8 अक्टूबर 2026
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यूएनएएमए की तालिबान से अपील: अफगानिस्तान में महिलाओं-लड़कियों की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता

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यूएनएएमए की तालिबान से अपील: अफगानिस्तान में महिलाओं-लड़कियों की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता

सारांश

जुलाई-सितंबर 2026 के बीच हेरात और काबुल में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की को तालिबान के ड्रेस कोड नियमों के कथित उल्लंघन पर गिरफ्तार किया गया। संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए तालिबान से भेदभावपूर्ण कार्रवाई रोकने की अपील की है।

मुख्य बातें

यूएनएएमए ने 8 अक्टूबर 2026 को अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारियों पर 'गंभीर चिंता' जताई।
जुलाई-सितंबर 2026 के बीच हेरात और काबुल में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारियाँ कथित तौर पर तालिबान के ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन — हिजाब न पहनने, मेकअप करने या बिना महरम बाहर जाने — से जुड़ी थीं।
यूएनएएमए ने माना कि सामाजिक कलंक के कारण वास्तविक संख्या आधिकारिक आँकड़ों से अधिक हो सकती है।
तालिबान ने अगस्त 2021 से महिलाओं पर शिक्षा, रोज़गार और आवागमन से जुड़े व्यापक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनमें छठी कक्षा के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर पाबंदी शामिल है।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि वह देश में महिलाओं और लड़कियों की हालिया गिरफ्तारियों, हिरासत और गिरफ्तारी की धमकियों को लेकर 'गंभीर रूप से चिंतित' है। संगठन ने तालिबान प्रशासन से महिलाओं को निशाना बनाने वाली भेदभावपूर्ण कार्रवाइयाँ तत्काल रोकने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने की अपील की है।

मुख्य घटनाक्रम

यूएनएएमए के आँकड़ों के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच हेरात और काबुल में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया। कई अन्य महिलाओं को गिरफ्तारी की धमकियाँ भी मिलीं।

संगठन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सामाजिक कलंक के कारण बड़ी संख्या में मामले दर्ज ही नहीं हो पाते, इसलिए वास्तविक संख्या आधिकारिक आँकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

गिरफ्तारियों के कारण

यूएनएएमए के अनुसार, ये गिरफ्तारियाँ कथित तौर पर तालिबान के ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन से जुड़ी थीं। महिलाओं को हिजाब न पहनने, बाल दिखाई देने, रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनने, मेकअप करने, या बिना महरम (पति, भाई या पिता जैसे करीबी पुरुष अभिभावक) के सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद रहने के आरोप में हिरासत में लिया गया।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हिरासत में ली गई अधिकतर महिलाओं को कई घंटे बाद रिहा कर दिया गया। यूएनएएमए ने महिला दुकानदारों सहित अन्य महिलाओं के साथ गाली-गलौज, मारपीट और धमकियों की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई।

मानवाधिकारों का उल्लंघन

यूएनएएमए ने कहा, 'ये घटनाएँ महिलाओं और लड़कियों के आवागमन की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और आत्मनिर्णय के अधिकारों का उल्लंघन हैं। गिरफ्तारियाँ और हिरासत महिलाओं और लड़कियों को सामाजिक कलंक और और अधिक हाशिये पर जाने के खतरे में डालती हैं।'

यह ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2021 में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर शिक्षा, रोज़गार, आवागमन और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से जुड़े व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं।

शिक्षा पर प्रतिबंध की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि तालिबान ने लड़कियों के लिए छठी कक्षा के बाद स्कूल में पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके साथ ही, महिलाओं के विश्वविद्यालयों में प्रवेश पर भी पाबंदी लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन प्रतिबंधों की लंबे समय से निंदा करता आया है, लेकिन तालिबान प्रशासन ने अब तक अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं किया है।

यूएनएएमए की माँग और आगे का रास्ता

यूएनएएमए ने तालिबान प्रशासन से महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण कार्रवाई बंद करने, समस्त अफगान नागरिकों के मानवाधिकारों और गरिमा का सम्मान सुनिश्चित करने तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करने का आग्रह किया है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव और संयुक्त राष्ट्र की अपीलों के बावजूद तालिबान की नीतियों में बदलाव आएगा या नहीं — यह प्रश्न अफगानिस्तान में मानवाधिकार पर्यवेक्षकों के लिए केंद्रीय चुनौती बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह सवाल उठाता है कि कूटनीतिक दबाव की इस रणनीति की प्रभावशीलता कितनी है। वास्तविक संख्या आधिकारिक आँकड़ों से अधिक होने की स्वीकारोक्ति खुद संयुक्त राष्ट्र कर रहा है — यह दर्शाता है कि ज़मीनी हकीकत रिपोर्टों में दिखने वाले चित्र से कहीं अधिक गंभीर है। जब तक तालिबान को वैश्विक मान्यता और आर्थिक एकीकरण की कोई वास्तविक शर्त महिला अधिकारों से नहीं जोड़ी जाती, ये अपीलें प्रतीकात्मक ही रहेंगी।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान में यूएनएएमए ने किस बात पर चिंता जताई है?
यूएनएएमए ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच हेरात और काबुल में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की की गिरफ्तारी या हिरासत पर गंभीर चिंता जताई है। ये गिरफ्तारियाँ कथित तौर पर तालिबान के ड्रेस कोड नियमों के उल्लंघन से जुड़ी थीं।
तालिबान ने महिलाओं को किन कारणों से गिरफ्तार किया?
यूएनएएमए के अनुसार, महिलाओं को हिजाब न पहनने, बाल दिखाई देने, रंग-बिरंगे स्कार्फ पहनने, मेकअप करने या बिना महरम (करीबी पुरुष अभिभावक) के सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद रहने पर गिरफ्तार किया गया। अधिकतर महिलाओं को कई घंटे हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया।
अफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं पर क्या-क्या प्रतिबंध लगाए हैं?
अगस्त 2021 में सत्ता संभालने के बाद से तालिबान ने महिलाओं पर शिक्षा, रोज़गार, आवागमन और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी से जुड़े व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। लड़कियों के लिए छठी कक्षा के बाद स्कूल जाना और महिलाओं के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित है।
यूएनएएमए ने तालिबान से क्या माँगें रखी हैं?
यूएनएएमए ने तालिबान प्रशासन से महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध भेदभावपूर्ण कार्रवाई बंद करने, सभी अफगान नागरिकों के मानवाधिकारों और गरिमा का सम्मान सुनिश्चित करने, तथा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन करने का आग्रह किया है।
क्या अफगानिस्तान में महिला गिरफ्तारियों की वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है?
हाँ, यूएनएएमए ने खुद स्वीकार किया है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सामाजिक कलंक के कारण बड़ी संख्या में मामले रिपोर्ट ही नहीं हो पाते, इसलिए वास्तविक संख्या आधिकारिक आँकड़े — कम से कम 52 — से कहीं अधिक हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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