अमेरिका-ईरान परमाणु डील पर 'फेक रिपोर्ट्स' से भड़के उपराष्ट्रपति वेंस, बोले- बिना सत्यापन के पोस्ट पर भरोसा क्यों?
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 12 जून 2025 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अमेरिका-ईरान परमाणु डील को लेकर फैलाई जा रही कथित गलत जानकारियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को किसी भी रूप में नकद भुगतान नहीं किया जा रहा और न ही केवल डील साइन करने या बैठक में शामिल होने के लिए कोई धनराशि जारी की जा रही है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दोनों ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद एमओयू अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है।
वेंस ने एक्स पर क्या कहा
उपराष्ट्रपति वेंस ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैं स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म करने की संभावित डील के बारे में बहुत सारी झूठी जानकारी देख रहा हूँ। पहली बात, ईरानियों को कोई कैश नहीं मिल रहा है और सिर्फ डील साइन करने या मीटिंग में शामिल होने के लिए कोई फंड जारी नहीं किया जा रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग आईआरजीसी पर भरोसा न करने की बात करते हैं, वही बिना सत्यापित स्रोत वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर आँख मूँदकर विश्वास कर रहे हैं।
डील की संरचना और शर्तें
वेंस के अनुसार, यह समझौता इस प्रकार तैयार किया गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा-संबंधी चिंताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करता है, तो उसे और पूरे क्षेत्र को आर्थिक लाभ मिलेंगे। वेंस ने यह भी जोड़ा कि इस समझौते में क्षेत्र के पुनर्निर्माण और स्थायी शांति स्थापित करने की वास्तविक क्षमता है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और मीडिया पर आरोप
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने भी 'फेक न्यूज मीडिया' पर निशाना साधते हुए कहा था कि ईरान ने जो शर्तें मीडिया को लीक कीं, उनका लिखित रूप से सहमत हुई शर्तों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने इसे सच्चाई से बिल्कुल परे बताया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने संवेदनशील कूटनीतिक वार्ताओं के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हों।
मीडिया आलोचना पर वेंस का तर्क
वेंस ने पिछले कुछ घंटों की रिपोर्टिंग को 'हैरान करने वाली' बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग एक महीने पहले तक ट्रंप को ऐतिहासिक राष्ट्रपति बता रहे थे, वही अब बिना पुष्टि वाली रिपोर्टों के आधार पर इस समझौते की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि 'राष्ट्रपति किसी न किसी तरीके से हमारे लिए सकारात्मक और संतोषजनक परिणाम सुनिश्चित करेंगे।'
आगे क्या होगा
इस्लामाबाद एमओयू के अंतिम चरण में होने की पुष्टि के बाद अब सभी की नजरें औपचारिक हस्ताक्षर और उसके बाद की कार्यान्वयन प्रक्रिया पर टिकी हैं। विश्लेषकों के अनुसार, डील की वास्तविक परीक्षा तब होगी जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सत्यापन-योग्य प्रतिबद्धताएँ सार्वजनिक की जाएँगी।