15 जुलाई 2026
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ट्रंप प्रशासन ने लुकोइल-रोजनेफ्ट पर लगाए अभूतपूर्व प्रतिबंध — ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट का दावा

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ट्रंप प्रशासन ने लुकोइल-रोजनेफ्ट पर लगाए अभूतपूर्व प्रतिबंध — ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट का दावा

सारांश

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उसने रूस की तेल अर्थव्यवस्था पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए हैं — लुकोइल और रोजनेफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियाँ निशाने पर हैं। लेकिन आलोचक कह रहे हैं कि चीन और भारत के साथ बढ़े व्यापार ने रूस को राहत दे दी है। यूक्रेन युद्ध के बीच प्रतिबंधों की असली कामयाबी पर बहस तेज है।

मुख्य बातें

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने रूस पर अब तक के सबसे कड़े तेल प्रतिबंध लगाए हैं।
रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
बेसेंट ने बाइडेन प्रशासन पर चुनावी दबाव में 'हल्के प्रतिबंध' लगाने का आरोप लगाया।
आलोचकों के अनुसार रूस ने चीन और भारत के साथ व्यापार बढ़ाकर प्रतिबंधों का असर कम किया है।
अतिरिक्त प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा कीमतें और विश्व अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल क्षेत्र पर किसी भी पूर्व अमेरिकी प्रशासन की तुलना में कहीं अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उनके बयान में रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर लगाए गए प्रतिबंधों का विशेष उल्लेख था।

बेसेंट का बयान और बाइडेन प्रशासन से तुलना

कीव पर हाल के रूसी हमलों के बाद अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार के सवाल पर बेसेंट ने पूर्ववर्ती प्रशासन की नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, "बाइडेन प्रशासन ने बहुत हल्के प्रतिबंध लगाए थे, क्योंकि उन्हें चुनाव के दौरान पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की चिंता थी।" बेसेंट के अनुसार, सत्ता परिवर्तन से पहले प्रतिबंध व्यवस्था को मजबूत किया गया था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे और विस्तारित किया गया।

बेसेंट ने कहा, "अक्टूबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था और हमने ऐसा किया।" हालांकि उन्होंने किसी नए प्रतिबंध की घोषणा नहीं की।

प्रतिबंधों का उद्देश्य और रूसी अर्थव्यवस्था पर असर

रूस की जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उन्हें रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल-आधारित आय को कम करना है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण में रूस काफी हद तक ऊर्जा निर्यात राजस्व पर निर्भर है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से बैंकों, ऊर्जा कंपनियों, रक्षा उद्योग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाते हुए कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं।

गौरतलब है कि इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को लेकर नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के बीच अब भी बहस जारी है।

आलोचकों का नज़रिया

ट्रंप प्रशासन पर रूस के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं, जिसके जवाब में यह बयान आया है। आलोचकों का कहना है कि रूस ने चीन और भारत जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर प्रतिबंधों से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली है। तेल और गैस की वैश्विक माँग बनी रहने से रूस को अभी पर्याप्त आय मिल रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और यूरोप में यह बहस फिर तेज हो गई है कि मॉस्को पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाए या नहीं।

वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। रूसी तेल की आपूर्ति में व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जो भारत सहित तेल आयातक देशों को प्रभावित करेगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन मौजूदा प्रतिबंध ढाँचे को और कड़ा करता है या कूटनीतिक रास्ता अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महज दो कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना युद्ध की दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि जब तक चीन और भारत रूसी तेल खरीदते रहेंगे, तब तक ये प्रतिबंध कितने कारगर हैं — और इस पर वाशिंगटन के पास कोई ठोस जवाब नहीं दिखता। वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की परस्पर निर्भरता को नज़रअंदाज़ करके लगाए गए प्रतिबंध अक्सर घरेलू राजनीति के लिए होते हैं, न कि भू-राजनीतिक परिणामों के लिए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन ने रूस की किन तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं?
ट्रंप प्रशासन ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अक्टूबर में इन प्रतिबंधों का निर्देश दिया था।
क्या ये प्रतिबंध रूस की अर्थव्यवस्था को वाकई नुकसान पहुँचा रहे हैं?
इस पर विशेषज्ञों में मतभेद है। आलोचकों का कहना है कि रूस ने चीन और भारत के साथ व्यापार बढ़ाकर प्रतिबंधों से हुए नुकसान की काफी भरपाई कर ली है। तेल और गैस की वैश्विक माँग बनी रहने से रूस को अभी पर्याप्त आय मिल रही है।
बेसेंट ने बाइडेन प्रशासन की नीति की आलोचना क्यों की?
बेसेंट ने दावा किया कि बाइडेन प्रशासन ने चुनाव के दौरान पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की चिंता से 'हल्के प्रतिबंध' लगाए थे। उनके अनुसार ट्रंप प्रशासन ने इस नीति को और कड़ा किया है।
रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंधों का वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि अमेरिका रूस पर और प्रतिबंध लगाता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर भी दबाव आ सकता है।
यूक्रेन युद्ध में पश्चिमी देशों ने रूस पर अब तक कितने दौर के प्रतिबंध लगाए हैं?
फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं। इनका निशाना बैंक, ऊर्जा कंपनियाँ, रक्षा उद्योग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी रहे हैं, हालांकि इनकी प्रभावशीलता पर बहस जारी है।
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