे 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिले 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

SPIEF बैठक का महत्व

यह वार्षिक बैठक वैश्विक मीडिया संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों और पत्रकारों के साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, आर्थिक मुद्दों और रूस की विदेश नीति पर सीधे संवाद का अवसर देती है। पुतिन की यह टिप्पणी उस मंच पर आई जहाँ वैश्विक मीडिया की नज़रें टिकी होती हैं, जो इसे एक सुविचारित कूटनीतिक संदेश के रूप में रेखांकित करती है।

आगे की दिशा

भारत की 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति — जिसके तहत वह रूस, अमेरिका और अन्य शक्तियों के साथ समानांतर संबंध बनाए रखता है — को पुतिन के इस बयान से कूटनीतिक समर्थन मिलता दिखता है। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान रूस की ओर से भारत को पश्चिमी दबाव के विरुद्ध एक संकेत है कि मॉस्को नई दिल्ली की स्वायत्त विदेश नीति का सम्मान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह संबंध मॉस्को के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि पुतिन का 'दबाव हानिकारक है' वाला बयान भारत की स्वायत्तता की प्रशंसा कम और रूस के अपने भू-राजनीतिक हितों की रक्षा अधिक है। भारत के लिए असली परीक्षा यह है कि वह इस कूटनीतिक समर्थन को अपनी शर्तों पर भुनाए, न कि किसी एक खेमे का मोहरा बने।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुतिन ने PM मोदी पर दबाव को लेकर क्या कहा?
पुतिन ने 5 जून 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में कहा कि PM मोदी पर दबाव डालना 'अंतरराष्ट्रीय संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों के लिए नुकसानदायक' है, चाहे यह दबाव कहीं से भी आए। उन्होंने विशेष रूप से रूस-भारत सहयोग को लेकर अमेरिकी दबाव का उल्लेख किया।
पुतिन का यह बयान कहाँ और किस संदर्भ में आया?
यह बयान सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF 2026) के दौरान कॉन्स्टेंटाइन पैलेस में अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रतिनिधियों के साथ वार्षिक बैठक में आया। यह फोरम 3 से 6 जून तक आयोजित हुआ।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत-रूस 'विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। दिसंबर 2025 में पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग पर व्यापक चर्चा की थी।
अमेरिका किस मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाता है?
पुतिन के अनुसार, अमेरिका रूस के साथ कुछ क्षेत्रों में भारत के सहयोग को लेकर दबाव बनाने की कोशिश करता है। यह मुख्यतः ऊर्जा व्यापार और रक्षा खरीद से जुड़ा है, जिस पर पश्चिमी देशों ने आपत्ति जताई है।
भारत की 'बहु-संरेखण' नीति क्या है और पुतिन के बयान से इसे कैसे बल मिलता है?
भारत की बहु-संरेखण नीति के तहत वह एक साथ अमेरिका, रूस, यूरोप और अन्य शक्तियों के साथ स्वतंत्र संबंध बनाए रखता है। पुतिन के बयान ने इस नीति को रूस का खुला समर्थन दिया है, जो भारत की कूटनीतिक स्वायत्तता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देता है।
राष्ट्र प्रेस
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