शिमला में असामान्य गर्मी से परेशान पर्यटक और निवासी, 12 साल में पहली बार ऐसा बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
शिमला में 21 मई 2026 को मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली — जो पहाड़ी शहर अपनी ठंडी हवाओं और सुहावने तापमान के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, वहाँ इस बार तापमान अपेक्षा से कहीं अधिक दर्ज किया गया, जिसने स्थानीय निवासियों और बाहर से आए पर्यटकों दोनों को बेचैन कर दिया। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन अपने चरम पर है।
स्थानीय निवासियों का अनुभव
शिमला की स्थायी निवासी अरुणा शर्मा ने बताया कि वे प्रतिदिन अपने बेटे के साथ लक्कड़ बाजार जाती हैं और इस बार की गर्मी उन्हें असामान्य लग रही है। उन्होंने कहा, 'पहले इतनी गर्मी नहीं होती थी, लेकिन अब गर्मी बढ़ती जा रही है, इसलिए हम अपने साथ ग्लूकोज पानी और नींबू पानी रखते हैं ताकि गर्मी से बच सकें। अब तो छाता भी साथ रखना पड़ता है।'
शर्मा ने आगे कहा कि पिछले करीब 12 सालों में उन्होंने शिमला में ऐसी गर्मी नहीं महसूस की थी। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे इस असामान्य गर्मी के कारण चिड़चिड़े हो जाते हैं।
पर्यटकों की प्रतिक्रिया
गुजरात से परिवार के साथ तीन दिन के दौरे पर आए पर्यटक जिग्नेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अमृतसर, खज्जियार और डलहौजी के बाद शिमला का रुख किया। उन्होंने कहा कि मनाली का मौसम बेहद ठंडा और सुखद था, जबकि शिमला में गर्मी का अहसास हुआ। हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि गुजरात में 40 से 45 डिग्री तापमान झेलने के अभ्यस्त होने के कारण उन्हें बहुत अधिक परेशानी नहीं हुई।
महाराष्ट्र से करीब 70 लोगों के समूह के साथ आए पर्यटक पंडित बंसोड़े ने, जो पिछले 22 सालों से पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं, कहा कि पहले सोलन पहुँचते ही स्वेटर-जैकेट पहननी पड़ती थी, लेकिन अब वैसा मौसम नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'हमने सोचा था कि यहाँ ठंड होगी, लेकिन अभी तो काफी गर्मी महसूस हो रही है और धूप भी तेज है।'
ग्लोबल वार्मिंग की भूमिका
बंसोड़े ने हिमाचल के मौसम में आ रहे क्रमिक बदलाव के लिए ग्लोबल वार्मिंग को एक संभावित कारण बताया। उनके अनुसार पेड़ों की कटाई और विकास के नाम पर हो रहे बदलाव इस समस्या को और गहरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति को संरक्षित रखते हुए ही वास्तविक प्रगति संभव है।
आम जनता और पर्यटन पर असर
गौरतलब है कि शिमला हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है, जिनमें से अधिकांश मैदानी इलाकों की चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए यहाँ आते हैं। यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह हिमाचल प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्रों में तापमान वृद्धि की दर मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक तेज़ है, जो चिंता का विषय है।