13 अक्टूबर 2026
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ट्रंप ने रूसी डीजल विरोधी रिपब्लिकन सीनेटरों को बताया 'गंभीर नहीं', डीजल कैप का दिया संकेत

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ट्रंप ने रूसी डीजल विरोधी रिपब्लिकन सीनेटरों को बताया 'गंभीर नहीं', डीजल कैप का दिया संकेत

सारांश

ट्रंप ने अपनी ही पार्टी के सीनेटरों को 'गंभीर नहीं' कहकर रूसी डीजल सौदे का बचाव किया — और डीजल कैप का संकेत देकर एक नई पेचीदगी जोड़ दी। 18 अक्टूबर की शुल्क समय-सीमा करीब है और भारत जैसे रूसी तेल खरीदारों की नज़रें इस पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी डीजल आयात का विरोध करने वाले रिपब्लिकन सीनेटरों को 13 अक्टूबर 2026 को 'गंभीर नहीं' करार दिया।
पब्लिक लॉ 119-111 के तहत रूसी तेल खरीदारों पर 100% तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का पहला मौका 18 अक्टूबर से आता है।
OFAC ने जनरल लाइसेंस 135 जारी कर रूसी डीजल लेन-देन की अनुमति दी — उसी कानून के विपरीत जो ट्रंप ने हस्ताक्षरित किया था।
ट्रंप ने 50 लाख टन रूसी डीजल आपूर्ति की घोषणा की, फरवरी में ईरान युद्ध के बाद बढ़ी ईंधन कीमतें नियंत्रित करने के लिए।
भारत पर 18 अक्टूबर की शुल्क सूची में शामिल होने का खतरा; अगस्त 2025 में रूसी तेल खरीद पर पहले से 25% अतिरिक्त शुल्क लग चुका है।
सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की और सुसान कॉलिन्स समेत द्विदलीय समूह ने प्रशासन से फैसला वापस लेने की माँग की।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अक्टूबर 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन रिपब्लिकन सीनेटरों को 'गंभीर नहीं' करार दिया, जो रूस से डीजल आयात के उनके फैसले का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने साथ ही यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ज़रूरत पड़ने पर डीजल पर 'कैप' या प्रतिबंध भी लगा सकता है।

ट्रंप का बयान और रूस-डीजल समझौते का बचाव

ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुए इस ऊर्जा समझौते का पुरज़ोर बचाव किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि ये ऐसे रिपब्लिकन हैं जो वास्तव में गंभीर नहीं हैं। हम बहुत सारा तेल पैदा करते हैं। हम तेल पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा किया तो दुनिया के बाकी देशों पर इसका बहुत बड़ा असर पड़ेगा।' ट्रंप ने यह भी जोड़ा, 'हम डीजल पर भी कोई सीमा या प्रतिबंध लगा सकते हैं और उसे सिर्फ अपने लिए रख सकते हैं।' उन्होंने इस सौदे को अमेरिकी किसानों और पशुपालकों के लिए फायदेमंद बताया, हालांकि संभावित डीजल सीमा के क्रियान्वयन का विवरण नहीं दिया।

रिपब्लिकन विरोधियों की दलीलें

इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले रिपब्लिकन नेताओं में अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की, मेन की सीनेटर सुसान कॉलिन्स, नॉर्थ कैरोलिना के थॉम टिलिस और यूटा के जॉन कर्टिस शामिल हैं। इन्होंने डेमोक्रेटिक सीनेटरों जीन शाहीन, रॉन वाइडन और रिचर्ड ब्लूमेंथल के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी कर प्रशासन से यह निर्णय तुरंत वापस लेने की माँग की।

मर्कोव्स्की ने उस प्रतिबंध कानून का हवाला देते हुए कहा, 'राष्ट्रपति को इन अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि रूस को डीजल निर्यात करके राजस्व कमाने और यूक्रेन में युद्ध जारी रखने की अनुमति देनी चाहिए।' वहीं, कॉलिन्स ने कहा, 'मैं रूसी प्रतिबंध कानून की सह-प्रायोजक थी, जिस पर राष्ट्रपति ने हाल ही में हस्ताक्षर किए, लेकिन अब उसका पालन नहीं कर रहे हैं।'

कानूनी ढाँचा और 18 अक्टूबर की समय-सीमा

पब्लिक लॉ 119-111, जिसे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम से जोड़ा गया है, राष्ट्रपति को रूसी मूल के कच्चे तेल और संबंधित ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, 'राष्ट्रीय हित' का हवाला देकर इन शुल्कों में छूट भी दी जा सकती है। इस कानून के तहत पहला शुल्क 18 अक्टूबर से प्रभावी हो सकता है।

