टूरिज्म एक्सपो जापान 2026: तमिलनाडु ने टोक्यो में बौद्ध विरासत और संगम संस्कृति से जापानी पर्यटकों को आकर्षित किया
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु ने 24 से 27 सितंबर 2026 तक टोक्यो में आयोजित चार दिवसीय टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस वैश्विक पर्यटन मंच पर राज्य ने अपने प्राचीन मंदिरों, बौद्ध परंपरा से जुड़े तीर्थस्थलों, विविध भू-दृश्यों, पारंपरिक खान-पान, उत्सवों और नवीन पर्यटन अनुभवों को जापानी पर्यटन उद्योग के सामने रखा। यह प्रदर्शनी तमिलनाडु की वैश्विक पर्यटन महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पैवेलियन का उद्घाटन और प्रमुख उपस्थिति
तमिलनाडु के पैवेलियन का उद्घाटन जापान में भारत की राजदूत नगमा मोहम्मद मल्लिक ने किया। इस अवसर पर तमिलनाडु पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव डॉ. एस. स्वर्णा, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अपर सचिव एवं महानिदेशक सुमन बिल्ला और राजस्थान की पर्यटन सचिव सुचि त्यागी भी उपस्थित रहीं। इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व ने आयोजन को राजनयिक महत्व भी प्रदान किया।
बौद्ध विरासत और संगम साहित्य की झलक
समारोह में डॉ. स्वर्णा ने कहा कि जापान और तमिलनाडु बौद्ध विरासत की साझा डोर से बंधे हैं और यह एक्सपो जापानी सैलानियों को इस विरासत को करीब से देखने का न्योता है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु की पहचान केवल उसके ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी संगम साहित्य परंपरा भी इसकी विशेषता है। इस परंपरा में कुरिंजी (पर्वतीय), मुल्लई (वन), मरुथम (खेत), नेइथल (समुद्र तट) और पलाई (मरुस्थल) — पाँच पारिस्थितिक क्षेत्रों का उल्लेख है, जो राज्य की भौगोलिक विविधता को रेखांकित करते हैं।
गौरतलब है कि दक्षिण भारत में बौद्ध धर्म के प्रसार में तमिलनाडु की भूमिका ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कांचीपुरम, नागपट्टिनम और पूमपुहार जैसे प्राचीन बंदरगाह नगर कभी समुद्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रमुख केंद्र थे, जहाँ से बौद्ध धर्म एशिया के अनेक देशों तक पहुँचा। कांचीपुरम से जुड़े महान बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म की चीन यात्रा आज भी पूर्वी एशिया की बौद्ध परंपरा में सम्मान के साथ स्मरण की जाती है — एक ऐसा सांस्कृतिक सूत्र जो जापान के बौद्ध समुदाय के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
जापान के साथ पर्यटन साझेदारी और निवेश के अवसर
टोक्यो एक्सपो में तमिलनाडु पर्यटन विभाग ने जापानी टूर ऑपरेटरों और निवेशकों के साथ जापान से पर्यटकों की आवक बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श किया। राज्य ने जापानी उद्योग जगत के सामने हेरिटेज होटल, ईको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और अनुभव-आधारित पर्यटन में निवेश और साझेदारी के व्यापक अवसर प्रस्तुत किए। टोक्यो में जेएटीए और ओसाका में रोड-शो के माध्यम से तमिलनाडु जापानी पर्यटन उद्योग के साथ अपने संबंध सुदृढ़ कर रहा है, जिसमें पर्यावरण और संस्कृति के अनुकूल टिकाऊ पर्यटन पर विशेष बल दिया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के राज्य वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की होड़ में हैं। तमिलनाडु, जो सात यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का घर है, इस प्रतिस्पर्धा में अपनी विरासत और विविधता को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश कर रहा है।
डिस्कवर तमिलनाडु एफएएम ट्रिप 2027
इसी क्रम में राज्य ने 'डिस्कवर तमिलनाडु — इंटरनेशनल एडिशन 2026-27' के लिए पंजीकरण प्रारंभ किया है। यह विशेष एफएएम (Familiarization) यात्रा 12 से 20 जनवरी 2027 तक पोंगल पर्व के दौरान आयोजित होगी। इसमें दुनियाभर से 10 ट्रैवल इन्फ्लुएंसर, पत्रकार, टूर ऑपरेटर और एजेंट चुने जाएंगे, ताकि वे तमिलनाडु की विविधता और जीवंतता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर सकें। पोंगल के समय पर इस यात्रा का आयोजन जानबूझकर किया गया है, ताकि प्रतिभागी इस महत्वपूर्ण फसल उत्सव का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकें और उसे अपने दर्शकों तक पहुँचा सकें।
आगे की राह
टूरिज्म एक्सपो जापान 2026 में तमिलनाडु की सक्रिय भागीदारी राज्य की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें एशियाई पर्यटन बाज़ारों, विशेषकर जापान और पूर्वी एशिया, को लक्षित किया जा रहा है। आने वाले महीनों में राज्य की एफएएम ट्रिप और ओसाका रोड-शो की सफलता यह तय करेगी कि जापानी पर्यटकों को तमिलनाडु की ओर आकर्षित करने की यह कोशिश कितनी फलदायी साबित होती है।