जापान-भारत संबंधों को नई ऊंचाई देंगी ताकाइची, मोदी के साथ रात्रिभोज में गहरा हुआ भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने 3 जुलाई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई शिखर वार्ता और रात्रिभोज के बाद घोषणा की कि दोनों नेता मिलकर जापान-भारत संबंधों को और ऊँचे स्तर पर ले जाएंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश अगले वर्ष राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के जश्न की तैयारी कर रहे हैं।
एक्स पर साझा किया भावनात्मक संदेश
रात्रिभोज के बाद ताकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी के साथ जापान ने जो भरोसे का मजबूत रिश्ता बनाया है, उसी के आधार पर हम अगले साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने से पहले जापान-भारत के रिश्तों को और भी मजबूत और ऊंचे स्तर पर लेकर जाएंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि औपचारिक बातचीत से इतर एक आरामदायक माहौल में दोनों नेताओं ने दोनों देशों की संस्कृति, खान-पान और परस्पर भावनाओं पर भी खुलकर चर्चा की, जिससे व्यक्तिगत स्तर पर भरोसा और गहरा हुआ।
हैदराबाद हाउस में हुई औपचारिक वार्ता
इससे पहले दिन में दोनों नेताओं की हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली में औपचारिक बैठक हुई। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ताकाइची ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में जापान और भारत को अपनी-अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए साझा समृद्धि की दिशा में एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, 'एक-दूसरे की ताकत को पूरा करने वाली साझेदारी पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गई है।' बैठक में दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की और साझा लक्ष्यों की पुनः पुष्टि की।
'छोटी बहन' संबोधन से भावुक हुईं ताकाइची
ताकाइची ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें 'छोटी बहन' कहकर संबोधित किया, जिससे उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सोच काफी हद तक एक जैसी है और वे 'भाई-बहन' की तरह अपने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ताकाइची ने भारत में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत और मोदी की मेहमाननवाज़ी के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।
75वीं वर्षगांठ से पहले रिश्तों को नई दिशा
गौरतलब है कि जापान और भारत के बीच राजनयिक संबंध अगले वर्ष 75 वर्ष पूरे करेंगे। इस ऐतिहासिक अवसर से पहले ताकाइची की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति और दिशा देने के लिहाज़ से अहम मानी जा रही है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि दोनों देश न केवल आर्थिक और रणनीतिक, बल्कि सांस्कृतिक और व्यक्तिगत स्तर पर भी अपने संबंधों को सुदृढ़ करने के प्रति गंभीर हैं।