29 सितंबर 2026
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यूएई ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया ईरान के कब्जे वाले तीन द्वीपों का मुद्दा, खाड़ी में कूटनीति पर दिया जोर

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यूएई ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया ईरान के कब्जे वाले तीन द्वीपों का मुद्दा, खाड़ी में कूटनीति पर दिया जोर

सारांश

खाड़ी संकट के बीच यूएई ने संयुक्त राष्ट्र में दोहरा संदेश दिया — ईरान के पाँच दशक पुराने द्वीप कब्जे को चुनौती दी और साथ ही कूटनीति को हथियार बनाने का आह्वान किया। होर्मुज की नाकाबंदी का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने 29 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में खाड़ी में तनाव घटाने और कूटनीति को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
ईरान ने 1971 से ग्रेटर टुनब , लेसर टुनब और अबू मूसा द्वीपों पर कब्जा जमा रखा है; यूएई ने इसे अस्वीकार्य बताया।
अल मरार ने द्विपक्षीय बातचीत या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जरिए शांतिपूर्ण समाधान की माँग की।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी संघर्ष के दौरान अबू मूसा और ग्रेटर टुनब पर हमले किए।
इजराइल के करीबी साझेदार होने के बावजूद यूएई ने वेस्ट बैंक में इजराइली कार्रवाइयों की 'कड़े शब्दों में' निंदा की।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने 29 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में खाड़ी क्षेत्र में तनाव घटाने और कूटनीतिक संवाद को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान के कब्जे वाले तीन अमीराती द्वीपों — ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा — के विवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुनः उठाया। खाड़ी में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला पर भी पड़ रहा है।

यूएई का सैद्धांतिक रुख

अल मरार ने महासभा में स्पष्ट किया कि यूएई की विदेश नीति कूटनीति और बातचीत पर टिकी है। उन्होंने कहा, 'हमारा सैद्धांतिक रुख तनाव कम करने, देशों के बीच दूरियाँ घटाने, कूटनीति और बातचीत को बढ़ावा देने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर आधारित है। हम गैरकानूनी तरीके से ताकत के इस्तेमाल या उसकी धमकी और दबाव बनाने का भी विरोध करते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ और कूटनीतिक हलचल एक साथ तेज हैं।

तीन विवादित द्वीपों का मुद्दा

ईरान ने 1971 में ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा पर नियंत्रण कर लिया था। ये तीनों द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुँच के लिहाज से रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैन्य ठिकाने भी इन द्वीपों पर कथित तौर पर मौजूद हैं। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी में संघर्ष के बीच अमेरिका ने अबू मूसा और ग्रेटर टुनब पर हमले किए हैं।

अल मरार ने कहा, 'ईरान ने तीन अमीराती द्वीपों पर अपना कब्जा जारी रखा है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते। यूएई लगातार इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की माँग करता रहा है। इसे सीधे बातचीत के जरिए या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाकर सुलझाया जा सकता है।' गौरतलब है कि यह विवाद पाँच दशकों से अधिक समय से अनसुलझा है और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के लिए एक पुराना संवेदनशील मुद्दा रहा है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर

अल मरार ने संघर्ष के विवरण में गए बिना समुद्री मार्गों पर जहाजों की स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों के अनुरूप आपूर्ति शृंखला, व्यापार और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक है। होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व के कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित करती है।

फिलिस्तीन पर यूएई की कड़ी प्रतिक्रिया

यूएई अरब देशों में इजराइल के सबसे करीबी साझेदारों में से एक है, फिर भी अल मरार ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इजराइल की कार्रवाइयों की 'कड़े शब्दों में' निंदा की। उन्होंने वेस्ट बैंक में बढ़ती सैन्य कार्रवाई, बस्तियाँ बसाने की गतिविधियों, बसने वालों की हिंसा, और पूर्वी यरुशलम तथा धार्मिक स्थलों पर उल्लंघनों को तत्काल रोकने की माँग की। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इससे एक दिन पहले रविवार को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की थी।

आगे की राह

यूएई के इस बयान को क्षेत्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल मरार ने कहा, 'इस देश का निर्माण चुनौतियों की गैरमौजूदगी में नहीं हुआ, बल्कि उनका सामना करते हुए हुआ है।' यह बयान खाड़ी संकट के बीच यूएई की स्थिरता और कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित करता है। तीनों विवादित द्वीपों के मुद्दे पर ईरान की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख आने वाले समय में इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ इजराइल जैसे करीबी साझेदार की नीतियों की निंदा करके अरब जनमत को साधना। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का सवाल सिर्फ संप्रभुता का नहीं, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का भी है — जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज करती है। नेतन्याहू की अबू धाबी यात्रा और अगले दिन यूएई के इस बयान का संयोग बताता है कि खाड़ी की कूटनीति परदे के पीछे भी उतनी ही सक्रिय है जितनी संयुक्त राष्ट्र के मंच पर।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएई और ईरान के बीच तीन द्वीपों का विवाद क्या है?
ग्रेटर टुनब, लेसर टुनब और अबू मूसा तीन द्वीप हैं जिन पर ईरान ने 1971 में कब्जा कर लिया था और जिन्हें यूएई अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। ये द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास रणनीतिक स्थान पर हैं और दशकों से दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र रहे हैं।
यूएई ने संयुक्त राष्ट्र में क्या माँग रखी?
यूएई के विदेश मामलों के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने 29 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में खाड़ी में तनाव कम करने, कूटनीति को बढ़ावा देने और ईरान के कब्जे वाले तीन द्वीपों के विवाद को या तो द्विपक्षीय बातचीत या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के जरिए सुलझाने की माँग रखी।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति शृंखला पर पड़ता है, इसीलिए यूएई ने समुद्री मार्गों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया।
इजराइल के करीबी होने के बावजूद यूएई ने उसकी निंदा क्यों की?
यूएई अरब देशों में इजराइल का एक प्रमुख साझेदार है, लेकिन अल मरार ने वेस्ट बैंक में बढ़ती सैन्य कार्रवाई, बस्तियाँ बसाने और पूर्वी यरुशलम में उल्लंघनों की कड़ी निंदा की। यह बयान यूएई की अरब जगत में अपनी साख बनाए रखने और फिलिस्तीन मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
नेतन्याहू की अबू धाबी यात्रा का इस बयान से क्या संबंध है?
रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को अबू धाबी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। अगले दिन यूएई के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए बयान को इस मुलाकात के बाद की कूटनीतिक स्थिति के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालाँकि दोनों के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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