यूएई के अर्थव्यवस्था मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक ने संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मरी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट की। यह मुलाकात भारत-यूएई के बीच गहराती 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
संसद भवन में स्वागत और मुख्य संदेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यूएई के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मरी और उनके प्रतिनिधिमंडल का संसद भवन में स्वागत कर खुशी हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि यह मुलाकात दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, साझा हितों और घनिष्ठ सहयोग पर आधारित मजबूत एवं स्थायी साझेदारी को दर्शाती है। इस अवसर पर द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई।
नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात और एमआरओ पर चर्चा
यूएई के मंत्री ने इसी दौरे के अंतर्गत केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु से भी भेंट की। बैठक के बाद राम मोहन नायडू ने एक्स पर लिखा कि भारत और यूएई के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में हमेशा से हवाई संपर्क (एरियल कनेक्टिविटी) बढ़ाने पर जोर रहा है। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में नए सहयोग के अवसरों — विशेष रूप से मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (एमआरओ) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) — पर सार्थक चर्चा हुई।
भारत-यूएई संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और यूएई दुनिया की सबसे पुरानी और मजबूत व्यापारिक साझेदारियों में से एक साझा करते हैं। 1960 के दशक में तेल की खोज और 1971 में यूएई के संघीय राष्ट्र बनने के बाद दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिली। गौरतलब है कि पिछले एक दशक में यह रिश्ता पारंपरिक व्यापारिक साझेदारी से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में परिवर्तित हो चुका है।
सहयोग का विस्तार और वर्तमान स्थिति
आज यह सहयोग व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच गहरे संबंधों तक विस्तारित हो चुका है। दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में एक-दूसरे के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में शामिल हैं। 21वीं सदी में भारत-यूएई संबंध सफल द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरे हैं।
आगे की दिशा
एमआरओ और विमानन विनिर्माण पर हुई चर्चा संकेत देती है कि दोनों देश अब केवल यात्री उड़ानों से आगे बढ़कर तकनीकी और औद्योगिक सहयोग की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में ठोस समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।