मोजतबा खामेनेई की चेतावनी: खाड़ी देश नहीं बनेंगे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ढाल
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने मंगलवार, 26 मई को हज के अवसर पर जारी एक संदेश में खाड़ी देशों को सीधी चेतावनी दी — कि वे अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए सुरक्षा कवच नहीं बनेंगे। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने सोमवार रात ईरान पर हमला किया और दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है।
खामेनेई का संदेश: मुख्य बातें
खामेनेई के कार्यालय ने यह संदेश एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया। इसमें कहा गया, 'समय का पहिया पीछे नहीं घूमता। खाड़ी देशों की ताकतें अब अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए ढाल नहीं बनेंगी और अमेरिका को अब इस क्षेत्र में साजिशें रचने और ठिकाने बनाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिलेगी।'
सर्वोच्च नेता ने मुस्लिम जगत से अपील की कि वे हज को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ वैश्विक विरोध का मंच बनाएं। उन्होंने सभी इस्लामी देशों से एकजुट होकर 'नई इस्लामिक सभ्यता' के निर्माण का आह्वान भी किया।
ईरानी जायरीनों से विशेष संदेश
खामेनेई ने ईरानी हज यात्रियों से कहा कि वे 'थोपे गए तीसरे युद्ध' में ईरान की जीत की कहानी अन्य मुस्लिम देशों के भाई-बहनों तक पहुँचाएं। उन्होंने फिलिस्तीन और अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति तथा अमेरिका के विरुद्ध अंतिम जीत के लिए प्रार्थना करने का भी आग्रह किया।
ऐतिहासिक संदर्भ: ईरान के प्रतिरोध की विरासत
खामेनेई ने ईरान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 47 वर्ष पहले ईरान की मुस्लिम जनता उठ खड़ी हुई थी और पहलवी शासन को उखाड़ फेंका था। उनके अनुसार, उस संघर्ष ने अमेरिकी और जायोनी प्रभाव को ईरान से पूरी तरह समाप्त कर दिया।
उन्होंने सद्दाम हुसैन के बाथवादी शासन द्वारा ईरान पर किए गए हमले का भी जिक्र किया और कहा कि मुजाहिदीनों ने आठ वर्ष के 'पवित्र रक्षा युद्ध' में विश्व शक्तियों के समर्थन के बावजूद बाथवादी शासन को पीछे हटने पर मजबूर किया। गौरतलब है कि इस्लामी गणराज्य ने आर्थिक नाकेबंदी, तख्तापलट की साज़िशों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपना प्रतिरोध जारी रखा है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष: ताज़ा घटनाक्रम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि सोमवार रात ईरान पर किए गए हमले आत्मरक्षा के उद्देश्य से थे और इनका मकसद समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य के निकट मिसाइल खतरों को रोकना था। दूसरी ओर, ईरान ने भी दावा किया कि उसने अमेरिका के एमक्यू-9 रिपर ड्रोन को मार गिराया है।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, लेकिन ताज़ा हमलों ने उस समझौते की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और ईरान के बढ़ते दबाव के बीच यह संघर्ष नई करवट ले सकता है। खामेनेई की चेतावनी को क्षेत्रीय देशों के लिए एक स्पष्ट राजनयिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है — कि तेहरान अपने पड़ोसियों से अमेरिकी सैन्य सहयोग से दूरी बनाने की अपेक्षा रखता है।