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यूएन महासभा 81वें सत्र में 193 देश, युद्ध-एआई-जलवायु संकट होंगे केंद्र में

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यूएन महासभा 81वें सत्र में 193 देश, युद्ध-एआई-जलवायु संकट होंगे केंद्र में

सारांश

दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंच पर इस सप्ताह एक साथ कई संकट टकराएंगे — यूक्रेन युद्ध का पाँचवाँ साल, गाजा का दर्द, सूडान की तबाही और बेकाबू AI का खतरा। मोदी, शी और पुतिन की अनुपस्थिति में भी यह बैठक तय करेगी कि दुनिया इन संकटों से लड़ने की कितनी इच्छाशक्ति रखती है।

मुख्य बातें

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की उच्चस्तरीय बैठक में 140 देशों के नेता और 53 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इस वर्ष बैठक की थीम है — 'भरोसा फिर से कायम करना, बदलाव को संभालना: ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।' PM नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पुतिन बैठक में अनुपस्थित; भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस.
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका द्वारा वीजा न दिए जाने के कारण बैठक से बाहर रखा गया।
गाजा, यूक्रेन ( रूसी हमले का पाँचवाँ वर्ष ), सूडान गृहयुद्ध और AI के खतरे प्रमुख एजेंडा बिंदु हैं।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान इस सत्र के लिए महासभा के अध्यक्ष हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की उच्चस्तरीय बैठक इस सप्ताह न्यूयॉर्क में हो रही है, जिसमें 140 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष तथा अन्य 53 देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि एकत्रित हो रहे हैं। यह बैठक ऐसे कठिन वैश्विक परिदृश्य में हो रही है जहाँ यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष, सूडान का गृहयुद्ध और बेकाबू होती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चुनौतियाँ एक साथ मुँह बाए खड़ी हैं। इस सत्र की थीम है — 'भरोसा फिर से कायम करना, बदलाव को संभालना: ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।'

मुख्य घटनाक्रम

परंपरा के अनुसार, बैठक की शुरुआत ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के संबोधन से होगी, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप महासभा को संबोधित करेंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार को मंच से बोलेंगे और कथित तौर पर गाजा में इजरायल की कार्रवाइयों का बचाव करेंगे, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना हो चुकी है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ट्रंप के संबोधन के एक दिन बाद बोलेंगे — यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका और ईरान वर्तमान में जारी संघर्ष में एक-दूसरे के विरोधी पक्ष में हैं, और यह संघर्ष अपने सातवें महीने में पहुँच चुका है।

कौन होगा अनुपस्थित

इस बार महासभा में दुनिया के तीन बड़े नेता अनुपस्थित रहेंगे — भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिनभारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को महासभा को संबोधित करेंगे। शी जिनपिंग की अनुपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वह गुरुवार को वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से द्विपक्षीय मुलाकात के लिए अमेरिका आने वाले हैं। वहीं, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अमेरिका ने वीजा देने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते वह इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे।

प्रमुख चर्चा के मुद्दे

इस उच्चस्तरीय सप्ताह में खाड़ी क्षेत्र का संघर्ष, यूक्रेन युद्ध — जो अब रूसी हमले के पाँचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है — गाजा के हालात, और सूडान का गृहयुद्ध केंद्रीय विषय रहेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, सूडान में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि वहाँ नरसंहार जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इस वर्ष चर्चा की सूची में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अनियंत्रित खतरे भी शामिल हो गए हैं। जलवायु संकट, आतंकवाद, वैश्विक भुखमरी और गरीबी भी एजेंडे पर रहेंगे।

