क्या कतर गाजा समझौते के दूसरे चरण को सफलतापूर्वक लागू कर पाएगा?
सारांश
Key Takeaways
- कतर ने गाजा में युद्धविराम के दूसरे चरण को लागू करने के लिए प्रयास तेज किए हैं।
- मध्यस्थ देशों के साथ बातचीत जारी है।
- गाजा के लोगों की मानवीय सहायता एक जिम्मेदारी है।
- संघर्ष में राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
- कतर वैश्विक संकटों में संवाद और कूटनीति को बढ़ावा दे रहा है।
दोहा, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कतर ने गाजा पट्टी में युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण को लागू करने के लिए अपने प्रयासों को और तेज कर दिया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता और प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. माजिद बिन मोहम्मद अल अंसारी ने स्पष्ट किया है कि कतर मध्यस्थ देशों के साथ मिलकर लगातार बातचीत कर रहा है ताकि समझौते का अगला चरण जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।
6 जनवरी को दोहा में आयोजित विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में, डॉ. अल अंसारी ने बताया कि इस प्रक्रिया में कतर के साथ मिस्र, तुर्किये और अमेरिका जैसे महत्वपूर्ण मध्यस्थ देश शामिल हैं। इन देशों के सहयोग से गाजा में युद्धविराम को आगे बढ़ाने, रफाह सीमा चौकी को फिर से खोलने और वहां फंसे लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।
डॉ. अंसारी ने कहा कि समझौते के दूसरे चरण तक पहुंचने के लिए बातचीत अभी जारी है। कुछ मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अब भी कुछ महत्वपूर्ण बाधाएं हैं, जिन पर चर्चा चल रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि निरंतर प्रयासों से इन अड़चनों को दूर किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी दोहराया कि कतर शुरू से ही इस बात पर जोर देता आया है कि किसी भी संघर्ष में मानवीय सहायता को राजनीतिक दबाव या ब्लैकमेल के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि गाजा के लोगों तक मदद पहुंचाना एक मानवीय जिम्मेदारी है और इसे किसी भी शर्त से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
इसके अलावा, डॉ. अल अंसारी ने वेनेजुएला में हालिया घटनाक्रम पर भी कतर का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कतर वहां संयम बरतने, तनाव कम करने और संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने के पक्ष में है। कतर ऐसे हर प्रयास का समर्थन करता है, जो वेनेजुएला के संकट का शांतिपूर्ण हल निकालने की दिशा में उठाया जाए।
कतर एक बार फिर खुद को एक सक्रिय मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जो न केवल गाजा में शांति और राहत के लिए काम कर रहा है, बल्कि वैश्विक संकटों में संवाद और कूटनीति के रास्ते को भी आगे बढ़ा रहा है।