यूएई ने UNGA में ईरान के कब्जे वाले तीन द्वीपों का मुद्दा उठाया, खाड़ी में कूटनीति पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा में 29 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीति और शांतिपूर्ण वार्ता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने महासभा के मंच से ईरान के कब्जे वाले तीन अमीराती द्वीपों — ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा — का मुद्दा उठाया और उनके शांतिपूर्ण समाधान की माँग की। खाड़ी में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा दोनों पर पड़ रहा है।
यूएई का सैद्धांतिक रुख
अल मरार ने महासभा में स्पष्ट किया कि यूएई की विदेश नीति तनाव घटाने, कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर टिकी है। उन्होंने कहा, 'हमारा सैद्धांतिक रुख तनाव कम करने, देशों के बीच दूरियाँ कम करने, कूटनीति और बातचीत को बढ़ावा देने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर आधारित है। हम गैरकानूनी तरीके से ताकत के इस्तेमाल या उसकी धमकी और दबाव बनाने का भी विरोध करते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ रहा है।
तीन विवादित द्वीपों का मुद्दा
ईरान ने 1971 में ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा पर नियंत्रण कर लिया था। ये तीनों द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के सैन्य ठिकाने भी इन द्वीपों पर कथित तौर पर मौजूद हैं। अल मरार ने कहा, 'ईरान ने तीन अमीराती द्वीपों पर अपना कब्जा जारी रखा है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते। यूएई लगातार इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की माँग करता रहा है। इसे सीधे बातचीत के जरिए या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाकर सुलझाया जा सकता है।' गौरतलब है कि खाड़ी में संघर्ष बढ़ने के बीच अमेरिका ने अबू मूसा और ग्रेटर टुनब पर हमले किए हैं।
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर जोर
अल मरार ने विस्तृत सैन्य ब्यौरे में जाए बिना समुद्री मार्गों पर जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप सप्लाई चेन, व्यापार और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अनिवार्य है। होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी व्यवधान वैश्विक बाजारों को सीधे प्रभावित करता है।
फिलिस्तीन मुद्दे पर यूएई की कड़ी प्रतिक्रिया
यूएई अरब देशों में इजराइल के सबसे करीबी साझेदारों में से एक है, फिर भी अल मरार ने फिलिस्तीनी इलाकों में इजरायली कार्रवाइयों की 'कड़े शब्दों में' निंदा की। उन्होंने वेस्ट बैंक में बढ़ती इजरायली सैन्य कार्रवाई, बस्तियाँ बसाने की गतिविधियों, बसने वालों की हिंसा और पूर्वी यरुशलम तथा धार्मिक स्थलों पर उल्लंघनों को तत्काल रोकने की माँग की। यह बयान इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी।
आगे की राह
यूएई ने यह भी स्पष्ट किया कि तमाम क्षेत्रीय संकटों के बावजूद उसने अपने विकास और आर्थिक प्रगति की गति बनाए रखी है। अल मरार ने कहा, 'इस देश का निर्माण चुनौतियों की गैरमौजूदगी में नहीं हुआ, बल्कि उनका सामना करते हुए हुआ है।' खाड़ी संकट के स्थायी समाधान के लिए यूएई का कूटनीतिक दबाव आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के प्रयास कर रहा है।