27 सितंबर 2026
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होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी से पहले की स्थिति बहाल हो — UNGA में बोले सऊदी विदेश मंत्री फैसल

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होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी से पहले की स्थिति बहाल हो — UNGA में बोले सऊदी विदेश मंत्री फैसल

सारांश

होर्मुज स्ट्रेट अब महज एक समुद्री रास्ता नहीं — यह एक भू-राजनीतिक दबाव बिंदु बन चुका है। UNGA में सऊदी अरब की माँग और ईरान की सात दिन वाली योजना एक साथ मेज़ पर हैं। अगले कुछ दिन तय करेंगे कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलती है या संकट और गहराता है।

मुख्य बातें

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने 27 सितंबर 2026 को UNGA में होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी से पहले की स्थिति बहाली की माँग की।
उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट, बाब अल-मंदेब, लाल सागर और अदन की खाड़ी को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने की अपील की।
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़रायल के ईरान पर हमलों के बाद स्ट्रेट से जहाज़रानी बाधित हुई थी, जिससे सऊदी तेल निर्यात प्रभावित हुआ।
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कतर के माध्यम से अमेरिका को योजना भेजी — शर्तें मानने पर सात दिनों में स्ट्रेट खुल सकता है।
अराघची के अनुसार ये शर्तें नई नहीं, बल्कि जून के अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन में पहले से शामिल हैं।
सऊदी अरब ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त रखने की ज़रूरत भी दोहराई।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की जनरल डिबेट में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी से पहले जैसी स्थिति बहाल की जानी चाहिए और जहाजों की आवाजाही पर किसी प्रकार की फीस या पाबंदी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस समुद्री मार्ग को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अपरिहार्य बताया।

मुख्य घटनाक्रम

फैसल ने अपने संबोधन में विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट, बाब अल-मंदेब स्ट्रेट, लाल सागर और अदन की खाड़ी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोई भी पक्ष इन समुद्री मार्गों को दबाव बनाने या धमकी देने के हथियार के रूप में इस्तेमाल न करे।

उन्होंने आगे कहा कि खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पूरे इलाके और दुनिया की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है, और सऊदी अरब क्षेत्र में तनाव कम करने की समस्त पहलों और कोशिशों का समर्थन करता है।

पृष्ठभूमि: 28 फरवरी के बाद का संकट

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल और मध्य पूर्व में कई ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित हुई, जिसका सऊदी अरब के तेल निर्यात पर गहरा असर पड़ा।

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुज़रती है, जिससे इसकी बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों, सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ता है।

ईरान की सात दिन की योजना

इससे एक दिन पहले शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों को बताया कि ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को एक ठोस योजना भेजी है। इस योजना के तहत यदि आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं, तो होर्मुज स्ट्रेट को सात दिनों के भीतर फिर से खोला जा सकता है।

अराघची के अनुसार, यह सात दिनों की समय सीमा अमेरिका की ओर से योजना स्वीकार किए जाने के तुरंत बाद शुरू होगी। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत अमेरिका को कुछ कदम उठाने होंगे, जिन्हें पूरा करने में ईरान के अनुमान के अनुसार चार या पाँच दिन लग सकते हैं।

अराघची ने स्पष्ट किया कि छठे दिन स्ट्रेट खोल दिया जाएगा और सातवें दिन आपसी सहमति वाले मुद्दों पर अंतिम समझौते के लिए अमेरिका के साथ वार्ता शुरू होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका से जो कदम माँगे जा रहे हैं, वे नई शर्तें नहीं हैं — ये पहले ही जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में शामिल की जा चुकी हैं।

सामूहिक विनाश के हथियारों पर चेतावनी

फैसल ने अपने संबोधन में पूरे खाड़ी क्षेत्र को सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बनी हुई है।

आगे क्या

अब सभी की नज़रें वाशिंगटन पर हैं कि वह ईरान की कतर-मध्यस्थ योजना पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि अमेरिका इस योजना को स्वीकार करता है, तो होर्मुज स्ट्रेट की बहाली वैश्विक तेल आपूर्ति और बाज़ारों को त्वरित राहत दे सकती है। क्षेत्रीय राजनय के इस नाज़ुक मोड़ पर सऊदी अरब की तटस्थ लेकिन दृढ़ आवाज़ संकट के समाधान में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे ठोस आर्थिक दबाव है — रियाद का तेल निर्यात सात महीनों से होर्मुज की अनिश्चितता में फँसा है। ईरान की 'सात दिन' वाली योजना आकर्षक लगती है, लेकिन यह उन्हीं जून MoU शर्तों पर टिकी है जिन पर अमेरिका पहले भी सहमत नहीं हो सका। असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन घरेलू राजनीतिक दबाव के बावजूद ईरान की शर्तें मान सकता है — और क्या कतर की मध्यस्थता उस भरोसे की खाई को पाट पाएगी जो फरवरी के हमलों के बाद और गहरी हो गई है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी के बाद क्या हुआ था?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कई मध्य पूर्वी ठिकानों को निशाना बनाया। इस संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बाधित हो गई, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और सऊदी अरब के निर्यात पर गंभीर असर पड़ा।
UNGA में सऊदी विदेश मंत्री ने क्या माँग की?
सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने 27 सितंबर 2026 को UNGA की जनरल डिबेट में होर्मुज स्ट्रेट में 28 फरवरी से पहले जैसी स्थिति बहाल करने की माँग की। उन्होंने कहा कि किसी भी पक्ष को इस समुद्री मार्ग का दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए क्या योजना पेश की है?
ईरान के विदेश मंत्री अराघची के अनुसार, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को एक योजना भेजी है जिसके तहत शर्तें मानने पर सात दिनों के भीतर स्ट्रेट दोबारा खोला जा सकता है। छठे दिन स्ट्रेट खुलेगा और सातवें दिन अमेरिका के साथ अंतिम समझौते की वार्ता शुरू होगी।
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी हैं?
अराघची के अनुसार ये शर्तें नई नहीं हैं, बल्कि जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (MoU) में पहले से शामिल हैं। इन्हें पूरा करने में ईरान के अनुमान के अनुसार चार से पाँच दिन लग सकते हैं।
होर्मुज स्ट्रेट की बाधा से दुनिया पर क्या असर पड़ रहा है?
होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति गुज़रती है। इसकी बाधा से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चेन सीधे प्रभावित होते हैं, जिससे सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों के तेल निर्यात पर भी बड़ा असर पड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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