इसी बीच, अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने शुक्रवार को जनरल लाइसेंस 135 जारी किया, जिसके तहत रूसी मूल के डीजल से जुड़े लेन-देन को अनुमति दी गई है। यह कदम उस कानून से उलट दिशा में है, जिस पर ट्रंप ने खुद हस्ताक्षर किए थे।

भारत पर असर और नई दिल्ली का पक्ष

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वर्ष 2022 से रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है। अगस्त 2025 में ट्रंप ने इन्हीं खरीदों को लेकर भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था। प्रशासन ने अभी तक सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत को 18 अक्टूबर से लागू होने वाली शुल्क सूची में शामिल किया जाएगा या नहीं।

गौरतलब है कि नई दिल्ली लंबे समय से यह तर्क देती रही है कि उसके साथ दोहरे मानक अपनाए जा रहे हैं। अगस्त 2026 में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका खुद अपने परमाणु उद्योग के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए पैलेडियम और उर्वरक-रसायन आयात करता है।

आपूर्ति का आकार और पृष्ठभूमि

ट्रंप ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि रूस तुरंत लगभग 3 लाख टन डीजल की आपूर्ति करेगा और कुल आपूर्ति 50 लाख टन तक पहुँचेगी। यह फैसला फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका में बढ़ी ईंधन कीमतों को काबू में करने की कोशिश का हिस्सा है। गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिकी कांग्रेस ने 2022 में रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंध लगाया था — वही प्रतिबंध जिसे अब OFAC लाइसेंस के ज़रिये दरकिनार किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन 18 अक्टूबर की शुल्क समय-सीमा पर क्या रुख अपनाता है और भारत समेत अन्य रूसी तेल खरीदारों को इससे किस हद तक राहत मिलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

OFAC लाइसेंस उसी को व्यावहारिक रूप से बेअसर कर देता है। रिपब्लिकन विरोध को 'गंभीर नहीं' कहना पार्टी अनुशासन की भाषा है, नीतिगत तर्क नहीं — और यह संसद में उन सांसदों को अलग-थलग करने की जोखिम भरी रणनीति है जिन्होंने कानून को ही मूल रूप से आकार दिया। भारत के लिए असली सवाल यह है कि क्या 18 अक्टूबर की समय-सीमा पर कूटनीतिक छूट मिलेगी, या वही 'राष्ट्रीय हित' का प्रावधान — जो अमेरिकी ऊर्जा हितों को सुरक्षित करने के लिए रखा गया है — भारत के विरुद्ध चुनिंदा ढंग से इस्तेमाल होगा।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने रिपब्लिकन सीनेटरों को 'गंभीर नहीं' क्यों कहा?
ट्रंप ने उन रिपब्लिकन सीनेटरों की आलोचना की जो रूस से डीजल आयात के उनके फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सौदा अमेरिकी किसानों और पशुपालकों के हित में है और ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ज़रूरी है।
पब्लिक लॉ 119-111 क्या है और इसका रूसी तेल से क्या संबंध है?
पब्लिक लॉ 119-111 अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी मूल का कच्चा तेल या ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार देता है। यह कानून दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम से जुड़ा है और इसके तहत पहला शुल्क 18 अक्टूबर 2026 से लागू हो सकता है।
OFAC जनरल लाइसेंस 135 क्या है?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने जनरल लाइसेंस 135 जारी कर रूसी मूल के डीजल से जुड़े लेन-देन को अनुमति दी है। यह कदम उस कानून के तहत लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों से विपरीत दिशा में है जिस पर ट्रंप ने स्वयं हस्ताक्षर किए थे।
भारत पर इस विवाद का क्या असर पड़ सकता है?
भारत 2022 से रूसी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार है और अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन पहले ही इन खरीदों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। अब 18 अक्टूबर से संभावित नए शुल्क की सूची में भारत शामिल होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
रूसी ऊर्जा पर अमेरिकी प्रतिबंध कब से लागू हैं?
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिकी कांग्रेस ने 2022 में रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंध लगाया था। वर्तमान विवाद उसी ढाँचे के भीतर उत्पन्न हुआ है, जहाँ OFAC लाइसेंस और राष्ट्रीय हित की छूट के ज़रिये उन प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा रहा है।
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