27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

संस्कृति और आधुनिकता साथ चल सकते हैं : RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले का वाशिंगटन में बड़ा बयान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
संस्कृति और आधुनिकता साथ चल सकते हैं : RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले का वाशिंगटन में बड़ा बयान

सारांश

RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने वाशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में कहा कि हिंदू पहचान सभ्यतागत है, धार्मिक नहीं। संस्कृति और आधुनिकता साथ चल सकते हैं। बरगद के पेड़ के रूपक से उन्होंने RSS की विचारधारा और भारत-अमेरिका साझेदारी की दिशा स्पष्ट की।

मुख्य बातें

RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने 24 अप्रैल 2025 को वाशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में भाग लिया।
होसबोले ने कहा कि हिंदू पहचान एक सभ्यतागत अवधारणा है, धार्मिक नहीं, और इसमें किसी के अलग-थलग पड़ने की गुंजाइश नहीं।
RSS पिछले 100 वर्षों से निस्वार्थ स्वयंसेवकों का नेटवर्क बना रहा है और लगभग 40 सामाजिक संस्थाएं संचालित करता है।
होसबोले ने बरगद के पेड़ के रूपक से समझाया कि संस्कृति और आधुनिकता एक साथ फल-फूल सकते हैं।
भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने के लिए उन्होंने थिंक टैंकों और विश्वविद्यालयों की सेतु-भूमिका पर जोर दिया।
RSS की पाँच प्राथमिकताएं — सामाजिक समरसता, पर्यावरण, पारिवारिक मूल्य, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य-बोध — को सार्वभौमिक बताया।

वाशिंगटन, 24 अप्रैल 2025राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में आयोजित 'न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस' में स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक मूल्य और आधुनिकता परस्पर विरोधी नहीं हैं — दोनों एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैसे-जैसे भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों से अपने संबंध प्रगाढ़ कर रहा है, RSS की सभ्यतागत सोच इस साझेदारी को और मज़बूत आधार दे सकती है।

आरएसएस की असली पहचान क्या है?

हडसन इंस्टीट्यूट में एक अनौपचारिक 'फायरसाइड चैट' के दौरान होसबोले ने RSS को एक स्वैच्छिक जन-आंदोलन बताया, जिसकी नींव भारत की सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत मूल्यों पर टिकी है। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में संगठन का मुख्य उद्देश्य ऐसे निस्वार्थ स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करना रहा है जो समाज-सेवा और राष्ट्र-निर्माण के लिए समर्पित हों।

उन्होंने कहा, "आरएसएस लोगों का एक स्वैच्छिक आंदोलन है और यह सांस्कृतिक लोकाचार तथा सभ्यतागत मूल्यों से प्रेरित है। संगठन आत्मविश्वास, सेवा-भाव और एकता की भावना जगाने के लिए रोज़ाना और हर हफ्ते हज़ारों बैठकें आयोजित करता है।"

शिक्षा से आपदा राहत तक — RSS का विस्तृत कार्यक्षेत्र

होसबोले ने बताया कि RSS ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और आपदा राहत जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके अनुसार स्वयंसेवक मिलकर लगभग 40 प्रकार की सामाजिक संस्थाएं संचालित करते हैं, जो राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

पश्चिमी देशों में संगठन को लेकर बनी नकारात्मक धारणाओं पर उन्होंने कहा कि RSS को "अल्पसंख्यक विरोधी, विकास विरोधी और आधुनिकता विरोधी" बताने वाली छवि वर्षों की गलतफहमी का परिणाम है। उन्होंने विभिन्न समूहों के साथ संवाद को इन भ्रांतियों को दूर करने का सबसे कारगर तरीका बताया।

हिंदू पहचान — सभ्यतागत अवधारणा, धार्मिक नहीं

होसबोले ने विचारधारा पर स्पष्ट रुख रखते हुए कहा, "हिंदू पहचान एक सभ्यतागत पहचान है, धार्मिक नहीं। इसमें किसी के भी अलग-थलग पड़ने की कोई गुंजाइश नहीं है।" यह बयान उस समय महत्त्वपूर्ण है जब पश्चिमी मीडिया और थिंक टैंक अक्सर RSS को एकांगी धार्मिक संगठन के रूप में चित्रित करते हैं।

परंपरा और आधुनिकता के सह-अस्तित्व को समझाने के लिए उन्होंने बरगद के पेड़ का रूपक इस्तेमाल किया — जिसकी जड़ें गहरी होती हैं, फिर भी हर मौसम में नई पत्तियां और फूल खिलते हैं। उनके अनुसार, ठीक इसी तरह भारतीय संस्कृति अपनी जड़ों से जुड़ी रहते हुए आधुनिकता को आत्मसात कर सकती है।

