रूसी डीजल सौदे के खिलाफ अमेरिकी सांसदों का नया बिल, ट्रंप नीति को कानूनी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के कुछ सांसदों ने 17 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका लक्ष्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस व्यवस्था को पलटना है जिसके तहत रूस से डीजल खरीदकर अमेरिका में आयात करने की अनुमति दी गई है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम रूस को यूक्रेन के विरुद्ध जारी युद्ध के लिए अतिरिक्त राजस्व मुहैया करा सकता है।
विधेयक की मुख्य बातें
'प्रोहिबिट करप्ट रशिया ऑयल डील्स एक्ट' नामक यह प्रस्तावित कानून अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति में शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने पेश किया। इस विधेयक के तहत यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन को रूसी ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने से रोका जाएगा।
इसके अलावा, अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) की ओर से जारी उन सामान्य लाइसेंसों को रद्द किया जाएगा जो रूसी ईंधन से जुड़े लेनदेन को वैध बनाते हैं। बिल में भविष्य में ऐसी नई मंजूरियाँ देने पर भी स्थायी रोक लगाने और प्रशासन को रूसी ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का प्रस्ताव है।
मुख्य समर्थक और दलगत स्थिति
इस बिल को मुख्यतः डेमोक्रेट सांसदों का समर्थन मिला है, लेकिन रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन भी इसके सह-प्रायोजकों में शामिल हैं। डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा, जिम कोस्टा, स्टेनी होयर और बिल कीटिंग सहित अन्य कई सदस्य भी समर्थन में हैं। कैलिफोर्निया से भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा की भागीदारी ने इस बहस में एक जाना-पहचाना नाम जोड़ा है।
ट्रंप नीति पर आलोचना
मीक्स ने कहा, 'रूसी डीजल खरीदने की अनुमति देना, रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिका की व्यापक रणनीति के खिलाफ जाता है।' उनके अनुसार यह समझौता अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की लागत कम नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे समय में जब यूक्रेन पर लगातार सैन्य हमले हो रहे हैं, ट्रंप रूस के खिलाफ अमेरिका की स्थिति को कमजोर कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में भी सांसदों ने सवाल उठाया था कि अगर अमेरिका खुद रूसी ऊर्जा आयात करेगा तो मौजूदा प्रतिबंधों का प्रभाव क्या रह जाएगा। इससे पहले सांसद माइकल मैककॉल और जिम कोस्टा के नेतृत्व में दोनों दलों के सांसदों ने ट्रंप को पत्र लिखकर 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शन्स रशिया एंड ईरान एक्ट' को 18 अक्टूबर की समयसीमा तक लागू करने की माँग की थी। उस पत्र में भारत और चीन का विशेष उल्लेख करते हुए उन्हें रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार बताया गया था।
घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर
रूसी डीजल को लेकर यह नीतिगत विवाद अमेरिका के घरेलू आर्थिक मुद्दों से भी जुड़ गया है। डीजल की बढ़ती कीमतों का असर ट्रांसपोर्ट कंपनियों, किसानों और कारोबारों पर पड़ता है, जिससे सरकार पर ईंधन आपूर्ति बढ़ाने का राजनीतिक दबाव बना रहता है। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की ऊर्जा नीति पहले से ही कड़ी आलोचना के घेरे में है।
आगे क्या होगा
यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है। इसे प्रभावी बनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी और पूरी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। रिपब्लिकन बहुमत वाले सदन में इसके पारित होने की राह आसान नहीं होगी, लेकिन दोनों दलों के समर्थन से इसे नैतिक और राजनीतिक दबाव का औजार माना जा रहा है।