पुतिन ने पढ़ा ज़ेलेंस्की का खुला पत्र, क्रेमलिन बोला — पश्चिमी देश फोन उठाएँ, बातचीत होगी
सारांश
मुख्य बातें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की द्वारा भेजा गया खुला पत्र पढ़ लिया है और उन्हें विभिन्न विश्व नेताओं की प्रतिक्रियाओं से भी अवगत कराया गया है। 5 जून को सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच के दौरान क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने यह जानकारी एक साक्षात्कार में दी।
ज़ेलेंस्की के पत्र में क्या था
यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपने खुले पत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध को सीधे संवाद के ज़रिए समाप्त करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने लिखा, 'यूक्रेन हमारे और आपके बीच सीधे संवाद के माध्यम से इस युद्ध को समाप्त करना चाहता है। मैं एक बैठक का प्रस्ताव रखता हूँ।'
ज़ेलेंस्की ने सुझाव दिया कि ऐसी वार्ता की मेज़बानी स्विट्ज़रलैंड, तुर्किए या किसी अरब देश में हो सकती है। उन्होंने बैठक के लिए एक स्पष्ट तिथि तय करने और वार्ता अवधि के दौरान पूर्ण युद्धविराम लागू करने की पेशकश भी की।
क्रेमलिन की प्रतिक्रिया
प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि रूस वार्ता प्रक्रिया फिर से शुरू होने की उम्मीद रखता है। उनके शब्दों में, 'हमें उम्मीद है कि मौजूदा गतिरोध अंततः टूटेगा और संवाद के नए प्रयास शुरू होंगे। हम अभी भी मौजूदा माध्यमों के ज़रिए अमेरिकी पक्ष के साथ संपर्क में हैं।'
पेस्कोव ने यूरोपीय देशों को सीधा संदेश देते हुए कहा, 'यदि यूरोपीय देश रूस के साथ संवाद न करने की अपनी नीति छोड़ दें, तो उन्हें केवल फोन उठाकर बातचीत शुरू करनी होगी।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यूक्रेन संघर्ष अत्यंत जटिल है और इसका समाधान सरल नहीं होगा।
ईरान कनेक्शन और व्यापक संदर्भ
ज़ेलेंस्की ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम इस वार्ता को और अधिक ज़रूरी बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच कूटनीतिक संपर्क लगभग ठप पड़े हुए हैं और युद्ध को तीन वर्ष से अधिक समय बीत चुका है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ज़ेलेंस्की ने सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा हो, लेकिन इस बार क्रेमलिन की ओर से अपेक्षाकृत खुले स्वर में प्रतिक्रिया आई है। विश्लेषकों के अनुसार, पेस्कोव का बयान संभावित कूटनीतिक द्वार खोलने का संकेत हो सकता है, हालाँकि ठोस प्रगति अभी दूर है।
आगे की राह
दुनिया की नज़र अब इस पर है कि क्या दोनों पक्ष किसी तटस्थ देश में वार्ता की मेज़ पर बैठने के लिए सहमत होते हैं। युद्धविराम की शर्तें और वार्ता का एजेंडा अभी तक अनिश्चित है। कूटनीतिक हलकों में इस पहल को संभावित लेकिन नाज़ुक माना जा रहा है।