अमेरिकी सीनेट ने ईरान पर ट्रंप की युद्ध शक्तियाँ सीमित कीं, 50-48 से प्रस्ताव पारित
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट ने 24 जून 2025 को ईरान वॉर पावर्स रिज़ॉल्यूशन को 50 के मुकाबले 48 वोटों से पारित कर दिया, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की स्वीकृति के बिना ईरान में किसी भी अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई से रोका गया है। फरवरी में दोनों देशों के बीच टकराव शुरू होने के बाद से यह पहली बार है जब कांग्रेस के किसी सदन ने ऐसा प्रस्ताव पारित किया हो।
प्रस्ताव में क्या है
कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित इस कानूनी दस्तावेज़ के अनुसार, यह प्रस्ताव 'राष्ट्रपति को निर्देश देता है कि वे ईरान के अंदर या उसके विरुद्ध चल रही सैन्य कार्रवाई से अमेरिकी सेना को वापस बुला लें, जब तक कि युद्ध की औपचारिक घोषणा या सैन्य बल के उपयोग की विशेष स्वीकृति न दी जाए।' समर्थकों का कहना है कि ईरान के खिलाफ यह 'स्वेच्छा से चुना गया युद्ध' था, जिसे कांग्रेस की मंजूरी के बिना शुरू किया गया।
मतदान का स्वरूप
प्रस्ताव के पक्ष में अधिकांश डेमोक्रेट सांसदों के साथ चार रिपब्लिकन सीनेटर भी शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि एक डेमोक्रेट सीनेटर ने प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया। यह द्विदलीय समर्थन ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति के प्रति बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
प्रस्ताव की सीमाएँ और प्रतीकात्मक महत्व
कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने इस प्रस्ताव को मुख्यतः प्रतीकात्मक करार दिया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि अमेरिकी सेना फिलहाल ईरान के साथ किसी सक्रिय सैन्य अभियान में शामिल नहीं है, इसलिए यह प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से प्रभावहीन हो सकता है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान युद्धविराम के बाद शुरुआती वार्ता के दौर में हैं।
सीनेटर टिम केन का रुख
सीनेटर टिम केन ने पिछले सप्ताह पत्रकारों से कहा था, 'मुझे लगता है कि वोट कराने का यह सही समय है। अगर हम सच में स्थिरता के दौर में हैं, तो हमें कांग्रेस को शामिल किए बिना इसे फिर से शुरू नहीं होने देना चाहिए।' डेमोक्रेट्स का तर्क है कि भले ही युद्धविराम समझौता हो चुका हो, वॉर पावर्स रिज़ॉल्यूशन भविष्य में किसी भी अनधिकृत सैन्य कदम पर रोक लगाने के लिए आवश्यक है।
आगे क्या होगा
यह प्रस्ताव अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहाँ रिपब्लिकन बहुमत होने के कारण इसके पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। यदि किसी चमत्कारिक स्थिति में यह पारित भी हो जाता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास इसे वीटो करने का अधिकार होगा। विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रस्ताव का असली महत्व कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक है — यह कांग्रेस की युद्ध-शक्तियों पर पुनः दावेदारी की कोशिश है।