ट्रंप ने ईरान ड्राफ्ट डील पर अंतिम फैसला टाला, 'रेडलाइन' पर अड़े — परमाणु हथियार कभी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 मई 2026 को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ करीब दो घंटे की मैराथन बैठक के बावजूद ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति केवल वही डील स्वीकार करेंगे जो अमेरिका के हितों की रक्षा करे और उनकी तय 'रेडलाइन' पर खरी उतरे।
बैठक का घटनाक्रम
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान में कहा, 'सिचुएशन रूम की बैठक खत्म हो गई है और यह लगभग दो घंटे तक चली। राष्ट्रपति ट्रंप केवल ऐसी डील करेंगे जो अमेरिका के लिए अच्छी हो और उनकी 'रेडलाइन' को पूरा करती हो। ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।' बैठक के बाद भी कोई अंतिम निर्णय क्यों नहीं लिया गया, इसकी वजह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी।
ट्रंप की मुख्य शर्तें
बैठक से पूर्व ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर समझौते के लिए तीन प्रमुख शर्तें सार्वजनिक कीं। पहली, ईरान के संवर्धित (एनरिच्ड) परमाणु पदार्थों — जिन्हें ट्रंप ने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा — को अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सहयोग से जमीन के भीतर से निकालकर नष्ट किया जाए। ट्रंप का दावा है कि यह सामग्री पिछले वर्ष जून में हुई अमेरिकी बमबारी के बाद गहराई में दब गई थी।
दूसरी शर्त यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल सभी जहाजों के लिए दोनों दिशाओं में बिना किसी शुल्क के खोला जाए। तीसरी शर्त के तहत समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया जाए। इसके बदले ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका का नौसैनिक प्रतिबंध हटाया जा सकता है।
ईरान का रुख
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि फिलहाल चल रही वार्ताएं सीमित दायरे की हैं और इनमें परमाणु मुद्दा शामिल नहीं है। यह बयान वाशिंगटन की स्थिति से सीधे टकराता है, जो परमाणु निरस्त्रीकरण को किसी भी डील की केंद्रीय शर्त मानता है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं और 2015 के JCPOA परमाणु समझौते से ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका के बाहर निकलने के बाद कूटनीतिक खाई और गहरी हो गई थी। गौरतलब है कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ईरान के साथ किसी संभावित समझौते पर सबसे गंभीर दौर की बातचीत मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी गहरे बने हुए हैं — ईरान परमाणु मुद्दे को वार्ता के दायरे से बाहर रख रहा है, जबकि ट्रंप इसे केंद्रीय शर्त मानते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक दोनों पक्ष वार्ता के दायरे पर सहमत नहीं होते, किसी ठोस समझौते की संभावना सीमित है। अगली बैठक या घोषणा की तारीख अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।