ट्रंप प्रशासन ने लुकोइल-रोजनेफ्ट पर लगाए अभूतपूर्व प्रतिबंध — ट्रेजरी सेक्रेटरी बेसेंट का दावा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल क्षेत्र पर किसी भी पूर्व अमेरिकी प्रशासन की तुलना में कहीं अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उनके बयान में रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर लगाए गए प्रतिबंधों का विशेष उल्लेख था।
बेसेंट का बयान और बाइडेन प्रशासन से तुलना
कीव पर हाल के रूसी हमलों के बाद अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार के सवाल पर बेसेंट ने पूर्ववर्ती प्रशासन की नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, "बाइडेन प्रशासन ने बहुत हल्के प्रतिबंध लगाए थे, क्योंकि उन्हें चुनाव के दौरान पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की चिंता थी।" बेसेंट के अनुसार, सत्ता परिवर्तन से पहले प्रतिबंध व्यवस्था को मजबूत किया गया था और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे और विस्तारित किया गया।
बेसेंट ने कहा, "अक्टूबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने मुझे रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों — लुकोइल और रोजनेफ्ट — पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था और हमने ऐसा किया।" हालांकि उन्होंने किसी नए प्रतिबंध की घोषणा नहीं की।
प्रतिबंधों का उद्देश्य और रूसी अर्थव्यवस्था पर असर
रूस की जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उन्हें रूसी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल-आधारित आय को कम करना है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण में रूस काफी हद तक ऊर्जा निर्यात राजस्व पर निर्भर है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से बैंकों, ऊर्जा कंपनियों, रक्षा उद्योग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाते हुए कई दौर के प्रतिबंध लगाए हैं।
गौरतलब है कि इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को लेकर नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों के बीच अब भी बहस जारी है।
आलोचकों का नज़रिया
ट्रंप प्रशासन पर रूस के प्रति नरमी बरतने के आरोप लगते रहे हैं, जिसके जवाब में यह बयान आया है। आलोचकों का कहना है कि रूस ने चीन और भारत जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ाकर प्रतिबंधों से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली है। तेल और गैस की वैश्विक माँग बनी रहने से रूस को अभी पर्याप्त आय मिल रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन और यूरोप में यह बहस फिर तेज हो गई है कि मॉस्को पर आर्थिक दबाव और बढ़ाया जाए या नहीं।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। रूसी तेल की आपूर्ति में व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं, जो भारत सहित तेल आयातक देशों को प्रभावित करेगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन मौजूदा प्रतिबंध ढाँचे को और कड़ा करता है या कूटनीतिक रास्ता अपनाता है।