ट्रंप के ज़ेलेंस्की-बदलाव बयान पर क्रेमलिन सहमत, पेस्कोव बोले — यूक्रेन को शांति चाहने वाला नेता चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय (क्रेमलिन) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 12 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें यूक्रेन में राष्ट्रपति परिवर्तन की बात कही गई थी। पेस्कोव ने कहा कि मॉस्को चाहता है कि यूक्रेनी नेतृत्व में कोई ऐसा व्यक्ति उभरे जो जमीनी हकीकत स्वीकार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति रखे और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करे।
ट्रंप का मूल बयान और पेस्कोव की प्रतिक्रिया
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा था कि अब यूक्रेन में नए राष्ट्रपति का चुनाव कराने का समय आ गया है। उनका दावा था कि वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की कई मौकों पर रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ट्रंप ने स्पष्ट कहा, 'मुझे लगता है कि अब यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए।'
समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती को दिए साक्षात्कार में पेस्कोव ने इन्हीं भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हुए कहा कि मॉस्को ऐसे यूक्रेनी नेतृत्व का स्वागत करेगा जो यथार्थवाद के आधार पर शांति वार्ता के लिए तैयार हो।
ज़ेलेंस्की का जवाब — सीजफायर की शर्त पर चुनाव
रविवार को ज़ेलेंस्की ने एबीसी न्यूज को दिए साक्षात्कार में कहा कि यदि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमत होते हैं, तो वे यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए तैयार हैं। यह पेशकश महत्वपूर्ण है क्योंकि ज़ेलेंस्की अब तक किसी भी चुनावी कार्यक्रम को जारी युद्ध की आड़ में टालते रहे हैं।
डीजल विवाद और ट्रंप की नाराज़गी
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यूक्रेन द्वारा रूस की डीजल रिफाइनरियों को निशाना बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई। ट्रंप ने पुतिन के साथ तीन लाख टन से अधिक डीजल आपूर्ति का समझौता करने के बाद वैश्विक ईंधन संकट के लिए ज़ेलेंस्की को जिम्मेदार ठहराया।
ट्रंप ने कहा, 'जेलेंस्की जो चाहे कर सकते हैं लेकिन वह यह नहीं कर सकते क्योंकि यह पूरी दुनिया की समस्या है।' उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस समय डीजल ईंधन रिफाइनिंग क्षमता की भारी कमी जैसी चुनौती का सामना कर रही है।
व्यापक संदर्भ — संघर्ष का मौजूदा परिदृश्य
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध को ढाई वर्ष से अधिक हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति वार्ता की संभावनाएँ तलाश रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार है जब वाशिंगटन और मॉस्को दोनों ने यूक्रेनी नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर एक जैसी भाषा का इस्तेमाल किया है — एक संयोग जिसे आलोचक कीव पर सम्मिलित दबाव की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
आगे क्या होगा
ज़ेलेंस्की की 60 दिनों के सीजफायर की शर्त पर चुनाव की पेशकश अब रूस और अमेरिका दोनों के लिए कूटनीतिक परीक्षा बन गई है। यदि पुतिन इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो यह युद्ध की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है; यदि नहीं, तो ट्रंप और पेस्कोव के बयान महज दबाव की कूटनीति बनकर रह जाएंगे।