रूस-डीजल समझौते पर रिपब्लिकन में फूट: सीनेटर टिलिस बोले — ट्रंप 'शायद कानून तोड़ रहे हैं'
सारांश
मुख्य बातें
रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को खुलेआम कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस के साथ डीजल समझौते के ज़रिए 'शायद कानून तोड़ रहे हैं', जबकि सीनेट में रिपब्लिकन व्हिप जॉन बारासो ने इसी कदम को रूस पर दबाव बनाने की कूटनीतिक रणनीति बताया। यह तीखा मतभेद एनबीसी के 'मीट द प्रेस' और सीबीएस के 'फेस द नेशन' पर एक ही दिन उजागर हुआ, जो रिपब्लिकन पार्टी में भीतरी दरार को दर्शाता है। ट्रंप को 18 अक्टूबर 2026 तक यह तय करना है कि रूसी तेल के बड़े खरीदारों पर जुर्माना लगाया जाए या नहीं।
मतभेद कब और कैसे सामने आए
एनबीसी की पत्रकार क्रिस्टन वेल्कर ने टिलिस से सवाल किया कि क्या ट्रंप 2022 में बने उस कानून का उल्लंघन कर रहे हैं जो रूसी तेल के आयात पर रोक लगाता है। नॉर्थ कैरोलिना के सीनेटर टिलिस ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मेरा मानना है कि ऐसा हो सकता है।' उन्होंने जोड़ा कि यह कहने के लिए पर्याप्त आधार हैं कि राष्ट्रपति कानून का पालन नहीं कर रहे।
इसी दिन बाद में टिलिस ने जीन शाहीन (वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य, सीनेट विदेश संबंध समिति) के नेतृत्व में जारी एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए। इस बयान में रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, जॉन कर्टिस और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल व रॉन वाइडेन भी शामिल थे।
बारासो का ट्रंप बचाव
सीबीएस की एंकर मार्गरेट ब्रेनन ने बारासो से पूछा कि क्या ट्रंप का मौजूदा कदम उस कानून का 'मजाक' नहीं बनाता जिसे उन्होंने खुद हाल ही में पारित किया। बारासो ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा, 'हमने यह कानून राष्ट्रपति को अधिक विकल्प और ताकत देने के लिए बनाया था, ताकि वह व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ इसे एक अतिरिक्त हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकें।' उन्होंने इसे रूस पर दीर्घकालिक दबाव की कोशिश का हिस्सा बताया।
कानूनी पेचीदगी: डीजल कच्चे तेल से अलग है
18 सितंबर 2026 को लागू हुए लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026 की धारा 113 के तहत राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पाँच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार है — लेकिन यह अधिकार 30 दिनों के भीतर उपयोग करना होगा।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को फॉक्स न्यूज पर कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि ग्राहम कानून डीजल की खरीद पर रोक लगाता है, वे गलत हैं — क्योंकि धारा 113 में केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस को आधार माना गया है, डीजल जैसे रिफाइंड उत्पाद इसके दायरे में नहीं आते। इसके अलावा, कानून राष्ट्रपति को यह भी अधिकार देता है कि यदि वह कांग्रेस को राष्ट्रीय हित प्रमाणित कर दें तो शुल्क में छूट दे सकते हैं।
भारत के लिए महत्व
दोनों सीनेटरों ने भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन 18 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा भारत के लिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है। यदि ट्रंप प्रशासन इस कानून के तहत कार्रवाई करता है तो भारत पर शुल्क का असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि टिलिस का यह कदम रिपब्लिकन दल में खुलेआम विरोध का दुर्लभ उदाहरण है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध में रूस के साथ संभावित समझौते की दिशा में बातचीत कर रहा है। दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने इस कानून को सीनेट में 86 वोट मिले थे, जो लगभग सर्वसम्मत राय थी — और अब उसी कानून की भावना पर सवाल उठना दोनों दलों के लिए असहज स्थिति है। अगले कुछ दिनों में ट्रंप का 18 अक्टूबर को लिया जाने वाला फैसला अमेरिकी विदेश नीति और भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।