स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर 5 साल में 19.4% बर्फ खो चुके, 2026 में 4 मीटर तक घटी मोटाई: रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर वर्ष 2026 में भी तेज़ी से पिघलते रहे — स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क (ग्लैमॉस) और स्विस कमीशन फॉर क्रायोस्फीयर ऑब्जर्वेशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष के पहले आठ महीनों में स्विस ग्लेशियरों ने अपने बर्फीले आयतन का 5.5 प्रतिशत खो दिया। इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि 2021 से अब तक केवल पाँच वर्षों में कुल बर्फ का 19.4 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो चुका है।
पिघलाव की गति और भीतरी क्षति
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में ग्लेशियरों की औसत मोटाई में 2.5 से 4 मीटर तक की कमी दर्ज की गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियर अब केवल ऊपरी सतह से नहीं पिघल रहे, बल्कि उनके भीतर जल-प्रवाह के कारण बर्फ में सुरंगें और खोखले हिस्से बन रहे हैं, जिससे ग्लेशियर अंदर से कमज़ोर होकर टूटने लगे हैं। यह 'भीतरी विघटन' की प्रक्रिया पारंपरिक पिघलाव से कहीं अधिक विनाशकारी मानी जाती है।
ईटीएच ज्यूरिख के ग्लेशियर वैज्ञानिक और इस रिपोर्ट के प्रमुख लेखक मैथियास हुस के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक जहाँ सैकड़ों मीटर मोटी बर्फ की परतें थीं, वहाँ अब चट्टानों से भरा ऐसा भू-दृश्य दिखता है जो चंद्रमा की सतह जैसा प्रतीत होता है।
मुख्य कारण: रिकॉर्ड गर्मी और कम बर्फबारी
वैज्ञानिकों ने इस त्वरित पिघलाव के पीछे 2026 की भीषण गर्मी और सर्दियों में कम बर्फबारी को प्रमुख कारण बताया है। अप्रैल से सितंबर 2026 तक का छह महीने का मौसमी काल स्विट्जरलैंड में 1864 में रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से सबसे गर्म और सबसे शुष्क रहा।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यूरोप में तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ रहा है और इसका सीधा संबंध जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से जोड़ा जा रहा है। हालाँकि 2026 में बर्फ का नुकसान 2022 के रिकॉर्ड स्तर से कुछ कम रहा — इसकी एक वजह यह भी रही कि इस बार सहारा की धूल का जमाव अपेक्षाकृत कम था और सर्दियों के अंत में बर्फ की मात्रा थोड़ी अधिक थी।
प्लाटालवाफिर्न: लगभग समाप्त होने की कगार पर
स्विट्जरलैंड का प्लाटालवाफिर्न (जिसे ग्रीस ग्लेशियर भी कहा जाता है) इस संकट का सबसे मार्मिक उदाहरण है। इस ग्लेशियर ने केवल दो दशकों में अपने क्षेत्रफल का लगभग 99 प्रतिशत खो दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियरों के पिघलने की यह गति अब सामान्य 'पीछे हटने' की सीमा पार करके तीव्र विघटन के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
जल संकट की आहट
जुलाई से सितंबर 2026 के बीच स्विस ग्लेशियरों से अनुमानित 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी निकला — जो स्विट्जरलैंड की घरेलू वार्षिक पेयजल खपत के चार गुने से अधिक है। फ़िलहाल यह पिघला हुआ पानी गर्मियों में जल संकट को कुछ हद तक कम करता है, लेकिन वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि ग्लेशियरों का आकार घटने के साथ-साथ यह प्राकृतिक जल-भंडार भी कमज़ोर पड़ता जाएगा।
व्यापक प्रभाव: आल्प्स क्षेत्र और परे
यह संकट केवल स्विट्जरलैंड तक सीमित नहीं है। यूरोपीय आल्प्स में ग्लेशियरों का तेज़ी से सिकुड़ना जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति, पारिस्थितिकी तंत्र और पर्यटन उद्योग — सभी पर गहरा असर डाल सकता है। 1997 के बाद से यूरोप में दीर्घकालिक निगरानी के अंतर्गत रखे गए ग्लेशियरों ने बड़े पैमाने पर बर्फ खोई है। यह रिपोर्ट एक बार फिर जलवायु नीति पर तत्काल कार्रवाई की माँग को सामने लाती है।