14 जुलाई 2026
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ट्रंप ने ईरान ड्राफ्ट डील पर अंतिम फैसला टाला, 'रेडलाइन' पर अड़े — परमाणु हथियार कभी नहीं

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ट्रंप ने ईरान ड्राफ्ट डील पर अंतिम फैसला टाला, 'रेडलाइन' पर अड़े — परमाणु हथियार कभी नहीं

सारांश

ट्रंप ने ईरान के साथ ड्राफ्ट डील पर दो घंटे की सिचुएशन रूम बैठक के बाद भी अंतिम फैसला टाल दिया। परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना और बारूदी सुरंगें हटाना उनकी 'रेडलाइन' हैं — जबकि तेहरान कह रहा है कि वार्ता में परमाणु मुद्दा है ही नहीं।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 मई 2026 को व्हाइट हाउस सिचुएशन रूम में दो घंटे की बैठक के बाद भी ईरान डील पर अंतिम निर्णय नहीं लिया।
ट्रंप की तीन प्रमुख शर्तें: ईरान के संवर्धित परमाणु पदार्थ नष्ट करना, होर्मुज जलडमरूमध्य बिना शुल्क खोलना, और समुद्री बारूदी सुरंगें हटाना।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा — 'ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।' ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि चल रही वार्ताएं सीमित दायरे की हैं और इनमें परमाणु मुद्दा शामिल नहीं।
अमेरिका द्वारा लगाया गया नौसैनिक प्रतिबंध हटाने का संकेत ट्रंप ने दिया, लेकिन कोई अंतिम घोषणा नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 मई 2026 को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ करीब दो घंटे की मैराथन बैठक के बावजूद ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति केवल वही डील स्वीकार करेंगे जो अमेरिका के हितों की रक्षा करे और उनकी तय 'रेडलाइन' पर खरी उतरे।

बैठक का घटनाक्रम

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान में कहा, 'सिचुएशन रूम की बैठक खत्म हो गई है और यह लगभग दो घंटे तक चली। राष्ट्रपति ट्रंप केवल ऐसी डील करेंगे जो अमेरिका के लिए अच्छी हो और उनकी 'रेडलाइन' को पूरा करती हो। ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।' बैठक के बाद भी कोई अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया, इसकी वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।

ट्रंप की मुख्य शर्तें

बैठक से पूर्व ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर समझौते के लिए तीन प्रमुख शर्तें सार्वजनिक कीं। पहली, ईरान के संवर्धित (एनरिच्ड) परमाणु पदार्थों — जिन्हें ट्रंप ने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा — को अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सहयोग से जमीन के भीतर से निकालकर नष्ट किया जाए। ट्रंप का दावा है कि यह सामग्री पिछले वर्ष जून में हुई अमेरिकी बमबारी के बाद गहराई में दब गई थी।

दूसरी शर्त यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल सभी जहाजों के लिए दोनों दिशाओं में बिना किसी शुल्क के खोला जाए। तीसरी शर्त के तहत समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया जाए। इसके बदले ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका का नौसैनिक प्रतिबंध हटाया जा सकता है।

ईरान का रुख

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि फिलहाल चल रही वार्ताएं सीमित दायरे की हैं और इनमें परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है। यह बयान वाशिंगटन की स्थिति से सीधे टकराता है, जो परमाणु निरस्त्रीकरण को किसी भी डील की केंद्रीय शर्त मानता है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं और 2015 के JCPOA परमाणु समझौते से ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका के बाहर निकलने के बाद कूटनीतिक खाई और गहरी हो गई थी। गौरतलब है कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ईरान के साथ किसी संभावित समझौते पर सबसे गंभीर दौर की बातचीत मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी गहरे बने हुए हैं — ईरान परमाणु मुद्दे को वार्ता के दायरे से बाहर रख रहा है, जबकि ट्रंप इसे केंद्रीय शर्त मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक दोनों पक्ष वार्ता के दायरे पर सहमत नहीं होते, किसी ठोस समझौते की संभावना सीमित है। अगली बैठक या घोषणा की तारीख अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

होर्मुज खोलना, बारूदी सुरंगें हटाना — व्यापक लगती हैं, लेकिन असली पेच यह है कि ईरान इन्हें वार्ता की मेज पर लाने से ही इनकार कर रहा है। दोनों पक्ष वार्ता के दायरे पर ही सहमत नहीं हैं, तो किसी ठोस डील की उम्मीद अभी दूर की कौड़ी है। यह पैटर्न नया नहीं — 2015 के JCPOA के बाद से हर बार 'डील के करीब' की खबरें आती हैं और फिर गतिरोध लौट आता है। बिना किसी सत्यापन तंत्र और दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी परिभाषाओं के, यह बैठक भी इतिहास में एक और अनिर्णायक अध्याय बनकर रह सकती है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरान डील पर अंतिम फैसला क्यों टाला?
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, दो घंटे की बैठक के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया और इसकी वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी। ट्रंप का रुख है कि वे केवल वही डील करेंगे जो अमेरिका के हितों की रक्षा करे और उनकी 'रेडलाइन' पर खरी उतरे।
ट्रंप की ईरान के साथ डील के लिए क्या शर्तें हैं?
ट्रंप की तीन मुख्य शर्तें हैं: ईरान के संवर्धित परमाणु पदार्थों को आईएईए के सहयोग से नष्ट करना, होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शुल्क सभी जहाजों के लिए खोलना, और समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटाना। साथ ही ईरान को यह गारंटी देनी होगी कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
ईरान की इस डील पर क्या प्रतिक्रिया है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि चल रही वार्ताएं सीमित दायरे की हैं और इनमें परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है। यह अमेरिकी रुख से सीधा टकराव है, जो परमाणु निरस्त्रीकरण को डील की केंद्रीय शर्त मानता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इस डील में क्यों अहम है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल की आपूर्ति पाता है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान इसे बिना किसी शुल्क के सभी जहाजों के लिए खुला रखे, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता का अगला कदम क्या होगा?
फिलहाल अगली बैठक या घोषणा की कोई तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। दोनों पक्षों के बीच वार्ता के दायरे पर ही मतभेद बने हुए हैं, इसलिए किसी ठोस समझौते की संभावना अभी अनिश्चित बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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