किरेन रिजिजू ने बेलग्रेड में यूगोस्लाविया म्यूज़ियम का दौरा किया, NAM की 65वीं वर्षगांठ बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 31 अगस्त 2026 को सर्बिया के बेलग्रेड पहुँचे, जहाँ उन्होंने यूगोस्लाविया संग्रहालय और यूगोस्लाविया के पूर्व राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टीटो की समाधि स्थल हाउस ऑफ फ्लावर्स का दौरा किया। वे गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के पहले शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित उच्चस्तरीय स्मृति बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
ऐतिहासिक स्थलों का दौरा
रिजिजू ने एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'सर्बिया के बेलग्रेड में यूगोस्लाविया के म्यूज़ियम और हाउस ऑफ फ्लावर्स का दौरा किया। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है, जो यूगोस्लाविया के राजनीतिक इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और जोसिप ब्रोज़ टीटो के जीवन और विरासत की गहरी झलक देता है।' केंद्रीय मंत्री ने इस यात्रा को एक सार्थक अनुभव बताया और कहा कि इससे उन्हें उस इतिहास को समझने का मौका मिला, जिसने इस पूरे क्षेत्र को आकार देने में अहम भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि बेलग्रेड वही शहर है जहाँ 1961 में पहला NAM शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस ऐतिहासिक संदर्भ में रिजिजू की टीटो से जुड़े स्थलों की यात्रा विशेष कूटनीतिक महत्व रखती है।
महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि
NAM बैठक से पूर्व रविवार को रिजिजू ने बेलग्रेड में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने सर्बिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी भेंट की और भारत-सर्बिया संबंधों को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान की सराहना की। एक्स पर उन्होंने लिखा, 'एनएएम बैठक से पहले बेलग्रेड में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की और भारत-सर्बिया संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान की सराहना की।'
NAM की 65वीं वर्षगांठ बैठक का महत्व
यह उच्चस्तरीय स्मृति बैठक 31 अगस्त से 1 सितंबर तक 'गुटनिरपेक्ष आंदोलन: आज की दुनिया के लिए सबक' थीम के तहत आयोजित की जा रही है। यह बैठक इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि 1961 में बेलग्रेड में आयोजित पहले NAM सम्मेलन के 65 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को लेकर वैश्विक बहस तेज़ हो रही है और विकासशील देश अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक पहचान को पुनः परिभाषित कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, गुटनिरपेक्ष आंदोलन में 121 विकासशील देश शामिल हैं। भारत इस आंदोलन के संस्थापक सदस्य देशों में रहा है और समय-समय पर इसके सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता रहा है।
भारत-NAM संबंध: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत शीत युद्ध के दौर से ही गुटनिरपेक्षता का प्रबल समर्थक रहा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू NAM के प्रमुख संस्थापकों में से एक थे। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत आज भी NAM के मूल्यों — संप्रभुता, समानता और गुटनिरपेक्षता — के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रिजिजू की इस यात्रा से भारत और सर्बिया के द्विपक्षीय संबंधों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। आगे की बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल NAM के समकालीन प्रासंगिकता पर अपना पक्ष रखेगा।