ट्रंप ने मिशिगन में EV नीतियों पर फिर हमला बोला, बाइडेन के कैफे स्टैंडर्ड्स को बताया 'आपदा'
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जुलाई 2026 को मिशिगन स्थित जनरल मोटर्स मिलफोर्ड प्रूविंग ग्राउंड का दौरा करते हुए इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर एक बार फिर तीखा हमला बोला। उन्होंने ऑटोमोबाइल कामगारों को संबोधित करते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक और इंटरनल-कंबशन — दोनों में से किसी भी गाड़ी को चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी ऑटो उद्योग वैश्विक EV बाज़ार में अपनी रणनीति को लेकर नए सिरे से मंथन कर रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रंप ने दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के इलेक्ट्रिक व्हीकल मैंडेट और कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल इकॉनमी (CAFE) स्टैंडर्ड्स को पहले ही समाप्त कर दिया है। उन्होंने कहा, 'पहले दिन, मैंने बाइडेन के बेतुके इलेक्ट्रिक व्हीकल मैंडेट को खत्म कर दिया था, जिससे अमेरिकी ऑटो इंडस्ट्री हमेशा के लिए खत्म हो जाती।'
ट्रंप ने CAFE स्टैंडर्ड्स को भी निशाने पर लिया और उन्हें देश की हर कार कंपनी के लिए 'दिवालियेपन का छोटा रास्ता' करार दिया। उन्होंने कहा, 'जब तक मैं प्रेसिडेंट हूँ, ऐसा कभी नहीं होगा।'
रोज़गार पर चिंता और EV का तर्क
ट्रंप ने तर्क दिया कि इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में पारंपरिक गाड़ियों की तुलना में कम श्रमिकों की ज़रूरत होती है, जिससे मिशिगन जैसे ऑटोमोबाइल-निर्भर राज्यों में रोज़गार को लेकर गहरी चिंता है। जनरल मोटर्स की सीईओ मैरी बारा की उपस्थिति में उन्होंने कहा, 'इलेक्ट्रिक कार बनाने में बहुत कम लोगों की ज़रूरत होती है।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि उपभोक्ता चाहें तो EV भी खरीद सकते हैं — सरकार का रुख 'चुनाव की स्वतंत्रता' पर है, न कि EV पर पूर्ण प्रतिबंध पर।
टैरिफ नीति और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा
ट्रंप ने बताया कि आयातित ऑटोमोबाइल और ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जबकि अमेरिका में निर्मित वाहनों पर यह शुल्क नहीं लगता। उन्होंने ऑटोमोबाइल लोन पर ब्याज की टैक्स कटौती का भी उल्लेख किया, लेकिन स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल अमेरिका में बनी गाड़ियों पर ही मिलेगी।
जनरल मोटर्स की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा कि कंपनी ने 2026 में ट्रक और एसयूवी का उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ाया है और अमेरिकी कारखानों में वापसी के लिए दो वर्षों में 9 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।
बाइडेन की पुरानी नीति क्या थी
गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति बाइडेन की सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ाने के लिए उत्सर्जन और ईंधन-दक्षता की शर्तें कड़ी की थीं। हालाँकि इन नीतियों में यह अनिवार्य नहीं था कि हर नई गाड़ी इलेक्ट्रिक हो — बल्कि इनका लक्ष्य बाज़ार में EV और कम-उत्सर्जन वाले मॉडलों की हिस्सेदारी बढ़ाना था।
वैश्विक और भारतीय बाज़ार पर असर
अमेरिकी EV नीति में यह बदलाव केवल अमेरिकी बाज़ार तक सीमित नहीं है। वैश्विक वाहन निर्माता और आपूर्तिकर्ता — जिनमें भारत में सक्रिय कंपनियाँ भी शामिल हैं — उत्सर्जन नियमों, बैटरी की माँग और अमेरिकी बाज़ार तक पहुँच को ध्यान में रखकर निवेश के बड़े फैसले लेते हैं। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका की नीति में यह उलटफेर वैश्विक EV आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।