असली कूटनीति: मंच के पीछे

विशेषज्ञों का मानना है कि महासभा के हॉल में होने वाले भाषण इस आयोजन का सबसे दृश्यमान लेकिन हमेशा सबसे प्रभावशाली हिस्सा नहीं होते। असली कूटनीतिक गतिविधियाँ प्रायः यूएन मिशनों, होटलों और संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में बनाए गए अस्थायी बैठक कक्षों में होती हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मेरा मानना है कि हमें इस हफ्ते का फायदा उठाना चाहिए, ताकि मौजूदा संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण नेताओं के बीच ज्यादा से ज्यादा बैठकें हो सकें।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष अमेरिका और कई मुस्लिम देशों के बीच हुई एक बैठक ने गाजा के लिए शांति योजना का रास्ता तैयार किया था।

बांग्लादेशी विदेश मंत्री करेंगे अध्यक्षता

इस सत्र के लिए बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा का अध्यक्ष चुना गया है और वह बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी गुटेरेस की उस बात से सहमति जताई है जिसमें उन्होंने गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' बनाने के रास्ते का जिक्र किया, जो पिछले वर्ष की अनौपचारिक बैठकों से निकला था — यह ध्यान देने योग्य है क्योंकि ट्रंप संयुक्त राष्ट्र की लगातार आलोचना करते रहे हैं। आगामी दिनों में इन वार्ताओं और अनौपचारिक संपर्कों से कुछ ठोस परिणाम निकलने की उम्मीद की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शी और पुतिन — अनुपस्थित हैं। शी जिनपिंग का न्यूयॉर्क छोड़कर वाशिंगटन में ट्रंप से मिलना यह संकेत देता है कि असली शक्ति-कूटनीति अब यूएन के हॉल से बाहर खिसक चुकी है। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को अमेरिकी वीजा से वंचित करना — उस मंच पर जहाँ 'सभी के लिए न्याय' की थीम है — महासभा की विश्वसनीयता पर सीधा प्रश्नचिह्न है। आलोचकों का कहना है कि जब तक बड़े फैसले लेने वाले नेता खुद गलियारों में अनौपचारिक बैठकें कर रहे हों, तब तक संयुक्त राष्ट्र का मंच राजनीतिक प्रदर्शन से ज्यादा कुछ नहीं बन पाता।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन महासभा 81वें सत्र की उच्चस्तरीय बैठक क्या है?
यह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का वार्षिक उच्चस्तरीय सप्ताह है जिसमें दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर संबोधन देते हैं। इस वर्ष 81वें सत्र में 140 देशों के नेता और 53 अन्य देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
इस साल महासभा में कौन-से बड़े मुद्दे छाए रहेंगे?
यूक्रेन युद्ध (रूसी हमले का पाँचवाँ वर्ष), गाजा संघर्ष, सूडान का गृहयुद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरे, जलवायु संकट, आतंकवाद, भुखमरी और गरीबी इस बैठक के प्रमुख एजेंडा बिंदु हैं। खाड़ी क्षेत्र का संघर्ष भी चर्चा में रहेगा जो अपने सातवें महीने में है।
PM मोदी यूएन महासभा में क्यों नहीं होंगे?
स्रोत के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार UNGA उच्चस्तरीय बैठक में शामिल नहीं होंगे। भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर करेंगे जो शनिवार को महासभा को संबोधित करेंगे।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास यूएन बैठक में क्यों नहीं आ सके?
अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को वीजा देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण वह इस उच्चस्तरीय बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। यह घटनाक्रम उस बैठक की थीम — 'सभी के लिए काम करने वाला संयुक्त राष्ट्र' — के संदर्भ में विशेष रूप से विवादास्पद माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस सत्र पर क्या कहा?
गुटेरेस ने कहा कि इस हफ्ते का फायदा उठाकर मौजूदा संकटों से जुड़े नेताओं के बीच अधिक से अधिक बैठकें होनी चाहिए। उन्होंने पिछले वर्ष की उस अहम बैठक का जिक्र किया जिसमें अमेरिका और कई मुस्लिम देशों के बीच हुई वार्ता से गाजा शांति योजना का रास्ता निकला था।
राष्ट्र प्रेस
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