ईरान ने ट्रंप के 'अप्रत्यक्ष वार्ता' दावे को नकारा, विदेश मंत्रालय बोला — 'अमेरिका से कोई बातचीत नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने 3 अगस्त को साफ कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा निराधार है कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष वार्ता शुरू होने वाली है। बाघेई ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा कि तेहरान की न तो किसी प्रतिनिधि को बुलाने की और न ही किसी को भेजने की कोई योजना है।
बाघेई का स्पष्ट इनकार
बाघेई ने अपने बयान में कहा, 'किसी प्रतिनिधि का स्वागत करने या फिर किसी को बातचीत के लिए भेजने की हमारी कोई योजना नहीं है। फिलहाल हमारी अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मध्यस्थ के साथ भी कोई संवाद नहीं हो रहा। तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार यह बयान सोमवार की प्रेस ब्रीफिंग में दिया गया।
ट्रंप ने क्या कहा था
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि सोमवार से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के ज़रिए अप्रत्यक्ष वार्ता शुरू होगी। उन्होंने कहा, 'हम जब चाहें कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन मैं लोगों को मारना नहीं चाहता। अगर समझौता हो जाता है तो बहुत-सी जानें बच जाएंगी।' हालाँकि, ट्रंप ने वार्ता स्थल और प्रतिभागियों का कोई ब्यौरा नहीं दिया।
होर्मुज़ स्ट्रेट और परमाणु कार्यक्रम पर तनाव
ट्रंप ने बताया कि प्रस्तावित वार्ता में होर्मुज़ स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इस पर बाघेई ने पलटवार करते हुए कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट के हालात के लिए ईरान-ओमान का कोई मतभेद नहीं, बल्कि अमेरिका-इज़रायल का सैन्य हमला ज़िम्मेदार है। उन्होंने कहा, 'ईरान और ओमान के बीच संवाद सकारात्मक है।'
क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का रुख
बाघेई ने अमेरिका-इज़रायल की संयुक्त कार्रवाई को किसी एक देश नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, 'यह पूरे इलाके और इलाके के सभी देशों की सुरक्षा के खिलाफ जंग है।' बाघेई के अनुसार पिछले पाँच महीनों में क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी ने अस्थिरता बढ़ाई है और फ़ारस की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित देश भी इससे प्रभावित हैं क्योंकि उनकी ज़मीन अमेरिकी सैन्य ठिकानों के रूप में इस्तेमाल हो रही है।
आगे क्या
तेहरान और वाशिंगटन के बीच इस सार्वजनिक विरोधाभास ने किसी भी संभावित कूटनीतिक प्रगति पर सवालिया निशान लगा दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज़ स्ट्रेट पर तनाव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ गहरी हैं। आने वाले दिनों में मध्यस्थ देशों की भूमिका और ट्रंप प्रशासन की अगली कूटनीतिक चाल पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।