भारत-अमेरिका संबंध और RSS की भूमिका

भारत की वैश्विक भूमिका पर होसबोले ने कहा कि भारत सभी देशों, विशेषकर अमेरिका के साथ परस्पर विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे की जरूरतों की समझ पर आधारित संबंध चाहता है। उन्होंने संस्थाओं, थिंक टैंकों और विश्वविद्यालयों को दोनों देशों के बीच की दूरी पाटने में सेतु की भूमिका निभाने वाला बताया।

गौरतलब है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। 1925 में स्थापित RSS को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में गिना जाता है और भारत के सामाजिक-राजनीतिक जीवन पर इसका दीर्घकालीन प्रभाव रहा है।

RSS की पाँच प्राथमिकताएं और स्वयंसेवा का संकल्प

देश के भीतर RSS की प्राथमिकताओं पर होसबोले ने पाँच मुख्य बिंदु गिनाए — सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, पारिवारिक मूल्य, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य-बोध। उन्होंने इन्हें सार्वभौमिक सिद्धांत बताया जो एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र की नींव रखते हैं।

स्वयंसेवा को जीवन भर की प्रतिबद्धता बताते हुए उन्होंने कहा, "यह जीवन जीने का एक तरीका है — 24 घंटे, सातों दिन और 365 दिन। एक बार स्वयंसेवक, हमेशा स्वयंसेवक।"

आने वाले समय में RSS की यह वैश्विक संवाद-यात्रा और तेज़ होने की संभावना है, खासकर जब भारत G20 और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति और बढ़ा रहा है। हडसन इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित थिंक टैंक के मंच पर RSS महासचिव की यह भागीदारी संगठन की अंतरराष्ट्रीय पहुँच और स्वीकार्यता का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि RSS की एक सुनियोजित 'सॉफ्ट पावर' रणनीति का हिस्सा है — जब भारत इंडो-पैसिफिक में अमेरिका का सबसे करीबी साझेदार बन रहा है, तब RSS खुद को उस कूटनीतिक कथा का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जो संगठन दशकों तक पश्चिमी मीडिया में 'बंद और संदिग्ध' बताया जाता रहा, वही अब हडसन इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित अमेरिकी थिंक टैंक में खुलकर संवाद कर रहा है। यह बदलाव रणनीतिक है और इसे नज़रअंदाज़ करना भारत की विदेश नीति की बड़ी तस्वीर को अधूरा समझना होगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दत्तात्रेय होसबोले ने वाशिंगटन में क्या कहा?
RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने हडसन इंस्टीट्यूट में कहा कि संस्कृति और आधुनिकता साथ-साथ चल सकते हैं और हिंदू पहचान एक सभ्यतागत अवधारणा है, धार्मिक नहीं। उन्होंने RSS को एक स्वैच्छिक जन-आंदोलन बताया जो 100 वर्षों से निस्वार्थ स्वयंसेवकों को तैयार कर रहा है।
RSS को लेकर पश्चिमी देशों में क्या गलतफहमियां हैं?
होसबोले के अनुसार RSS को 'अल्पसंख्यक विरोधी, विकास विरोधी और आधुनिकता विरोधी' बताने वाली छवि वर्षों की गलतफहमी का नतीजा है। उन्होंने कहा कि संवाद और आपसी समझ से इन भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस क्या है और यह कहाँ हुई?
न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक नीति-विमर्श सम्मेलन है। इसमें नीति-निर्माताओं, विद्वानों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने भारत की वैश्विक भूमिका और भारत-अमेरिका साझेदारी के भविष्य पर चर्चा की।
RSS की पाँच प्रमुख प्राथमिकताएं कौन सी हैं?
होसबोले ने RSS की पाँच प्राथमिकताएं बताईं — सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, पारिवारिक मूल्य, आत्मनिर्भरता और नागरिक कर्तव्य-बोध। उनके अनुसार ये सार्वभौमिक सिद्धांत एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र की नींव हैं।
RSS की स्थापना कब हुई और यह कितना बड़ा संगठन है?
RSS की स्थापना 1925 में हुई थी और इसे दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में गिना जाता है। संगठन के स्वयंसेवक लगभग 40 प्रकार की सामाजिक संस्थाएं चलाते हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और आपदा राहत में सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले