रूसी डीजल आयात पर अमेरिकी सांसदों की चेतावनी: JP मॉर्गन, बंदरगाहों को आपराधिक कार्रवाई का डर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेस के डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने 27 अक्टूबर 2026 को देश के प्रमुख बैंकों, बंदरगाह प्राधिकरणों और ईंधन वितरक कंपनियों को औपचारिक चेतावनी जारी की है कि रूसी डीजल का आयात करने पर उन्हें आपराधिक और दीवानी (सिविल) कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ अपनी ऊर्जा नीति का खुलकर बचाव किया है और इसे वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति बताया है।
सांसदों के पत्र और प्रमुख चेतावनियाँ
ये पत्र शनिवार को भेजे गए और सोमवार को सार्वजनिक किए गए। इन्हें सीनेट की विदेश संबंध समिति के वरिष्ठ सदस्यों — जीन शाहीन, रॉन वाइडन, शेल्डन व्हाइटहाउस, क्रिस कून्स, एलिजाबेथ वॉरेन और रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस — तथा प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू. मीक्स ने संयुक्त रूप से भेजे। पत्रों में स्पष्ट कहा गया: 'जो कंपनियाँ अमेरिकी कानून का उल्लंघन करते हुए उत्पाद आयात करती हैं, वे खुद को आपराधिक और दीवानी दोनों तरह की कानूनी जिम्मेदारियों के जोखिम में डाल सकती हैं।'
पत्र जेपी मॉर्गन चेस, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, वेल्स फार्गो, गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली के मुख्य अधिकारियों को संबोधित किए गए। इसके अतिरिक्त ह्यूस्टन, कॉर्पस क्रिस्टी और ब्यूमोंट (टेक्सास) के बंदरगाह प्राधिकरणों तथा न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी पोर्ट अथॉरिटी के प्रमुखों को भी इसी आशय के पत्र भेजे गए।
कानूनी आधार: 2022 का प्रतिबंध कानून
सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप की 9 अक्टूबर की घोषणा और अमेरिकी वित्त मंत्रालय के जनरल लाइसेंस 135 का उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि ये दोनों 'एंडिंग इम्पोर्टेशन ऑफ रशियन ऑयल एक्ट, 2022' की मूल भावना के विपरीत हो सकते हैं। उस कानून के तहत रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर तब तक रोक है जब तक राष्ट्रपति कांग्रेस को यह प्रमाणित न करें कि रूस ने यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई बंद कर दी है। पत्र में यह भी कहा गया: 'रूस को वैश्विक बाज़ार में खुलकर डीजल बेचने की अनुमति देना अमेरिका के सुरक्षा हितों को नुकसान पहुँचाता है और यूक्रेन के लोगों के साथ विश्वासघात है।'
गौरतलब है कि प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के वरिष्ठ सदस्य जेमी रास्किन ने भी तेल उद्योग को अलग से पत्र लिखकर इस व्यवस्था के विरुद्ध आगाह किया है। सांसदों ने सभी संबंधित कंपनियों से इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और 28 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और नीतिगत टकराव
राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि 'रूस के साथ हमने जो समझौता किया, उसका मकसद दुनिया के बाज़ार में तेल की आपूर्ति बढ़ाना था' और यह भी कि 'हम तेल उद्योग के बंधक बनकर नहीं रह सकते।' ट्रंप ने इस संदर्भ में अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की मॉस्को यात्रा का भी उल्लेख किया। यह ऐसे समय में आया है जब कार्यपालिका और विधायिका के बीच रूसी ऊर्जा को लेकर सार्वजनिक रूप से दरार उभर रही है।
सांसदों के अनुसार, जहाजों की सार्वजनिक ट्रैकिंग से पता चलता है कि रूसी डीजल लेकर आने वाले जहाज इस महीने के अंत तक ब्यूमोंट और न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी के बंदरगाहों तक पहुँच सकते हैं। अभी तक अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इन पत्रों पर कोई तत्काल सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
भारत पर संभावित असर
रूसी डीजल का यह विवाद भारत में भी करीबी नजर से देखा जा रहा है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया था। रूसी ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी नीति पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में विवाद का विषय रही है, और वाशिंगटन भारत की ओर से रूसी तेल खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क भी लगा चुका है। अमेरिकी कांग्रेस की यह सक्रियता संकेत देती है कि रूसी ऊर्जा पर कानूनी दबाव आगे और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा व्यापार और भारत जैसे खरीदार देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा
संबंधित बैंकों और बंदरगाह प्राधिकरणों की 28 अक्टूबर की समयसीमा बीतने के बाद सांसद संसदीय जाँच शुरू करने या कानूनी कार्रवाई के लिए दबाव बनाने का रास्ता खोल सकते हैं। यह घटनाक्रम अमेरिकी कार्यपालिका और विधायिका के बीच रूस नीति को लेकर गहरे मतभेद को उजागर करता है — एक ऐसा टकराव जो आने वाले हफ्तों में और तीखा होने की संभावना है।