17 अक्टूबर 2026
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रूसी डीजल सौदे के खिलाफ अमेरिकी सांसदों का नया बिल, ट्रंप नीति को कानूनी चुनौती

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रूसी डीजल सौदे के खिलाफ अमेरिकी सांसदों का नया बिल, ट्रंप नीति को कानूनी चुनौती

सारांश

ट्रंप की रूसी डीजल आयात नीति को कानूनी रूप से पलटने के लिए अमेरिकी सांसद मैदान में उतरे हैं। 'प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट' यह सवाल उठाता है कि जो अमेरिका रूस पर प्रतिबंध लगाता है, वह खुद उसका डीजल क्यों खरीदे — यूक्रेन युद्ध के बीच यह विरोधाभास अब कांग्रेस की बहस का केंद्र बन चुका है।

मुख्य बातें

सांसद ग्रेगरी मीक्स ने 17 अक्टूबर 2026 को 'प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट' पेश किया।
विधेयक का लक्ष्य OFAC के उन लाइसेंसों को रद्द करना है जो रूसी ईंधन लेनदेन की अनुमति देते हैं।
रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन सहित दोनों दलों के सांसद बिल के समर्थन में हैं, हालांकि अधिकतर प्रायोजक डेमोक्रेट हैं।
आलोचकों का कहना है कि रूसी डीजल आयात से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा जो यूक्रेन युद्ध को वित्तपोषित कर सकता है।
इससे पहले सांसदों ने ट्रंप से 18 अक्टूबर की समयसीमा तक रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पूरी तरह लागू करने की माँग की थी।
यह विधेयक अभी कानून नहीं है; इसे पारित होने के लिए पूरी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सांसदों ने 17 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका लक्ष्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस व्यवस्था को पलटना है जिसके तहत रूस से डीजल खरीदकर अमेरिका में आयात करने की अनुमति दी गई है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम रूस को यूक्रेन के विरुद्ध जारी युद्ध के लिए अतिरिक्त राजस्व मुहैया करा सकता है।

विधेयक की मुख्य बातें

'प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट' नामक यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने पेश किया। इस विधेयक के तहत यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन को रूसी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने से रोका जाएगा।

इसके अलावा, अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की ओर से जारी उन सामान्य लाइसेंसों को रद्द किया जाएगा जो रूसी ईंधन से जुड़े लेनदेन को वैध बनाते हैं। बिल में भविष्य में ऐसी नई मंजूरियाँ देने पर भी स्थायी रोक लगाने और प्रशासन को रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का प्रस्ताव है।

मुख्य समर्थक और दलगत स्थिति

इस बिल को मुख्यतः डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन मिला है, लेकिन रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन भी इसके सह-प्रायोजकों में शामिल हैं। डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा, जिम कोस्टा, स्टेनी होयर और बिल कीटिंग सहित अन्य कई सदस्य भी समर्थन में हैं। कैलिफोर्निया से भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा की भागीदारी ने इस बहस में एक जाना-पहचाना नाम जोड़ा है।

ट्रंप नीति पर आलोचना

मीक्स ने कहा, 'रूसी डीजल खरीदने की अनुमति देना, रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिका की व्यापक रणनीति के खिलाफ जाता है।' उनके अनुसार यह समझौता अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत कम नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे समय में जब यूक्रेन पर लगातार सैन्य हमले हो रहे हैं, ट्रंप रूस के खिलाफ अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में भी सांसदों ने सवाल उठाया था कि अगर अमेरिका खुद रूसी ऊर्जा आयात करेगा तो मौजूदा प्रतिबंधों का प्रभाव क्या रह जाएगा। इससे पहले सांसद माइकल मैककॉल और जिम कोस्टा के नेतृत्व में दोनों दलों के सांसदों ने ट्रंप को पत्र लिखकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट' को 18 अक्टूबर की समयसीमा तक लागू करने की माँग की थी। उस पत्र में भारत और चीन का विशेष उल्लेख करते हुए उन्हें रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार बताया गया था।

घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर

रूसी डीजल को लेकर यह नीतिगत विवाद अमेरिका के घरेलू आर्थिक मुद्दों से भी जुड़ गया है। डीजल की बढ़ती कीमतों का असर ट्रांसपोर्ट कंपनियों, किसानों और कारोबारों पर पड़ता है, जिससे सरकार पर ईंधन आपूर्ति बढ़ाने का राजनीतिक दबाव बना रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की ऊर्जा नीति पहले से ही कड़ी आलोचना के घेरे में है।

आगे क्या होगा

यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है। इसे प्रभावी बनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी और पूरी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। रिपब्लिकन बहुमत वाले सदन में इसके पारित होने की राह आसान नहीं होगी, लेकिन दोनों दलों के समर्थन से इसे नैतिक और राजनीतिक दबाव का औजार माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बुनियादी विरोधाभास को उजागर करता है जिसे ट्रंप प्रशासन अब तक नज़रअंदाज़ करता रहा है — रूस पर प्रतिबंध लगाना और साथ ही उसका डीजल खरीदना, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। दोनों दलों के सांसदों का एकजुट होना संकेत देता है कि ट्रंप की रूस-नीति पर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है। उस पत्र में भारत और चीन को रूसी तेल के बड़े खरीदार के रूप में निशाना बनाना और स्वयं वही काम करना — यह अमेरिकी विदेश नीति की साख पर सीधा सवाल है। बिना रिपब्लिकन बहुमत की सहमति के यह बिल कानून नहीं बनेगा, लेकिन राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इसकी धार काफी तेज़ है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट' क्या है?
यह एक अमेरिकी विधेयक है जिसे 17 अक्टूबर 2026 को सांसद ग्रेगरी मीक्स ने पेश किया। इसका उद्देश्य ट्रंप प्रशासन की उस व्यवस्था को कानूनी रूप से पलटना है जिसके तहत रूस से डीजल खरीदने की अनुमति दी गई है, और OFAC के संबंधित लाइसेंसों को रद्द करना है।
ट्रंप की रूसी डीजल आयात नीति का विरोध क्यों हो रहा है?
आलोचकों का कहना है कि रूसी डीजल के लेनदेन की अनुमति देने से राष्ट्रपति पुतिन की सरकार को अतिरिक्त आर्थिक राजस्व मिलेगा, जो यूक्रेन के विरुद्ध जारी युद्ध को वित्तपोषित कर सकता है। सांसद मीक्स का तर्क है कि यह कदम रूस पर आर्थिक दबाव की अमेरिकी रणनीति के सीधे विरुद्ध है।
इस बिल को किन सांसदों का समर्थन मिला है?
बिल के प्रमुख प्रायोजक डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स हैं। अमी बेरा, जिम कोस्टा, स्टेनी होयर और बिल कीटिंग सहित अन्य डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन भी इसके सह-प्रायोजक हैं।
क्या यह विधेयक कानून बन सकता है?
अभी यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों की मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की ज़रूरत होगी। रिपब्लिकन बहुमत को देखते हुए इसके पारित होने की राह फिलहाल कठिन मानी जा रही है।
भारत और चीन का इस विवाद से क्या संबंध है?
इससे पहले सांसदों ने ट्रंप को लिखे एक पत्र में भारत और चीन को रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार बताया था और उन पर द्वितीयक टैरिफ लगाने की माँग की थी। नया विधेयक इस विरोधाभास को रेखांकित करता है कि जिन देशों पर दबाव बनाने की बात थी, अमेरिका खुद उसी रूसी ऊर्जा का आयात कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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