10 अगस्त 2026
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क्या ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कार्रवाई से नाटो टूट जाएगा? (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान

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क्या ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कार्रवाई से नाटो टूट जाएगा? (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान

सारांश

क्या ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कार्रवाई नाटो को कमजोर कर देगी? (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने इस मुद्दे पर अपने विचार साझा किए हैं। जानिए अमेरिका, रूस और चीन के बीच की जटिलताएँ और ग्रीनलैंड की भूमिका।

मुख्य बातें

अमेरिका ने ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में रखने का स्पष्ट संदेश दिया है।
यूरोपीय यूनियन अमेरिका के खिलाफ हो रहा है।
नाटो का संगठन कमजोर हो सकता है।
रूस और चीन से कोई औपचारिक खतरा नहीं है।
ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड के रेयर अर्थ मिनरल्स पर है।

नई दिल्ली, 21 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ग्रीनलैंड के इर्द-गिर्द वैश्विक राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ग्रीनलैंड को अपने पास ही रखेगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। जबकि, यूरोपीय यूनियन इस मामले में अमेरिका के खिलाफ खड़ा है।

ईयू लगातार अमेरिका के विरोध में अपनी आवाज उठा रहा है। इस संदर्भ में (रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने बताया कि अमेरिका की ग्रीनलैंड में की जाने वाली कार्रवाई का नाटो पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड में रूस और चीन अमेरिका के लिए कितने बड़े खतरे बन सकते हैं।

(रिटायर्ड) ब्रिगेडियर अद्वित्य मदान ने कहा, "कल आठ देशों ने नार्वे, स्वीडेन, फिनलैंड, डेनमार्क, ब्रिटेन, नीदरलैंड और जर्मनी ने एक एक्सरसाइज का नाम देकर अपने ट्रूप्स भेजे हैं। यह सिर्फ एक एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि अमेरिका को यह संदेश देने का प्रयास है कि ग्रीनलैंड पर जो ऑपरेशन होने वाला है, वह सरल नहीं होगा।"

ट्रंप की कार्रवाई के असर पर उन्होंने कहा, "नाटो एक 32 देशों का संगठन है, जो बर्बाद हो सकता है। अमेरिका नाटो का एक नेतृत्वकर्ता है, लेकिन वह अन्य नाटो देशों पर हमला कर रहा है। इसका गंभीर नुकसान होगा। नाटो के 32 देश अमेरिका पर लीडरशिप, कमांड और डिफेंस व्यापार के लिए निर्भर थे। अमेरिका की कार्रवाई के बाद यूरोपीय यूनियन को सभी चीजें फिर से व्यवस्थित करनी होंगी।"

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें यह विचार करना होगा कि वे सैन्य हार्डवेयर किस देश से खरीदेंगे, और आपस में लेन-देन करेंगे। उनका कमांड और कंट्रोल पूरी तरह से भंग हो जाएगा। 1951 से अमेरिका और डेनमार्क के बीच सुरक्षा समझौता है कि अगर ग्रीनलैंड को खतरा होता है, तो अमेरिका वहां अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा सकता है और सैन्य बेस स्थापित कर सकता है।

अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड में रूस-चीन के खतरे के बारे में रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने कहा, "रूस और चीन की तरफ से कोई औपचारिक खतरा नहीं है। दोनों देशों ने हमले के लिए अब तक कोई चेतावनी या संकेत नहीं दिया है। वेनेजुएला में ट्रंप का मकसद मादुरो को किडनैप करना नहीं था, बल्कि उनका मुख्य लक्ष्य तेल था। दुनिया में 20 प्रतिशत ऑयल रिजर्व वेनेजुएला के पास है। हालांकि, उनकी रिफाइनमेंट की क्षमता केवल 1 प्रतिशत है, लेकिन इसे बढ़ाया जा सकता है। ग्रीनलैंड में अमेरिका के लिए रूस और चीन से कोई खतरा नहीं है। ट्रंप की नजर रेयर अर्थ मिनरल्स पर है। ट्रंप एक बिजनेसमैन हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कार्रवाई का नाटो पर क्या असर पड़ेगा?
ट्रंप की कार्रवाई से नाटो का संगठन कमजोर हो सकता है, क्योंकि अमेरिका अन्य नाटो देशों पर हमला कर रहा है।
क्या रूस और चीन ग्रीनलैंड के लिए खतरा हैं?
रूस और चीन की तरफ से कोई औपचारिक खतरा नहीं है, और उन्होंने अब तक किसी भी हमले की चेतावनी नहीं दी है।
राष्ट्र प्रेस
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