होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहेगा, यूरोपीय मदद नहीं चाहिए: ट्रंप का स्पष्ट संदेश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 जून 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को किसी यूरोपीय देश की सैन्य सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग फिर से पूरी तरह खुलेगा और सुरक्षित रहेगा।
ट्रंप का यूरोप को सीधा जवाब
ट्रंप ने यूरोपीय सहयोग के सवाल पर दो टूक कहा, 'हमें उनकी मदद की जरूरत नहीं है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है।' उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने पहले नाटो देशों और अन्य सहयोगियों को इस अभियान में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सभी ने इसे अस्वीकार कर दिया। ट्रंप के अनुसार, 'मैंने कहा था कि अगर आप मदद करना चाहें तो बहुत अच्छा होगा, लेकिन सबने इसे ठुकरा दिया।'
यूरोप की ऊर्जा निर्भरता पर चेतावनी
ट्रंप ने संकेत दिया कि यूरोपीय देशों का यह फैसला आगे चलकर उनके लिए महंगा साबित हो सकता है, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर भारी निर्भर हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे पास जितनी जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा तेल और ऊर्जा है, लेकिन यूरोपीय देशों और कई अन्य देशों को इसकी बहुत जरूरत है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही भू-राजनीतिक तनावों के कारण दबाव में है।
समुद्री सुरक्षा पर अमेरिकी कार्रवाई
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए पहले ही ठोस कदम उठा चुका है। उन्होंने कहा, 'हमने काफी हद तक समुद्री बारूदी सुरंगों (माइंस) को निष्क्रिय कर दिया है। हमारे पास दुनिया के सबसे आधुनिक माइंसवीपर हैं।' यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिकी नौसेना पहले से ही सक्रिय भूमिका में है।
ईरान परमाणु समझौते से जुड़ाव
ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य को ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, 'समझौते का सबसे अहम हिस्सा यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।' गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है, और दुनियाभर में व्यापार होने वाले कच्चे तेल तथा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का एक बड़ा हिस्सा प्रतिदिन इसी संकरे मार्ग से गुजरता है।
आगे क्या होगा
ट्रंप के इस बयान के बाद वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और यूरोपीय राजधानियों में इस कूटनीतिक संदेश की गूँज सुनाई देगी। अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता की प्रगति और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर आने वाले हफ्तों में और स्पष्टता मिलने की संभावना है।