13 जुलाई 2026
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होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने पर ज़ोर: साइप्रस में EU विदेश मंत्रियों की बैठक, इटली के तजानी बोले — IMEC भी एजेंडे पर

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होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने पर ज़ोर: साइप्रस में EU विदेश मंत्रियों की बैठक, इटली के तजानी बोले — IMEC भी एजेंडे पर

सारांश

साइप्रस में EU विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने की माँग केंद्र में रही। इटली के तजानी ने भारत के जयशंकर और सऊदी अरब के फैसल बिन फरहान को 'रणनीतिक साझेदार' बताया — और IMEC को वैश्विक व्यापार पुनर्संतुलन के औज़ार के रूप में पेश किया।

मुख्य बातें

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने 28 मई 2026 को लेमेसोस, साइप्रस में EU विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने पर ज़ोर दिया।
बैठक में अमेरिका-ईरान के बीच 12 हफ्तों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के मिले-जुले समाधान पर चर्चा हुई।
भारत के विदेश मंत्री डॉ.
जयशंकर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को रणनीतिक साझेदार के रूप में प्रक्रिया में शामिल बताया गया।
IMEC परियोजना — जो 2023 G20 में घोषित हुई थी — भू-राजनीतिक और वित्तीय बाधाओं के कारण अभी भी देरी का सामना कर रही है।
पिछले हफ्ते रोम में प्रधानमंत्री मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी ने IMEC को तेज़ करने पर सहमति जताई थी।

इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने 28 मई 2026 को लेमेसोस, साइप्रस में आयोजित यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के दौरान कहा कि यूरोपीय देश होर्मुज स्ट्रेट को जल्द-से-जल्द दोबारा खोलने और इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए किसी समझौते की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच 12 हफ्तों से जारी संघर्ष वैश्विक व्यापार मार्गों पर गंभीर दबाव बना रहा है।

बैठक का एजेंडा और मुख्य घटनाक्रम

तजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'लेमेसोस, साइप्रस — यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की (अनौपचारिक) मीटिंग यूक्रेन और मिडिल ईस्ट दोनों में शांति का रास्ता मजबूत करने के लिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन का ध्यान नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आज़ादी की गारंटी के लिए होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत फिर से खोलने पर केंद्रित है।

इटली के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इस तथाकथित 'जिमनिच' बैठक में मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र का वैश्विक प्रभाव, इसके सैन्य और आर्थिक परिणाम, तथा लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के युद्ध और गाजा व वेस्ट बैंक की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

रणनीतिक साझेदारों की भागीदारी

तजानी की पोस्ट के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान भी इस प्रक्रिया में यूरोपीय देशों के साथ जुड़ रहे हैं। तजानी ने लिखा कि इन रणनीतिक साझेदारों के साथ मिलकर, IMEC (भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) के माध्यम से इटली के निर्यात को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास व रोज़गार सृजन के प्रयास जारी हैं।

IMEC की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति

2023 में भारत में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित IMEC परियोजना को चीन की बेल्ट एंड रोड वैश्विक बुनियादी ढाँचा योजना के विकल्प के रूप में देखा जाता रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत को अरब की खाड़ी से और अरब की खाड़ी को यूरोप से जहाज और रेल के ज़रिये जोड़ना है। हालाँकि, बड़ी भू-राजनीतिक और वित्तीय बाधाओं के कारण इस परियोजना में देरी हो रही है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते रोम में हुई बातचीत में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने IMEC को आगे बढ़ाने और तेज़ करने पर विशेष ज़ोर दिया था। यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वैश्विक व्यापार पर असर

होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच इस जलमार्ग पर उत्पन्न अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है। यूरोपीय संघ की यह पहल संकेत देती है कि पश्चिमी देश अब इस संकट के कूटनीतिक समाधान के लिए एकजुट होकर दबाव बना रहे हैं।

आगे की राह

EU विदेश मंत्रियों की यह बैठक एक व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है जो एक साथ यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संघर्ष और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा को संबोधित करने की कोशिश कर रही है। भारत और सऊदी अरब जैसे प्रमुख क्षेत्रीय खिलाड़ियों की संलग्नता यह दर्शाती है कि होर्मुज का मसला अब केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय कूटनीति का केंद्र बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि तेहरान और वाशिंगटन दोनों अभी भी बातचीत की मेज़ पर स्थिर नहीं हैं। IMEC को 'चीन के BRI के विकल्प' के रूप में पेश करना राजनीतिक दृष्टि से आकर्षक है, किंतु तीन साल बाद भी परियोजना की धीमी गति यह प्रश्न उठाती है कि क्या यह गलियारा वास्तव में भू-राजनीतिक इच्छाशक्ति से आगे बढ़ पाएगा। भारत की केंद्रीय भूमिका — जयशंकर की संलग्नता और मोदी-मेलोनी की रोम बैठक — संकेत देती है कि नई दिल्ली इस बहुपक्षीय खेल में सक्रिय रूप से अपनी स्थिति मज़बूत कर रही है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर साइप्रस में क्या बैठक हुई?
28 मई 2026 को लेमेसोस, साइप्रस में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक 'जिमनिच' बैठक हुई, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने, मिडिल ईस्ट में शांति और यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा हुई। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने इस बैठक की जानकारी एक्स पर साझा की।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक व्यापार के लिए क्या महत्व है?
होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण इस जलमार्ग पर उत्पन्न अनिश्चितता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित किया है।
IMEC परियोजना क्या है और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
IMEC (भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) 2023 के भारत G20 शिखर सम्मेलन में घोषित एक बहुपक्षीय बुनियादी ढाँचा परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत को अरब की खाड़ी और यूरोप से जहाज व रेल के ज़रिये जोड़ना है। भू-राजनीतिक और वित्तीय बाधाओं के कारण यह परियोजना अभी भी देरी का सामना कर रही है।
भारत इस कूटनीतिक प्रक्रिया में कैसे शामिल है?
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को इटली के तजानी ने होर्मुज समझौते की प्रक्रिया में 'रणनीतिक साझेदार' के रूप में शामिल बताया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ IMEC को तेज़ करने पर सहमति जताई थी।
अमेरिका-ईरान संघर्ष का EU पर क्या असर पड़ा है?
अमेरिका और ईरान के बीच 12 हफ्तों से जारी संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिये नेविगेशन की स्वतंत्रता को बाधित किया है, जिससे EU के ऊर्जा और व्यापारिक हित प्रभावित हुए हैं। यही कारण है कि EU विदेश मंत्रियों ने साइप्रस बैठक में इस मुद्दे को प्राथमिकता दी।
राष्ट्र प्रेस
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