ट्रंप ने MMR टीकों को अलग-अलग लगाने की नीति का बचाव किया, माना — कंबाइंड वैक्सीन के खतरे का कोई प्रमाण नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 11 अगस्त 2026 को खसरा, मम्प्स और रूबेला (MMR) के टीकों को अलग-अलग लगाने की अपनी नीति का बचाव किया — यह भी स्वीकार करते हुए कि कंबाइंड MMR वैक्सीन के खतरनाक होने का कोई सीधा वैज्ञानिक प्रमाण उनके पास नहीं है। यह बयान उन्होंने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद दिया, जिसमें बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी नई संघीय सिफारिशें निर्धारित की गई हैं।
एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में क्या है
नए आदेश में 11 बीमारियों की पहचान की गई है जिनके लिए सभी बच्चों का टीकाकरण अनिवार्य बताया गया है। इसके अलावा, जब खसरे, मम्प्स और रूबेला के अलग-अलग टीके देश में उपलब्ध हो जाएं, तो उन्हें एक साथ न देकर अलग-अलग चिकित्सा भेंट के दौरान लगाने की सिफारिश की गई है। उल्लेखनीय है कि नए नियमों के तहत अब हेपेटाइटिस बी, इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 के टीकों की सार्वभौमिक सिफारिश समाप्त कर दी गई है — ये टीके केवल उच्च-जोखिम वाले समूहों को या माता-पिता और डॉक्टरों की सहमति से दिए जाएंगे।
ट्रंप का तर्क और व्यक्तिगत अनुभव
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या कंबाइंड MMR वैक्सीन जानलेवा हो सकती है, तो ट्रंप ने सीधे जवाब दिया — 'नहीं।' फिर भी उन्होंने एहतियात का तर्क देते हुए कहा, 'मैंने सुना है कि कुछ लोग ऐसा मानते हैं। मेरा कहना है कि मान लीजिए इसमें पाँच प्रतिशत का रिस्क है, तो चलिए इन्हें अलग-अलग कर देते हैं।' ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को पाँच अलग-अलग डॉक्टर विजिट में टीके लगवाए थे और दावा किया कि हर बार 20 प्रतिशत डोज दी गई।
उन्होंने अनुमान लगाया कि टीकों के बीच समय का अंतर रखने से ऑटिज्म की दर पर असर पड़ सकता है — हालाँकि इस दावे का समर्थन करने वाला कोई स्थापित वैज्ञानिक शोध उन्होंने उद्धृत नहीं किया।
वित्तीय बोझ पर अस्पष्ट आश्वासन
जब पत्रकारों ने पूछा कि बार-बार डॉक्टर के पास जाने से परिवारों पर अतिरिक्त को-पेमेंट का बोझ पड़ेगा, तो ट्रंप ने मदद का वादा किया, लेकिन किसी ठोस वित्तीय कार्यक्रम की घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा, 'हम उनके साथ और परिवारों के साथ मिलकर काम करेंगे और यह पक्का करेंगे कि खर्च के मामले में सब कुछ ठीक रहे।'
केनेडी और NIH की भूमिका
स्वास्थ्य एवं मानव सेवा सचिव रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर ने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने वैक्सीन की सुरक्षा और दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों की जाँच के लिए अध्ययन शुरू किए हैं। उन्होंने कहा, 'हम वैक्सीन लगवाने वाले और वैक्सीन न लगवाने वाले बच्चों की सेहत पर पड़ने वाले असर की तुलना कर रहे हैं।' केनेडी ने यह भी बताया कि नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) ने ऑटिज्म के प्रसार, कारणों, इलाज और सेवाओं की जाँच के लिए 13 शोध परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है, जिनमें से पाँच में टीकों को संभावित कारण के रूप में जाँचा जाएगा।
NIH के निदेशक जे भट्टाचार्य ने ऑटिज्म को 'बहुत जटिल स्थिति' बताते हुए सावधान किया कि इसके उत्तर मिलने में समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'इसका जवाब आसान नहीं होगा। विज्ञान में समय लगता है।' भट्टाचार्य ने खसरे के टीके को महत्वपूर्ण बताया, लेकिन टीकाकरण के आधार पर बच्चों को स्कूल से बाहर रखने का विरोध किया।
राज्यों पर असर और आगे की राह
इस आदेश में राज्यों को स्कूल टीकाकरण नियमों की समीक्षा करने की सलाह दी गई है। व्हाइट हाउस की घरेलू नीति अधिकारी हेइडी ओवरटन ने बताया कि 28 राज्य पहले ही जनवरी 2026 से CDC की सिफारिशों को मानना बंद कर चुके हैं और अपनी स्वतंत्र नीतियाँ बना रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में खसरे के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है — और विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि टीकाकरण दर में गिरावट से सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर हो सकती है।